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दफ्तर दिन भर खाली, रात में चहके हड़ताली
अमर उजाला ब्यूरो /कानपुर
Updated Fri, 12 Aug 2016 01:08 AM IST
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उप श्रामायुक्त कार्यालय पर धरना देकर नारेबाजी करते कर्मचारी।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की हड़ताल के चलते गुरुवार को भी सरकारी कार्यालयों में ताले लटके रहे। कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में कई जगहों पर प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हालांकि रात को कई मांगें मानी जाने और हड़ताल खत्म होने की खबर से हड़ताली कर्मचारियों में खुशियों की लहर दौड़ पड़ी।
हड़ताल के दूसरे दिन सर्वोदय नगर स्थित श्रमायुक्त कार्यालय में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राज्य कर्मचारी संघ के जिला मंत्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेश सरकार को चुनाव में भुगतना पड़ेगा। प्रदेश भर में 16 लाख से ज्यादा राज्य कर्मचारी हैं। उधर उपश्रमायुक्त कार्यालय में जिला अध्यक्ष आरसी कनौजिया के नेतृत्व में बैठक हुई। इसमें उन्होंने कहा कि सरकार ने हमारी मांगों पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। बैठक के दौरान मो. राशिद, राजकुमार वाल्मीकि, एसएम जेड, बीएल गुलाबिया, सुरेश यादव, रामस्वरूप आनंद वाजपेयी मौजूद रहे।
उधर ट्रेजरी विभाग में तालाबंदी करके कर्मचारी बाहर बैठे रहे। इसके अलावा आरटीओ, पॉलिटेक्निक समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर नारेबाजी की। भूपेश अवस्थी ने बताया कि सरकार को दो दिन में 1750 करोड़ के राजस्व का घाटा हुआ है।
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हड़ताल से पढ़ाई प्रभावित
हड़ताल का असर पढ़ाई पर भी पड़ा है। माध्यमिक व बेसिक स्कूल में जहां पठन पाठन ठप रहा तो पालिटेक्निक, आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों में भी क्लास नहीं लगीं। गुरुवार को पालिटेक्निक में स्टूडेंट तो आए लेकिन कॉलेज में न शिक्षक थे न ही कर्मचारी। कुछ ऐसा ही हाल आईटीआई का रहा। थर्ड ईयर के स्टूडेंट सुमित अवस्थी ने बताया कि एक भी शिक्षक कैंपस नहीं पहुंचा। पालीटेक्निक के प्रिंसिपल डॉ. आर के सिंह ने हड़ताल की जानकारी से इनकार किया। उन्होंने कहा कि फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट 16 से आएंगे। वहीं आईटीआई प्रिंसिपल के एम सिंह ने कहा कि हड़ताल के चलते शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ है।
काली पट्टी बांधकर किया काम
हैलट व उर्सला अस्पताल में गुरुवार को कर्मचारियों ने काला फीता लगाकर काम किया। साथ ही चिकित्सा कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों बीएल गुलाबिया, राजकुमार बाल्मीकि व विजय शंकर बंगाली ने वार्डों में घूम-घूम कर कर्मचारियों को काला फीता बांधा। इस दौरान सुरेश कुमार, शंकर बंगाली, ऋषि मोहन, सुरेश कुमार मौजूद रहे।
जरूरी काम लटके
हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा परेशानी आरटीओ और श्रमायुक्त कार्यालय में आने वाले लोगों को हुई। दफ्तर बंद होने की वजह से मायूस होकर लोगों घर लौटना पड़ा। इनका कहना था कि अब सोमवार के बाद ही काम होंगे।
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हड़ताल के दूसरे दिन सर्वोदय नगर स्थित श्रमायुक्त कार्यालय में कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राज्य कर्मचारी संघ के जिला मंत्री प्रभात मिश्रा ने कहा कि कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होने पर प्रदेश सरकार को चुनाव में भुगतना पड़ेगा। प्रदेश भर में 16 लाख से ज्यादा राज्य कर्मचारी हैं। उधर उपश्रमायुक्त कार्यालय में जिला अध्यक्ष आरसी कनौजिया के नेतृत्व में बैठक हुई। इसमें उन्होंने कहा कि सरकार ने हमारी मांगों पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। बैठक के दौरान मो. राशिद, राजकुमार वाल्मीकि, एसएम जेड, बीएल गुलाबिया, सुरेश यादव, रामस्वरूप आनंद वाजपेयी मौजूद रहे।
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उधर ट्रेजरी विभाग में तालाबंदी करके कर्मचारी बाहर बैठे रहे। इसके अलावा आरटीओ, पॉलिटेक्निक समेत कई अन्य विभागों के कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर नारेबाजी की। भूपेश अवस्थी ने बताया कि सरकार को दो दिन में 1750 करोड़ के राजस्व का घाटा हुआ है।
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हड़ताल से पढ़ाई प्रभावित
हड़ताल का असर पढ़ाई पर भी पड़ा है। माध्यमिक व बेसिक स्कूल में जहां पठन पाठन ठप रहा तो पालिटेक्निक, आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों में भी क्लास नहीं लगीं। गुरुवार को पालिटेक्निक में स्टूडेंट तो आए लेकिन कॉलेज में न शिक्षक थे न ही कर्मचारी। कुछ ऐसा ही हाल आईटीआई का रहा। थर्ड ईयर के स्टूडेंट सुमित अवस्थी ने बताया कि एक भी शिक्षक कैंपस नहीं पहुंचा। पालीटेक्निक के प्रिंसिपल डॉ. आर के सिंह ने हड़ताल की जानकारी से इनकार किया। उन्होंने कहा कि फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट 16 से आएंगे। वहीं आईटीआई प्रिंसिपल के एम सिंह ने कहा कि हड़ताल के चलते शिक्षण कार्य प्रभावित हुआ है।
काली पट्टी बांधकर किया काम
हैलट व उर्सला अस्पताल में गुरुवार को कर्मचारियों ने काला फीता लगाकर काम किया। साथ ही चिकित्सा कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों बीएल गुलाबिया, राजकुमार बाल्मीकि व विजय शंकर बंगाली ने वार्डों में घूम-घूम कर कर्मचारियों को काला फीता बांधा। इस दौरान सुरेश कुमार, शंकर बंगाली, ऋषि मोहन, सुरेश कुमार मौजूद रहे।
जरूरी काम लटके
हड़ताल के चलते सबसे ज्यादा परेशानी आरटीओ और श्रमायुक्त कार्यालय में आने वाले लोगों को हुई। दफ्तर बंद होने की वजह से मायूस होकर लोगों घर लौटना पड़ा। इनका कहना था कि अब सोमवार के बाद ही काम होंगे।