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नर्सों को मिलेगा यूनिक कोड, देशभर में कर पाएंगी काम, अलग-अलग राज्यों में नहीं कराना होगा रजिस्ट्रेशन
Mon, 20 May 2019 07:22 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 20 May 2019 07:22 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
- फोटो : गूगल
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देशभर के अस्पतालों, कॉलेजों में कार्यरत नर्सों और पढ़ाई करने वाली नर्सिंग छात्राओं का रजिस्ट्रेशन अब राज्य स्तर के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर होगा। मतलब एक ही रजिस्ट्रेशन पर कोई भी नर्स देश के किसी भी हिस्से में काम कर पाएगी। इसके लिए इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) ने आदेश जारी कर दिया है। नया नियम इसी सत्र से लागू कर दिया गया है।
दरअसल अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों में काम करने के लिए नर्स के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अभी तक सभी प्रदेशों में अलग-अलग होती थी। मतलब यूपी में काम करने की इच्छुक नर्स को यहां के नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करना पड़ता था। उसी नर्स को दूसरे प्रदेश में काम करने के लिए उस प्रदेश में अलग से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था पर अब ऐसा नहीं होगा।
नर्सिंग पास करते ही छात्राओं को आईएनसी की ओर से तैयार किए गए नर्सेज रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग सिस्टम (एनआरटीएस) पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद उम्मीदवार को एक यूनिक कोड दिया जाएगा जिसका प्रयोग देश के किसी भी हिस्से में काम करने के लिए किया जा सकेगा।
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दरअसल अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों में काम करने के लिए नर्स के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अभी तक सभी प्रदेशों में अलग-अलग होती थी। मतलब यूपी में काम करने की इच्छुक नर्स को यहां के नर्सिंग काउंसिल में रजिस्ट्रेशन करना पड़ता था। उसी नर्स को दूसरे प्रदेश में काम करने के लिए उस प्रदेश में अलग से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था पर अब ऐसा नहीं होगा।
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नर्सिंग पास करते ही छात्राओं को आईएनसी की ओर से तैयार किए गए नर्सेज रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग सिस्टम (एनआरटीएस) पर अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके बाद उम्मीदवार को एक यूनिक कोड दिया जाएगा जिसका प्रयोग देश के किसी भी हिस्से में काम करने के लिए किया जा सकेगा।
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सभी नर्सों के लिए यूनिक कोड जरूरी
कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्रिंसिपल डॉ. केके गुप्ता बताते हैं कि नर्सिंग की छात्राओं के साथ सभी नर्सों को भी यह यूनिक कोड हासिल करना अनिवार्य है। इसके लिए सभी को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में नर्स और छात्राओं को आधार नंबर, हाईस्कूल का सर्टिफिकेट आदि दस्तावेज देने होंगे।
एक नर्स कई जगहों पर नहीं कर पाएगी काम
डॉ. केके गुप्ता के मुताबिक अभी तक नर्सों का कोई ट्रैकिंग सिस्टम नहीं था। अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों के दस्तावेजों पर फर्जी तरह से नर्स की अधिक संख्या दिखाई जाती थी। ज्यादातर नर्सों का रजिस्ट्रेशन नंबर एक साथ कई मेडिकल कॉलेज या अस्पतालों में प्रयोग में लाया जाता है। अब इस पर भी लगाम लग जाएगी। अगर कोई एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर को कहीं दोबारा प्रयोग में लाएगा तो वह इस ट्रैकिंग सिस्टम से पकड़ में आ जाएगा।
इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने नर्सेज रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग सिस्टम (एनआरटीएस) लांच कर दिया है। यह काफी बेहतर सिस्टम है। इससे फर्जीवाड़ा पर लगाम तो लगेगा ही साथ में नर्सें एक ही यूनिक कोड के सहारे देश के किसी भी हिस्से में नौकरी भी कर पाएंगी।
- डॉ. केके गुप्ता, प्रिंसिपल, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर
कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्रिंसिपल डॉ. केके गुप्ता बताते हैं कि नर्सिंग की छात्राओं के साथ सभी नर्सों को भी यह यूनिक कोड हासिल करना अनिवार्य है। इसके लिए सभी को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में नर्स और छात्राओं को आधार नंबर, हाईस्कूल का सर्टिफिकेट आदि दस्तावेज देने होंगे।
एक नर्स कई जगहों पर नहीं कर पाएगी काम
डॉ. केके गुप्ता के मुताबिक अभी तक नर्सों का कोई ट्रैकिंग सिस्टम नहीं था। अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों के दस्तावेजों पर फर्जी तरह से नर्स की अधिक संख्या दिखाई जाती थी। ज्यादातर नर्सों का रजिस्ट्रेशन नंबर एक साथ कई मेडिकल कॉलेज या अस्पतालों में प्रयोग में लाया जाता है। अब इस पर भी लगाम लग जाएगी। अगर कोई एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर को कहीं दोबारा प्रयोग में लाएगा तो वह इस ट्रैकिंग सिस्टम से पकड़ में आ जाएगा।
इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने नर्सेज रजिस्ट्रेशन एंड ट्रैकिंग सिस्टम (एनआरटीएस) लांच कर दिया है। यह काफी बेहतर सिस्टम है। इससे फर्जीवाड़ा पर लगाम तो लगेगा ही साथ में नर्सें एक ही यूनिक कोड के सहारे देश के किसी भी हिस्से में नौकरी भी कर पाएंगी।
- डॉ. केके गुप्ता, प्रिंसिपल, कॉलेज ऑफ नर्सिंग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर