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देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं किसान : शिवपाल
Thu, 13 Mar 2025 12:57 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 13 Mar 2025 12:57 AM IST
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संबोधित करते शिवपाल सिंह यादव।
- फोटो : संवाद
सैफई। सपा के राष्ट्रीय सचिव शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी समृद्धि के बिना देश का विकास अधूरा है। आधुनिक तकनीकों को अपनाने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती करने की जरूरत है।
यह बात उन्होंने चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज हैवरा में आयोजित आलू संगोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि सरकारों और संस्थानों को किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए, जिससे उन्हें सही मार्गदर्शन और संसाधन मिल सकें।
उन्होंने ताखा, बसरेहर, जसवंतनगर और सैफई ब्लॉक से आए 75 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। आलू विशेषज्ञ डॉ. अजय यादव ने बताया कि बदलते मौसम और मिट्टी की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए आलू की विशेष प्रजातियों को अपनाना जरूरी है।
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कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह ने कहा कि किसान अगर मौसम के पूर्वानुमान का सही उपयोग करें, तो प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. इंद्रपाल सिंह ने कहा कि ज्यादातर किसान सिंचाई के पुराने तरीकों पर निर्भर हैं, जिससे पानी की बर्बादी होती है। टपक सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से पानी की बचत के साथ-साथ पैदावार भी बढ़ाई जा सकती है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, उप प्राचार्य डॉ. फतेहबहादुर सिंह यादव, डॉ. अरविंद कुमार यादव, डॉ. सुधीर चंद्र, के. बघेल आदि मौजूद रहे।
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यह बात उन्होंने चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज हैवरा में आयोजित आलू संगोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि सरकारों और संस्थानों को किसानों के साथ खड़ा होना चाहिए, जिससे उन्हें सही मार्गदर्शन और संसाधन मिल सकें।
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उन्होंने ताखा, बसरेहर, जसवंतनगर और सैफई ब्लॉक से आए 75 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया। आलू विशेषज्ञ डॉ. अजय यादव ने बताया कि बदलते मौसम और मिट्टी की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए आलू की विशेष प्रजातियों को अपनाना जरूरी है।
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कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह ने कहा कि किसान अगर मौसम के पूर्वानुमान का सही उपयोग करें, तो प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. इंद्रपाल सिंह ने कहा कि ज्यादातर किसान सिंचाई के पुराने तरीकों पर निर्भर हैं, जिससे पानी की बर्बादी होती है। टपक सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों से पानी की बचत के साथ-साथ पैदावार भी बढ़ाई जा सकती है।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, उप प्राचार्य डॉ. फतेहबहादुर सिंह यादव, डॉ. अरविंद कुमार यादव, डॉ. सुधीर चंद्र, के. बघेल आदि मौजूद रहे।