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UP: मिस यूपी विजेता को बनाया मोहरा... होटल कारोबारी से ली थी 2.5 करोड़ की रंगदारी; दरबार में आते थे पुलिसवाले

Sun, 10 Aug 2025 03:25 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 10 Aug 2025 03:25 PM IST
सार

कानपुर में कमिश्नरी पुलिस की जांच में कई ऐसे पुलिसकर्मियों के नाम सामने आ रहे हैं जो नियमित अखिलेश दुबे के दरबार में हाजिरी लगाने आते थे। साकेतनगर के कार्यालय के बाहर कारों की लाइन लगती थी। यह विधिक राय के साथ ही विभागीय कार्रवाई होने पर सहयोग लेते थे। 

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lawyer Akhilesh Dubey had extorted 2.5 crores from a hotelier by using the Miss UP winner as a pawn In Kanpur
अखिलेश दुबे - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में जबरन वसूली, धमकी देने समेत अन्य धाराओं में दर्ज रिपोर्ट में जेल भेजे गए अधिवक्ता अखिलेश दुबे को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अखिलेश दुबे ने कानपुर में होटल कारोबारी को दुष्कर्म के आरोप में फंसाकर 2.5 करोड़ की रंगदारी लेने के लिए मिस यूपी के खिताब की विजेता को मोहरा बनाया गया था। 
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उसने यह खिताब कई साल पहले जीता था। बातों बातों में यह बात अखिलेश ने ही होटल कारोबारी को बताई थी। हालांकि खिताब कब और कहां जीता यह नहीं बताया। सूत्रों के अनुसार, युवती ने शहर के ही महाविद्यालय से आर्ट्स में स्नातक किया है। 
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इस युवती ने मॉडलिंग के क्षेत्र में कॅरियर बनाना तय किया। कई इंस्टीट्यूट में मॉडलिंग की प्रैक्टिस भी की। खिताब जीतने के बाद वह खुद को मिस इंडिया के रूप में देखना चाहती थी। 
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जीत की चकाचौंध से बाहर निकलने के कुछ दिन बाद कमाई के लिए कई नौकरियां तलाश की लेकिन सफलता नहीं मिली। माना जा रहा है कि आरोप लगाने के बदले उसे मोटी रकम दी गई थी। बाद में उसने वीमेन संस्था बना ली।

होटल कारोबारी के मुताबिक, अखिलेश ने 2.5 करोड़ रुपये लेने के बाद एफआर लगवा दी थी। इसकी एक कॉपी अखिलेश ने खुद कारोबारी को सौंपी थी। इसमें पुलिस ने जांच रिपोर्ट में कारोबारी के ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत माना था। कहा था कि साक्ष्यों की कमी के आधार पर रिपोर्ट खारिज की गई है।
 

बस्तियों की लड़कियों को बनाता था मोहरा
अखिलेश दुबे लोगों को फंसाने के लिए शहर की ही बस्तियों की गरीब लड़कियों और युवतियों को मोहरा बनाता था। वह महज कुछ हजार रुपये का लालच देकर दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप लगा देती थीं। उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि मामला कोर्ट तक नहीं जाएगा। कुछ माह के अंदर पुलिस इसमें फाइनल रिपोर्ट लगा देगी। यह सारा खुलासा अब तक की पुलिस की जांच रिपोर्ट में सामने आया है। 

 

वहीं, जिन मामलों की जांच एसआईटी कर रही है उनमें भी कई ऐसे मामले हैं जिनकी पीड़िताएं इन दिनों लापता हैं। चर्चा है कि वह डर से बिहार और झारखंड भेज दी गईं हैं। उनके जाने का खर्चा भी आरोपियों ने ही उठाया है।
 

दरबार में नियमित आते थे कई सीओ, इंस्पेक्टर और दरोगा
कमिश्नरी पुलिस की जांच में कई ऐसे पुलिसकर्मियों के नाम सामने आ रहे हैं जो नियमित अखिलेश दुबे के दरबार में हाजिरी लगाने आते थे। साकेतनगर के कार्यालय के बाहर कारों की लाइन लगती थी। 

 

यह विधिक राय के साथ ही विभागीय कार्रवाई होने पर सहयोग लेते थे। इसकी जानकारी पुलिस जांच में सामने आई है। अब तक 19 पुलिसकर्मियों के नाम सामने आ चुके हैं। ये नाम वादियों और उनके परिजनों ने पुलिस अधिकारियों को दिए हैं।

 

अखिलेश दुबे के कार्यालय में कानपुर ही नहीं कानपुर देहात, उन्नाव, फर्रुखाबाद, कन्नौज, इटावा के पुलिसकर्मी भी आवाजाही करते थे। स्पेशल टीम के एक प्रभारी और कमिश्नरी बनने से पहले क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर तो हर शनिवार और रविवार को परिवार समेत उसके यहां आते थे। 

 

उनकी कारें अक्सर साकेतनगर और गोविंदनगर में दिखाई देती थीं। क्राइम ब्रांच के एक पूर्व दरोगा की सफेद रंग की एसयूवी से कई पत्रकार और जनप्रतिनिधि भी अखिलेश दुबे के कार्यालय में पहुंचते थे। पुलिस सभी की कड़ियां जोड़कर मामले की जांच कर रही है।
 
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