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सीएचसी में स्टाक से ज्यादा मिले इंजेक्शन-वैक्सीन

Sun, 05 Sep 2021 01:20 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 01:20 AM IST
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Injection-vaccine found more than stock in CHC
कानपुर देहात। जिले मेें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दम भरने वाले प्रशासनिक व स्वास्थ्य अफसरों की कलई नोडल अधिकारी के औचक निरीक्षण मेें खुल गई। अकबरपुर सीएचसी के स्टोर में आक्सीटोसिन इंजेक्शन, एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) व एएसवी (एंटी स्नैक वैक्सीन) स्टाक से अधिक मिली।
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मौके पर कुछ एक्सपायर दवाएं भी पाई गई। वहीं कई दवाओं का वजन भी मानक से कम मिला। गोलमाल की आशंका पर नोडल सचिव ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन में देने की बात कही है।
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जिले मेें विकास कार्यों के लिए नियुक्त सचिव व नोडल अधिकारी नीना शर्मा ने शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अकबरपुर के स्टोर का औचक निरीक्षण किया। यहां पर उन्होंने आक्सीटोसिन इंजेक्शन, एआरवी व एएसवी के स्टाक के बारे मेें जानकारी ली। स्टाक रजिस्टर में आक्सीटोसिन के 530 इंजेक्शन अंकित थे।
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जबकि मौके पर नौ डिब्बों में 540 इंजेक्शन पाए गए। इसी तरह एआरवी व एएसवी का स्टाक भी अधिक मिला। निरीक्षण के दौरान सीएमओ डॉ. एके सिंह ने बताया कि गांवों में छिड़काव के लिए मच्छररोधी दवा पायराथ्रम 400 लीटर स्टाक है। जबकि मौके पर सिर्फ 150 लीटर ही पायराथ्रम उपलब्ध पाया गया। इसी तरह डीजल व टेमीफॉस की उपलब्धता भी कम पाई गई। कई दवाएं फरवरी माह में एक्यपायर होना पाया गया।
जबकि उन्हें स्टाक मेें नहीं रखा जाना चाहिए। नोडल सचिव ने स्टोर में रखी गई दवाओं का वजन कराया तो मात्रा मानक से कम निकली। बड़े पैमाने पर मिली खामियों पर नोडल सचिव ने मौजूद स्वास्थ्य अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि स्टाक से अधिक दवाओं का होना यह दर्शाता है कि जिले में दवाओं का छिड़काव व मरीजों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है।
नोडल सचिव ने मौजूद सीडीओ सौम्या पांडेय व सीएमओ को निर्देशित किया कि व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी आपकी है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह, एसपी केशव कुमार चौधरी, डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे।
सचिव के सामने अपने ही जाल में फंसे डीपीआरओ
कानपुर देहात। सीएचसी में निरीक्षण के दौरान नोडल सचिव नीना शर्मा ने मौजूद डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह ने गांवों में मच्छररोधी दवा छिड़काव के बाबत जानकारी ली। डीपीआरओ ने बताया कि उन्हें सिर्फ 10 लीटर टेमीफास मिला है। दवा कम पड़ने पर मिट्टी के तेल को नालियों व गंदगी वाली जगह में डलवा दिया जाता है। यह उत्तर सुनते ही नोडल सचिव ने शासन से मिट्टी तेल न दिए जाने की याद दिलाई तो मौजूद अफसर बगलें झांकने लगे।

डीपीआरओ ने कहा कि मिट्टी तेल की व्यवस्था संबंधित गांव के प्रधान करते हैं। सचिव ने प्रधानों के व्यवस्था करने पर जवाब मांगा तो डीपीआरओ चुप्पी साध गए। नोडल सचिव ने जिले मेें डेंगू व संक्रामक रोगों से बचाव के लिए की गई कार्रवाई पर हैरानी जताई। (संवाद)
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