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2030 तक देश की सड़कों पर केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही दौड़ेंगे, आईआईटी विशेषज्ञ उनका चार्जर तैयार करेंगे
Thu, 04 Jul 2019 12:22 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 04 Jul 2019 12:22 PM IST
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सीनियर प्रोफेसर शांतनु कुमार मिश्रा ने दी जानकारी
- फोटो : अमर उजाला
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2030 तक देश की सड़कों पर केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही दौड़ेंगे। बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने और ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल वाहनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
इसकी शुरुआत 2023 से कई बड़े शहरों में कर दी जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए देश भर में 60 हजार से अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित कराए जाएंगे। इसकी तकनीक तैयार करने की जिम्मेदारी आईआईटी को दी गई है।
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इसकी शुरुआत 2023 से कई बड़े शहरों में कर दी जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए देश भर में 60 हजार से अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित कराए जाएंगे। इसकी तकनीक तैयार करने की जिम्मेदारी आईआईटी को दी गई है।
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केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) की तरफ से यह प्रोजेक्ट दिया गया है। इसके तहत आईआईटी के विशेषज्ञ पॉवर ग्रिड, सोलर एनर्जी व इलेक्ट्रिसिटी जनरेट करने के अन्य माध्यमों का प्रयोग करते हुए चार्जर तैयार करेंगे जिन्हें सभी चार्जिंग स्टेशनों पर लगाया जाएगा।
विशेषज्ञों ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। पहले चरण में ई-रिक्शा और कुछ अन्य इलेक्ट्रिकल वाहनों के लिए चार्जर का प्रोटोटाइप तैयार भी कर लिया है। इसका परीक्षण भी सफल हो चुका है। अब इसे बड़ा स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
विशेषज्ञों ने इस पर काम भी शुरू कर दिया है। पहले चरण में ई-रिक्शा और कुछ अन्य इलेक्ट्रिकल वाहनों के लिए चार्जर का प्रोटोटाइप तैयार भी कर लिया है। इसका परीक्षण भी सफल हो चुका है। अब इसे बड़ा स्वरूप देने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
दो बिंदुओं पर काम करेगी विशेषज्ञों टीम
इस प्रोजेक्ट की अगुवाई आईआईटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर शांतनु कुमार मिश्रा कर रहे हैं। प्रो. शांतनु और उनकी टीम ने दो बिंदुओं पर काम करना शुरू किया है। पहला इलेक्ट्रिकल व्हीकल चार्जर तैयार करना जो विद्युत के विभिन्न श्रोतों मसलन सोलन एनर्जी, विंड एनर्जी, पॉवर ग्रिड आदि से संचालित हो सके। इसके अलावा पॉवर ग्रिड का इलेक्ट्रिकल व्हीकल के चार्जर पर प्रभाव और पावर ग्रिड को किस तरह से चार्जिंग स्टेशन पर वितरित किया जाएगा, इस पर भी विशेषज्ञ अध्ययन करेंगे।
इन संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल
इस शोध में आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों के साथ आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी बीएचयू, जीई ग्लोबल रिसर्च बेंगलुरु, वर्जीनिया टेक, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस, डेंटन, कॉनकोर्डिया यूनिवर्सिटी, इंपीरियल कॉलेज के विशेषज्ञ भी मिलकर काम कर रहे हैं।
इस प्रोजेक्ट की अगुवाई आईआईटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर शांतनु कुमार मिश्रा कर रहे हैं। प्रो. शांतनु और उनकी टीम ने दो बिंदुओं पर काम करना शुरू किया है। पहला इलेक्ट्रिकल व्हीकल चार्जर तैयार करना जो विद्युत के विभिन्न श्रोतों मसलन सोलन एनर्जी, विंड एनर्जी, पॉवर ग्रिड आदि से संचालित हो सके। इसके अलावा पॉवर ग्रिड का इलेक्ट्रिकल व्हीकल के चार्जर पर प्रभाव और पावर ग्रिड को किस तरह से चार्जिंग स्टेशन पर वितरित किया जाएगा, इस पर भी विशेषज्ञ अध्ययन करेंगे।
इन संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल
इस शोध में आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों के साथ आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी बीएचयू, जीई ग्लोबल रिसर्च बेंगलुरु, वर्जीनिया टेक, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस, डेंटन, कॉनकोर्डिया यूनिवर्सिटी, इंपीरियल कॉलेज के विशेषज्ञ भी मिलकर काम कर रहे हैं।