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स्टूडेंट्स में गुस्सा, आईएमए के बोल सरकारी
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Sat, 27 Dec 2014 02:28 AM IST
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग की निवर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ. आरती लाल चंदानी के ट्रांसफर से स्टूडेंट्स में गुस्सा है लेकिन वह करियर को देखते हुए खुला विरोध नहीं करना चाहते।
नाम न छापने के अनुरोध पर इसे गलत बता रहे हैं तो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) इसे रूटीन मामला बताते हुए पल्ला झाड़ रहा है। इन सबके बीच मेडिकल कॉलेज का सबसे महत्वपूर्ण मेडिसिन विभाग अब पूरी तरह प्रोफेसर विहीन हो चुका है।
28 फरवरी 14 को हुए मेडिकल कॉलेज छात्र-पुलिस संघर्ष में पीड़ित मेडिकल स्टूडेंट्स से ‘अमर उजाला’ ने बात की तो सभी ने ट्रांसफर को गलत बताया। कहा कि, ‘मैम का जानबूझकर तबादला किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज प्रकरण में मैम ने स्टूडेंट्स के लिए बहुत लड़ाई लड़ी। बड़े-बड़ों से पंगा लिया। हमारी लड़ाई को कमजोर करने की यह साजिश है। पहले से ही हम पर कंप्रोमाइज करने का दबाव बनाया जा रहा है।
एसआईटी जांच कर चुकी है लेकिन चार्जशीट नहीं दाखिल कर रही है। जिस एसएसपी को कोर्ट ने हटाया उसे राजधानी का एसएसपी बनाकर सम्मानित किया गया है। मैम ने कोई प्रशासनिक पद लेने से पहले ही मना कर दिया था लेकिन इसके बाद भी उन्हें जबरदस्ती जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से भेजा जा रहा है’।
डीजी से बात कर किया रिलीव : प्रिंसिपल
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने कहा कि डॉ. आरती लाल चंदानी के ट्रांसफर का लेटर मिलने के बाद उन्होंने डीजी से बात की थी। डीजी के निर्देश के बाद ही उन्हें रिलीव किया गया। यह शासन का काम है। इससे आगे क्या कहा जा सकता है।
सरकारी नौकरी में ट्रांसफर तो होते ही हैं : डॉ. किरन
आईएमए कानपुर की अध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय ने कहा कि सरकारी नौकरी में तो ट्रांसफर होते ही रहते हैं। यह कोई नई बात नहीं है। मेरा हुआ और कई अन्य का हुआ है। आप लोग उन्हें (डॉ. चंदानी) ज्यादा जानते हैं इसलिए ऐसा सवाल कर रहे हैं।
मैं छुट्टी पर हूं और अभी तक किसी ने उनसे इस संबंध में कोई बात भी नहीं की है। यदि कार्यकारिणी की तरफ से कोई प्रस्ताव आएगा तो उस पर विचार किया जाएगा। किसी को लगता है कि कुछ गलत हुआ है तो उन्हें बताए।
कुछ नहीं कह सकते हैं : डॉ. गुप्ता
आईएमए कानपुर के सेक्रेटरी डॉ. आरसी गुप्ता से डॉ. चंदानी के ट्रांसफर प्रकरण पर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि वह कुछ नहीं कह सकते हैं। फिर बोले कि, ‘यदि मैडम का ट्रांसफर प्रोफेसर के पद पर होता तो यह गलत होता।
उन्हें प्रिंसिपल बनाया गया है, यह तो अच्छी बात है। सरकार ने नियम-कानून देखकर ही उनका ट्रांसफर किया होगा।’
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नाम न छापने के अनुरोध पर इसे गलत बता रहे हैं तो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) इसे रूटीन मामला बताते हुए पल्ला झाड़ रहा है। इन सबके बीच मेडिकल कॉलेज का सबसे महत्वपूर्ण मेडिसिन विभाग अब पूरी तरह प्रोफेसर विहीन हो चुका है।
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28 फरवरी 14 को हुए मेडिकल कॉलेज छात्र-पुलिस संघर्ष में पीड़ित मेडिकल स्टूडेंट्स से ‘अमर उजाला’ ने बात की तो सभी ने ट्रांसफर को गलत बताया। कहा कि, ‘मैम का जानबूझकर तबादला किया गया है।
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मेडिकल कॉलेज प्रकरण में मैम ने स्टूडेंट्स के लिए बहुत लड़ाई लड़ी। बड़े-बड़ों से पंगा लिया। हमारी लड़ाई को कमजोर करने की यह साजिश है। पहले से ही हम पर कंप्रोमाइज करने का दबाव बनाया जा रहा है।
एसआईटी जांच कर चुकी है लेकिन चार्जशीट नहीं दाखिल कर रही है। जिस एसएसपी को कोर्ट ने हटाया उसे राजधानी का एसएसपी बनाकर सम्मानित किया गया है। मैम ने कोई प्रशासनिक पद लेने से पहले ही मना कर दिया था लेकिन इसके बाद भी उन्हें जबरदस्ती जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से भेजा जा रहा है’।
डीजी से बात कर किया रिलीव : प्रिंसिपल
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार ने कहा कि डॉ. आरती लाल चंदानी के ट्रांसफर का लेटर मिलने के बाद उन्होंने डीजी से बात की थी। डीजी के निर्देश के बाद ही उन्हें रिलीव किया गया। यह शासन का काम है। इससे आगे क्या कहा जा सकता है।
सरकारी नौकरी में ट्रांसफर तो होते ही हैं : डॉ. किरन
आईएमए कानपुर की अध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय ने कहा कि सरकारी नौकरी में तो ट्रांसफर होते ही रहते हैं। यह कोई नई बात नहीं है। मेरा हुआ और कई अन्य का हुआ है। आप लोग उन्हें (डॉ. चंदानी) ज्यादा जानते हैं इसलिए ऐसा सवाल कर रहे हैं।
मैं छुट्टी पर हूं और अभी तक किसी ने उनसे इस संबंध में कोई बात भी नहीं की है। यदि कार्यकारिणी की तरफ से कोई प्रस्ताव आएगा तो उस पर विचार किया जाएगा। किसी को लगता है कि कुछ गलत हुआ है तो उन्हें बताए।
कुछ नहीं कह सकते हैं : डॉ. गुप्ता
आईएमए कानपुर के सेक्रेटरी डॉ. आरसी गुप्ता से डॉ. चंदानी के ट्रांसफर प्रकरण पर सवाल किया गया तो उनका कहना था कि वह कुछ नहीं कह सकते हैं। फिर बोले कि, ‘यदि मैडम का ट्रांसफर प्रोफेसर के पद पर होता तो यह गलत होता।
उन्हें प्रिंसिपल बनाया गया है, यह तो अच्छी बात है। सरकार ने नियम-कानून देखकर ही उनका ट्रांसफर किया होगा।’