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नोटबंदी इफेक्ट: महानगरों से लौटने लगे बुंदेलखंड के मजदूर
राजेश सिंह/रामलखन, अमर उजाला, हमीरपुर
Updated Fri, 02 Dec 2016 09:02 PM IST
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मुंबई, गुजरात व नई दिल्ली से बुंदेलखंड आने वाली ट्रेनों में भीड़ बढ़ गई है। खास तौर से जनरल बोगी ठसाठस आ रही है। इन बोगियों में महानगरों से मजदूर लौट रहे हैं। वजह साफ है कि नोटबंदी की वजह से पगार मिलना बंद हो गई। मजदूरों की मानें तो फैक्ट्री मालिकों ने कह दिया है कि अभी मंदी का दौर है। हालात सुधरे तो संदेशा भेजेंगे। फिर काम पर आ जाना।
जिले में करीब एक लाख 33 हजार जॉबकार्ड धारक मजदूर हैं। काम करने के बाद भी मनरेगा का पैसा भुगतान नहीं हुआ तो ज्यादातर मजदूर मुंबई, गुजरात एवं नई दिल्ली जाते हैं। गुजरात के विभिन्न शहरों में ट्रांसपोर्ट और कपड़ा मिलों में हमीरपुर के श्रमिक ज्यादा है। इसी तरह नई दिल्ली जाने वाले मजदूर कंस्ट्रक्शन के काम में लगते हैं। लेकिन इन दिनों हालात बदल गए हैं। अब यहां से मजदूर गुजरात व नई दिल्ली जाने के बजाय वहां से लौट रहे हैं। वापस लौटने वाले मजदूरों का दर्द एक जैसा हैै। वे कहते हैं कि सेठ पैसा देने से मना कर दिया है। ऐसे में वहां रहकर खाते क्या? घर लौट आए हैं। किसी न किसी तरह यहां खाने का इंतजाम हो जाएगा।
नोटबंदी से घाटा ही घाटा
मुंबई से लौटे पौथिया गांव निवासी दिनेश कुमार का कहना है कि वह चीनी के कप प्लेट वाली फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री मालिक ने किराये पर मशीन ले रखी है। नोटबंदी की वजह से मालिक किराया नहीं दे पाया तो काम बंद हो गया। उसे फैक्ट्री से प्रतिमाह 12 हजार रुपये मिलते थे। फैक्ट्री मालिक ने रुपये देने से मना कर दिया तो घर चले आए हैं। फैक्ट्री मालिक ने भरोसा दिया है कि हालात ठीक हुआ तो बुलाएगा।
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दो माह बाद दोबारा जाएगा गुजरात
चार माह पहले रोजी रोटी की तलाश में सूरत गया शिवबालक भी नोटबंदी के चलते अपने गांव पौथिया लौट आया है। उसने कहा कि वह विपुल नगर में साड़ी की कंपनी में मशीन चलाता था। उसे प्रतिदिन 350 रुपये मिलते थे। नोटबंदी के कंपनी में रोज भुगतान लेने वालों की छटनी हो गई। इसलिए घर लौट आए। उसके साथ आसपास के गांवों के दो दर्जन लोग घर लौटे हैं। दो माह बाद बुलाने क बात हुई है।
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जिले में करीब एक लाख 33 हजार जॉबकार्ड धारक मजदूर हैं। काम करने के बाद भी मनरेगा का पैसा भुगतान नहीं हुआ तो ज्यादातर मजदूर मुंबई, गुजरात एवं नई दिल्ली जाते हैं। गुजरात के विभिन्न शहरों में ट्रांसपोर्ट और कपड़ा मिलों में हमीरपुर के श्रमिक ज्यादा है। इसी तरह नई दिल्ली जाने वाले मजदूर कंस्ट्रक्शन के काम में लगते हैं। लेकिन इन दिनों हालात बदल गए हैं। अब यहां से मजदूर गुजरात व नई दिल्ली जाने के बजाय वहां से लौट रहे हैं। वापस लौटने वाले मजदूरों का दर्द एक जैसा हैै। वे कहते हैं कि सेठ पैसा देने से मना कर दिया है। ऐसे में वहां रहकर खाते क्या? घर लौट आए हैं। किसी न किसी तरह यहां खाने का इंतजाम हो जाएगा।
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नोटबंदी से घाटा ही घाटा
मुंबई से लौटे पौथिया गांव निवासी दिनेश कुमार का कहना है कि वह चीनी के कप प्लेट वाली फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री मालिक ने किराये पर मशीन ले रखी है। नोटबंदी की वजह से मालिक किराया नहीं दे पाया तो काम बंद हो गया। उसे फैक्ट्री से प्रतिमाह 12 हजार रुपये मिलते थे। फैक्ट्री मालिक ने रुपये देने से मना कर दिया तो घर चले आए हैं। फैक्ट्री मालिक ने भरोसा दिया है कि हालात ठीक हुआ तो बुलाएगा।
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दो माह बाद दोबारा जाएगा गुजरात
चार माह पहले रोजी रोटी की तलाश में सूरत गया शिवबालक भी नोटबंदी के चलते अपने गांव पौथिया लौट आया है। उसने कहा कि वह विपुल नगर में साड़ी की कंपनी में मशीन चलाता था। उसे प्रतिदिन 350 रुपये मिलते थे। नोटबंदी के कंपनी में रोज भुगतान लेने वालों की छटनी हो गई। इसलिए घर लौट आए। उसके साथ आसपास के गांवों के दो दर्जन लोग घर लौटे हैं। दो माह बाद बुलाने क बात हुई है।