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चेक बाउंस होने पर हुआ इतना जुर्माना कि उड़ गए होश, फिर नहीं करेंगे ये गलती
Thu, 17 Jan 2019 04:29 PM IST
दुष्यंत शर्मा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 17 Jan 2019 04:29 PM IST
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कानपुर जिले में न्यायाधीश सुरेश चंद्र सविता की अतिरिक्त कोर्ट द्वितीय ने चेक बांउस होने के दो मामलों में ऐसा फैसला सुनाया है जिसे जानने के बाद कोई और चेक बाउंस करने की गलती नहीं दोहराएगा। चेक बाउंस होने के फैसले में सजा के साथ लाखों का जुर्माना लगाया गया है।
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न्यायाधीश सुरेश चंद्र सविता की अतिरिक्त कोर्ट द्वितीय ने आरोपित को दोषी करार देते हुए 37.20 लाख रुपये जुर्माने और दो-दो वर्ष कैद की सजा सुनाई है। भाई-बहन के बीच के विवाद की सुनवाई करीब चार वर्ष चली। किदवई नगर वाई ब्लॉक की अनुभूति जैन ने अपने भाई कमल कुमार जैन के खिलाफ चेक बाउंस का मुकदमा 16 मई 2015 को दाखिल किया था।
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उन्होंने आरोप में एसएनटी सिक्योरिटीज लिमिटेड कानपुर के 1.20 लाख शेयर 12.36 लाख रुपये में व यूनिक इनविन लिमिटेड के 3650 शेयर 17.06 लाख रुपये में भाई को बेच दिए थे। मूल शेयर सर्टिफिकेट और ट्रांसफर भी डीड हस्ताक्षरित करके दे दिया। धनराशि की अदायगी के लिए कमल ने 10 फरवरी 2015 को 12.36 लाख रुपये का चेक दिया। उसी दिन शेयरों की और खरीद फरोख्त के एवज में 18,46,790 रुपये का एक और चेक दिया।
दोनों चेक बाउंस हो गए, नोटिस पर जवाब न मिलने के बाद अनुभूति ने एनआई एक्ट के तहत मामला दाखिल किया। अधिवक्ता कमलेश पाठक ने बताया कि भाई-बहन के बीच चेक बाउंस के इस विवाद की सुनवाई करीब चार वर्ष चली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अतिरिक्त न्यायालय ने प्रथम मामले में 15.10 लाख रुपये और दो वर्ष कैद जबकि दूसरे मामले में 22.10 लाख रुपये और दो वर्ष कैद की सजा सुनायी। 20 हजार रुपये की धनराशि सरकारी खजाने में जमा होगी।
दोनों चेक बाउंस हो गए, नोटिस पर जवाब न मिलने के बाद अनुभूति ने एनआई एक्ट के तहत मामला दाखिल किया। अधिवक्ता कमलेश पाठक ने बताया कि भाई-बहन के बीच चेक बाउंस के इस विवाद की सुनवाई करीब चार वर्ष चली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अतिरिक्त न्यायालय ने प्रथम मामले में 15.10 लाख रुपये और दो वर्ष कैद जबकि दूसरे मामले में 22.10 लाख रुपये और दो वर्ष कैद की सजा सुनायी। 20 हजार रुपये की धनराशि सरकारी खजाने में जमा होगी।