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...तस्वीरों में देखें, बच्चों-बूढ़ों और युवाओं ने कैसे समझी योग की महत्वता
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 22 Jun 2017 10:02 AM IST
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अमर उजाला योगशाला में योग करती प्रियम्वदा व उनकी टीम के साथी
- फोटो : ओपी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
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21 जून को दुनियाभर में में तीसरा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। इस विशेष दिन पर कानपुर की परशुराम वाटिका में अमर उजाला की ओर से योगशाला आयोजित हुई।
कानपुर में अमर उजाला की योगशाला
- फोटो : ओपी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
योग के अंतरराष्ट्रीय दिवस को विश्व योग दिवस भी कहते है। 11 दिसंबर 2014 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रुप में 21 जून को संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने घोषित किया। कानपुर में योगशाला के दौरान बच्चे बूढ़े सबने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया।
स्वामी शिवपाद
- फोटो : ओपी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
भारत में योग लगभग 5,000 हजार वर्ष पुरानी एक मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक प्रथा के रुप में देखा गया है। आर्ट ऑफ लिविंग के योग प्रशिक्षक स्वामी शिवपाद ने बताया कि योग हमारी जीवन शैली पर आधारित है। इससे हम अपने जीवन को और बेहतर बना सकते हैं।
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अमर उजाला योगशाला में योग करती प्रियम्वदा व उनकी टीम के साथी
- फोटो : ओपी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
स्वामी शिवपाद ने योगशाला के दौरान बताया कि योग की उत्पत्ति प्राचीन समय में भारत में हुयी थी जब लोग अपने शरीर और दिमाग में बदलाव के लिये ध्यान किया करते थे।
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अमर उजाला योगशाला में योग करने के लिए जुटी हजारों की संख्या की भीड़
- फोटो : ओपी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
पूरे विश्वभर में योग अभ्यास की एक खास तारीख की और योग दिवस के रुप में मनाने की शुरुआत भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा संयुक्त राष्ट्र आम सभा से हुयी थी।