कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड के मुख्य आरोपी विशाल गौतम की जमानत अर्जी सीजेएम की कोर्ट में दाखिल हुई और खारिज भी हो गई, लेकिन तीन दिन तक न तो पुलिस और न ही विशाल के परिजन को इसकी भनक लगी। शुक्रवार को जब विशाल की मां सुशीला ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर बिना उसकी जानकारी के किसी के द्वारा फर्जी तरीके से जमानत दाखिल करने का आरोप लगाया, तब पुलिस की भी नींद टूटी।
सीपी रघुबीर लाल ने तत्काल ही अर्जी लगाने वाले अधिवक्ता को बुलाकर पूछताछ की। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका कि मर्डर केस में विशाल को जेल से बाहर कौन निकालना चाहता है और इसमें उसका क्या फायदा है। पुलिस कमिश्नर का कहना है कि सभी बिंदुओं की जांच कराई जा रही है। कल्याणपुर के इंदिरानगर स्थित फ्लैट में कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या पांच सितंबर की देर रात हुई थी।
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दवा कारोबारी हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
विवेचक को तीन दिन तक नहीं लगी भनक
मामले में पुलिस ने विनीत की बहू शालू, उनके पुराने नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर को जेल भेजा गया था। घटना के बाद से विशाल जेल में ही बंद है। इस बीच 15 सितंबर को विशाल की जमानत अर्जी सीजेएम कोर्ट से खारिज हो गई। विवेचक को तीन दिन तक इसकी भनक तक नहीं लगी। शुक्रवार को जब विशाल की मां ने सीपी कार्यालय पहुंचकर किसी व्यक्ति द्वारा फर्जी तरीके से अर्जी दाखिल करने का आरोप लगाया।
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अधिवक्ता को सीपी ने बुलाकर पूछताछ की
इतना ही नहीं इन सबके पीछे वादी मुकदमा सुब्रत का हाथ होने का आरोप भी मढ़ा। जमानत कराने वाले अधिवक्ता को सीपी ने बुलाकर पूछताछ की। अधिवक्ता का कहना है कि विशाल की अनुमति के बाद ही उन्होंने विशाल की जमानत अर्जी कोर्ट में दाखिल की थी। विशाल के जेल जाने के बाद उनके जूनियर अधिवक्ता ने विशाल की पैरवी के लिए उनकी मां से मुलाकात की थी।
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विशाल ने अपनी पैरवी के लिए नियुक्त किया
उन्होंने एक-दो दिन में सोचकर बताने की बात कही थी। इसी बीच वह विशाल से जेल में मुलाकात करने पहुंचे जहां विशाल ने उन्हें ही अपनी पैरवी के लिए नियुक्त किया। विशाल ने अपने जानने वाले ऑटो चालक आदित्य कौल के माध्यम से उसका शपथपत्र लेने को कहा था। अधिवक्ता इस सवाल का जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि आखिर उन्हें किसने विशाल और उसकी मां से मिलने के लिए कहा था।
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विशाल की मां बोली-पड़ रहा दबाव
हरबंशमोहाल के मथुरी मोहाल की रहने वाली विशाल की मां सुशीला का आरोप था कि जेल में बंद उनके बेटे विशाल की जमानत व पैरवी के लिए अब तक उनकी या उनके परिवार की ओर से कोई भी अधिवक्ता नियुक्त नहीं किया गया है। उन्हें आशंका है कि वादी मुकदमा द्वारा उसके बेटे को जालसाजी में फंसाने के उद्देश्य से पूरा खेल रचा गया। सुशीला ने कहा कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि वह मुकदमे की पैरवी न कर पाएं और जिन्होंने अपराध किया है वह बच जाएं। हालांकि, सुशीला को अर्जी के बारे में किसने बताया इस पर भी वह कुछ स्पष्ट नहीं बता रही।