Kanpur: बंदरों की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं विभाग, रोज बढ़ रहे हमले; उर्सला में बढ़े मरीज
Kanpur News: बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पार्कों और रिहायशी इलाकों में हमलों की घटनाएं बढ़ने के साथ अस्पतालों में भी बंदर के काटने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। वहीं बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी को लेकर नगर निगम और वन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
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शहर के प्रमुख पार्कों, कॉलोनियों और घरों में बंदरों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हालात यह हैं कि अस्पतालों में बंदरों के काटने के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। उर्सला अस्पताल में पहले जहां रोजाना महज 03 से 04 पीड़ित आते थे, वहीं इन दिनों यह आंकड़ा बढ़कर रोजाना 06 से 07 तक पहुंच गया है। इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के बजाय नगर निगम और वन विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
वन विभाग का दावा: अब नगर निगम के पास है बंदरों को पकड़ने का प्रभार
बंदरों के बढ़ते आतंक पर अंकुश लगाने को लेकर वन विभाग और नगर निगम दोनों ही हाथ खड़े कर रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि बंदरों को पकड़ना और उनका नियंत्रण करना अब उनकी कार्यसीमा में नहीं आता है।
अधिकारियों का कहना है कि कई वर्ष पहले बंदरों का प्रबंधन वन विभाग के अंतर्गत आता था, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी नगर निगम को सौंप दी गई थी। इस ढुलमूल रवैये के कारण शहरवासी लगातार दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं।
शासन को लिखा जा रहा पत्र, तय की जा रही कार्यक्षेत्र की जिम्मेदारी
वहीं दूसरी ओर नगर निगम की पशु कल्याण अधिकारी डॉ. शिल्पा सिंह ने बताया कि पूर्व में बंदरों से जुड़े मामले वन विभाग ही देखता था। वर्तमान में बंदरों को पकड़ने और उनके संरक्षण की प्राथमिक जिम्मेदारी किस विभाग के पास है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में शासन से पत्राचार किया जा रहा है ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और शहरवासियों को बंदरों के आतंक से राहत दिलाने के लिए प्रभावी अभियान चलाया जा सके।