कानपुर पुलिस का निशाना अचूक है। मुठभेड़ रात के अंधेरे में हो या फिर भोर मेें, पुलिस की गोली एकदम तय जगह घुटने के नीचे मांस में ही धंसती है। इससे न तो बदमाश की जान का खतरा रहता है और न लूला-लंगड़ा होने का। 15 अक्तूबर 2018 से 14 जनवरी तक 31 मुठभेड़ हुईं। इनमें 22 बदमाशों के दाएं और नौ के बाएं पैर में घुटने के नीचे गूदे (मांस) में गोली लगीं। एक भी बदमाश की हड्डी में गोली नहीं लगी। क्यों, कहीं गूदे में नाल धरके तो गोली नहीं दागी जा रही। खैर, मामला कुछ भी हो लेकिन अपराध के ग्राफ में गिरावट जरूर आई है।
पैर में बोरा बांधकर मारी जा रही गोली
बदमाश के पैर में गोली मारने के लिए पुलिस हर वह जुगाड़ कर रही है, जिससे बदमाश को ज्यादा नुकसान न हो। कहा जा रहा गोली की रफ्तार और मार को कम करने के लिए बदमाशों के पैर मेें गीला बोरा बांधा जाता है, इसके बाद गोली मारी जाती है।
मांस का घाव जल्द भर जाता है
मुठभेड़ में घायल बदमाशों में ज्यादातर का मेडिकल करने वाले एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुलिस बदमाशों के घुटने के नीचे गूदे में गोली मार रही है। इसमें दो से ढाई इंच का गहरा घाव ही दे रही है। मेडिकल के दौरान देखा गया कि पुलिस की गोली किसी भी बदमाश के पैर की हड्डी तक नहीं पहुंची। इससे बदमाश का घाव कुछ समय बाद भर जाएगा। पैर की हड्डी में गोली लगे तो हो सकता है बदमाश पूरी उम्र ठीक से न चल पाए।
कुर्सी बचाने को दे रहे पैसा और भरोसा
खुद की कुर्सी बचाने के लिए भी थानेदार मुठभेड़ कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो हर थानेदार को टारगेट दिया गया है। इसके चलते बदमाशों से सेटिंग तक की जा रही है। कुछ थानेदारों ने बदमाशों को पैसा देने के साथ ही आगे परेशान न करने की बात कही है। इतना ही नहीं उनकी जमानत का भी भरोसा दिया गया है। अब तक की मुठभेड़ों में पकड़े गए कुछ बदमाशों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गोली मारने से पहले ही थानेदारों ने पूरी सेटिंग कर ली थी। जमानत होने तक परिवार को हर माह खर्च भी देने की बात कही है। इसलिए वे मुठभेड़ में गोली खाने को तैयार हो गए।
खर्च कम करने को मुठभेड़ में पड़ोसी थाना भी शामिल
मुठभेड़ के लिए बदमाशों से सेटिंग के लिए थानेदारों को मोटा खर्च उठाना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ थानेदार खर्च कम करने के लिए पड़ोसी थानेदारों से मिलकर मुठभेड़ को अंजाम दे रहे हैं। अब तक की मुठभेड़ में कुछ ऐसे भी मामले सामने आए है, जिसमें एक ही थानेदार के गुडवर्क को दो थानों की पुलिस ने मिलकर अंजाम दिया।