Kanpur Ground Report: ओडीओपी, मेट्रो और स्वास्थ्य सेवाओं ने कितनी बदली लोगों की जिंदगी? जानिए इस रिपोर्ट में
अमर उजाला टीम ने कानपुर में 'एक जिला एक उत्पाद' योजना, लेदर कारोबार, मेट्रो से यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत परखी। योजना से लाभ, जाम आदि मुद्दों को लेकर लोगों से बातचीत की गई।
विस्तार
अमर उजाला की टीम यूपी के विभिन्न जिलों का दौरा कर जमीनी स्तर पर हो रहे परिवर्तनों को गहराई से समझ रही है। टीम इन बदलावों की हकीकत को परखने के लिए अब कानपुर पहुंची। इस पड़ताल में 'एक जिला एक उत्पाद' योजना की उपयोगिता को कसौटी पर जांचा गया। कभी शहर के लिए नासूर बन चुके जाम और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विकल्पों की स्थिति का भी हाल जाना। चमड़े और उससे बने उत्पादों के लिए मशहूर कानपुर के कारोबारियों से भी बातचीत की गई। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की भी जमीनी हकीकत देखी गई।
ओडीओपी में शामिल होने से लेदर कारोबार पर क्या पड़ा असर?
कानपुर का लेदर फेमस है। इसलिए हमने लेदर कारोबारियों से बातचीत की और इस उद्योग का हाल जाना। हमने यहां कानपुर के लेदर व्यापारी सतीश कुमार से बात की। उन्होंने बताया कि हमने जब 2019 में अपना काम शुरू करा था तो ओडीओपी की उस समय बहुत ज्यादा प्रचार हो चुका था, तो ज्यादा परेशानी नहीं हुई क्योंकि उसका प्रचार-प्रसार जैसा हुआ था, उस हिसाब से हम लोग डीआईसी ऑफिस से जो लोन मिला था, बहुत आसानी तरीके से मिल गया। उस समय पैसे की कमी जरूर थी। तो उसने एक तरह से हमारे लिए संजीवनी का काम किया। हमने उससे मशीनें लीं अपना काम शुरू करा।
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मेट्रो से ट्रैफिक समस्या में कितना आया सुधार?
इस सवाल के लिए हमने स्थानीय निवासी अभिषेक सूरी से बात की। उन्होंने बताया कि वह कानपुर से हैं और ज्वेलर्स व्यापारी हैं। मेट्रो आने से असर बहुत पड़ा है, क्योंकि जो लोग ट्रैफिक में फंसते थे निरंतर जो जाम की स्थिति। अब जाम कम होने से राहत भी बहुत है। लोगों को आने-जाने में सहूलियत हुई है। स्थानीय निवासी सुमन ने बताया कि अब भीड़भाड़ कम है। अब जाम नहीं रहता है।
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सरकारी योजना से कितनी बदली लेदर कारोबारी की किस्मत?
इस सवाल के जवाब में लेदर व्यापारी सतीश कुमार ने बताया कि 2014 में जब मोदी सरकार आई थी तो उन्होंने एक बहुत बड़ा प्रोग्राम चलाया था, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया। उस समय मैं और मेरी पत्नी नौकरी कर रहे थे, तो लगा कि जॉब तो कर रहे हैं, मगर अपना काम कैसे शुरू करें। ये स्कीम आई तो हम लोगों ने इसे समझा और जाना। पांच साल के दौरान हमने मेहनत ऐसे करी कि हमें अपना काम शुरू करना है तो सारी चीजें हमने समझीं। मार्केट में समझा कहां पर कैसे क्या बनता है, कैसे क्या होता है? इंटरनेशनल मार्केट के बारे में हमने समझा, क्योंकि हम लोग पहले ही एक्सपोर्ट हाउस में जॉब कर रहे थे।
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स्वास्थ्य सेवाओं में कितना सुधार?
स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत जानने के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां हमने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. विनय कुमार से बात की। उन्होंने बताया कि इसमें डिपार्टमेंट जो नए स्टार्ट हुए हैं, उसमें गैस्ट्रोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, न्यूरोलॉजी, यूरोलॉजी, यूरोसर्जरी एंड नेफ्रोलॉजी, एंडोक्राइन समेत अन्य विभाग चल रहे हैं। ये शुरू हुए लगभग तीन साल हो गए हैं। तीन साल में मैं देखता हूं कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लगातार हर साल का रिकॉर्ड देखेंगे तो हर साल लगभग 20-30% का इजाफा हो रहा है। हम हर दिन ओपीडी में एक गैस्ट्रोलॉजी ओपीडी का उदाहरण देख लेंगे तो करीब प्रतिदिन ओपीडी में 250-300 पेशेंट आ रहे हैं।
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