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Kanpur News: खारे पानी से अलग होगा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन, आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक कर रहे शोध
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कानपुर। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक अब समुद्र और खारे पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग करने का विकल्प तैयार कर रहे हैं। इस पर शोध किया जा रहा है ताकि असीमित रूप से हाइड्रोजन का भंडार मिल सके। हालांकि आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिक प्रो. कृषानु बिस्वास और उनकी टीम ने देश में ही ऐसी विशेष धातु तैयार की है जो साफ पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग कर सकती है।
उनके शोध को विज्ञान पत्रिका नेचर में भी स्थान मिला है। ग्रीन हाइड्रोजन आने वाले समय की ऊर्जा है। इस पर लंबे समय से आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर प्रो. कृषानु और अन्य संस्थानों के प्रोफेसरों की टीम शोध कर रही है। साफ पानी को तोड़कर हाइड्रोजन व ऑक्सीजन बनाने में उपयोगी नई मिश्रधातु को हाई एंट्रॉपी अलॉय कहा जाता है। यह पांच धातुओं कोबाल्ट, आयरन, गैलियम, निकेल और जिंक को मिलाकर बनाया गया है।
प्रो. कृषानु ने कहा कि नई धातु का प्रयोग आईआईटी कानपुर और मंडी में किया गया है जो साफ पानी में काफी हद तक सफल रहा है। इसका प्रोटोटाइप तैयार कर लिया गया है। हालांकि साफ पानी काफी कम मात्रा में धरती में उपलब्ध है। वहीं खारे पानी के बड़े स्रोत मौजूद है। इसे देखते हुए अब खारे पानी से हाइड्रोजन को अलग करने के लिए शोध किया जा रहा है। खनिज तत्व की मात्रा ज्यादा होने के कारण इस रिसर्च में भी कुछ बदलाव करने होंगे।
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उन्होंने बताया कि अभी पानी से हाइड्रोजन बनाने के लिए बहुत महंगी धातुएं (जैसे रुथेनियम ऑक्साइड) इस्तेमाल होती हैं। यह धातु धरती में काफी कम मात्रा में उपलब्ध है। टीम की ओर से बनाई गई नई मिश्रधातु सस्ती है। इसमें उनके साथ संस्थान के डॉ. निर्मल कुमार, आईआईटी मंडी की प्रो. अदिति हलदर, डॉ. ललिता शर्मा, आईआईटी खड़गपुर के प्रो. चंद्र शेखर तिवारी, डॉ. राकेश दास, आईआईएससी के प्रो. अभिषेक के सिंह, डॉ. अर्णो परुई, डॉ. रितेश कुमार शामिल हैं।
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उनके शोध को विज्ञान पत्रिका नेचर में भी स्थान मिला है। ग्रीन हाइड्रोजन आने वाले समय की ऊर्जा है। इस पर लंबे समय से आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर प्रो. कृषानु और अन्य संस्थानों के प्रोफेसरों की टीम शोध कर रही है। साफ पानी को तोड़कर हाइड्रोजन व ऑक्सीजन बनाने में उपयोगी नई मिश्रधातु को हाई एंट्रॉपी अलॉय कहा जाता है। यह पांच धातुओं कोबाल्ट, आयरन, गैलियम, निकेल और जिंक को मिलाकर बनाया गया है।
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प्रो. कृषानु ने कहा कि नई धातु का प्रयोग आईआईटी कानपुर और मंडी में किया गया है जो साफ पानी में काफी हद तक सफल रहा है। इसका प्रोटोटाइप तैयार कर लिया गया है। हालांकि साफ पानी काफी कम मात्रा में धरती में उपलब्ध है। वहीं खारे पानी के बड़े स्रोत मौजूद है। इसे देखते हुए अब खारे पानी से हाइड्रोजन को अलग करने के लिए शोध किया जा रहा है। खनिज तत्व की मात्रा ज्यादा होने के कारण इस रिसर्च में भी कुछ बदलाव करने होंगे।
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उन्होंने बताया कि अभी पानी से हाइड्रोजन बनाने के लिए बहुत महंगी धातुएं (जैसे रुथेनियम ऑक्साइड) इस्तेमाल होती हैं। यह धातु धरती में काफी कम मात्रा में उपलब्ध है। टीम की ओर से बनाई गई नई मिश्रधातु सस्ती है। इसमें उनके साथ संस्थान के डॉ. निर्मल कुमार, आईआईटी मंडी की प्रो. अदिति हलदर, डॉ. ललिता शर्मा, आईआईटी खड़गपुर के प्रो. चंद्र शेखर तिवारी, डॉ. राकेश दास, आईआईएससी के प्रो. अभिषेक के सिंह, डॉ. अर्णो परुई, डॉ. रितेश कुमार शामिल हैं।