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बदहाल अस्पताल: हैलट में बिजली गुल, डॉक्टरों ने मोबाइल की रोशनी में कैंसर मरीज के पेट से निकाली कैंची
Tue, 24 Dec 2019 11:41 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 24 Dec 2019 11:41 PM IST
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हैलट अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर हैलट के सर्जरी विभाग के ऑपरेशन थियेटर में लगातार दूसरे दिन मंगलवार को सर्जरी के दौरान बिजली गुल हो गई। जब बिजली गई, उस वक्त कैंसर मरीज की सर्जरी हो रही थी। अचानक घुप अंधेरा होते ही डॉक्टरों के हाथ-पैर फूल गए। जल्दी से रेजीडेंट डॉक्टरों ने मोबाइल जलाकर मरीज के पेट से कैंची और दूसरे उपकरण निकाले।
इस दौरान यह पता नहीं चल पाया कि रोगी को कितनी ब्लीडिंग हो रही है। इसके साथ ही रोगी की पल्स के संबंध में भी पता नहीं चल पाया। डॉक्टरों के पसीना छूट गया। सोमवार को भी ऑपरेशन के दौरान बिजली गुल हुई थी। मंगलवार को सर्जरी विभाग के दो आपरेशन थियेटरों में सर्जरी हो रहीं थीं।
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इस दौरान यह पता नहीं चल पाया कि रोगी को कितनी ब्लीडिंग हो रही है। इसके साथ ही रोगी की पल्स के संबंध में भी पता नहीं चल पाया। डॉक्टरों के पसीना छूट गया। सोमवार को भी ऑपरेशन के दौरान बिजली गुल हुई थी। मंगलवार को सर्जरी विभाग के दो आपरेशन थियेटरों में सर्जरी हो रहीं थीं।
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एक ऑपरेशन थियेटर में डॉ. जीडी यादव कैंसर की सर्जरी कर रहे थे और एक ओटी में डॉ. विनय कुमार प्रोस्टेट की सर्जरी कर रहे थे। अचानक सर्जरी के दौरान बिजली गुल हुई। उस वक्त लेप्रोस्कोप का हिस्सा रोगी के पेट में था। मरीजों के शरीर में कैंची, फोरसेप आदि उपकरण पड़े हुए थे।
बिजली गुल हो गई, तो पता नहीं चला कि किस आर्टरी से कितनी ब्लीडिंग हो रही है। डॉक्टरों ने जल्दी अपने मोबाइल की टॉर्च जलाई और रोगियों के शरीर के अंदर से उपकरण निकाले। डॉक्टरों का कहना है कि यूपीएस का बैक अप खत्म हो गया।
यूपीएस से सप्लाई चालू रहने पर एनेस्थीसिया विभाग की टीम मरीज की पल्स, ब्लडप्रेशर आदि मॉनीटर कर लेते हैं, लेकिन अंधेरे में कुछ समझ में नहीं आया कि रोगी के शरीर में क्या बदलाव चल रहा है। डॉक्टरों कहना है कि यह बहुत खतरनाक स्थिति है। इस संबंध में मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने कहा कि बुधवार को व्यवस्था दुरुस्त कराएंगे।
बिजली गुल हो गई, तो पता नहीं चला कि किस आर्टरी से कितनी ब्लीडिंग हो रही है। डॉक्टरों ने जल्दी अपने मोबाइल की टॉर्च जलाई और रोगियों के शरीर के अंदर से उपकरण निकाले। डॉक्टरों का कहना है कि यूपीएस का बैक अप खत्म हो गया।
यूपीएस से सप्लाई चालू रहने पर एनेस्थीसिया विभाग की टीम मरीज की पल्स, ब्लडप्रेशर आदि मॉनीटर कर लेते हैं, लेकिन अंधेरे में कुछ समझ में नहीं आया कि रोगी के शरीर में क्या बदलाव चल रहा है। डॉक्टरों कहना है कि यह बहुत खतरनाक स्थिति है। इस संबंध में मेडिकल कालेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने कहा कि बुधवार को व्यवस्था दुरुस्त कराएंगे।