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जेलर पर जानलेवा हमले का मामला : मुख्तार अंसारी पर 11 नवंबर को तय होंगे आरोप, कोर्ट ने पेश न किए जाने पर जताई नाराजगी

बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को लखनऊ की एमपीएमएलए कोर्ट में पेश न किए जाने पर मंगलवार को विशेष न्यायाधीश पवन कुमार रॉय ने नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर, कारागार के अतिरिक्त महानिदेशक, बांदा के जेल अधीक्षक, जिलाधिकारी लखनऊ व संबंधित थानेदार को पत्र लिखकर मुख्तार को कोर्ट में पेश करने और रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि मुख्तार अंसारी पर लखनऊ जेल में बंद रहने के दौरान कर्मचारियों पर पथराव, जानलेवा हमला और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचने का आरोप है। पर, 20 साल पुराने मामले में अभियोजन कोई रुचि नहीं ले रहा है। पिछली कई तारीखों से अभियोजन मौखिक रूप से कह रहा है कि मुख्तार को अगली तारीख पर कोर्ट में हाजिर कर देगा। इसके बावजूद उसे बांदा की जेल से लाकर हाजिर नहीं किया गया।

इसके चलते न तो आरोपी पर आरोप तय हो पा रहे हैं और न ही गवाही हो पा रही है। कोर्ट ने कहा कि मुख्तार अंसारी को कोर्ट में पेश करने के लिए मुख्य सचिव समेत अन्य अधिकारियों को कई बार कहा गया, लेकिन किसी भी अधिकारी ने न तो कोई रिपोर्ट कोर्ट में दी और न ही आरोपी को पेश किया, यह अत्यंत आपत्तिजनक है। कोर्ट ने मामले में मुख्तार अंसारी पर आरोप तय करने के लिए 11 नवंबर की तारीख तय की है।

गौरतलब है कि तीन अप्रैल 2000 को लखनऊ के जेलर एसएन द्विवेदी ने मुख्तार व अन्य लोगों के खिलाफ आलमबाग थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसमें बताया गया है कि 29 मार्च 2000 को पेशी से लौटे बंदियों को जेल के अंदर किया जा रहा था। तभी क्वारंटीन बैरक में बंद मुख्तार अंसारी और उसके साथी यूसुफ  चिश्ती, आलम, कल्लू पंडित, लालजी यादव ने बंदी चांद को मारना शुरू कर दिया। वादी व अन्य कर्मचारी जब चांद को बचाने पहुंचे तो आरोपियों ने उन पर पथराव कर दिया और जानमाल की धमकी देते हुए बैरक में भाग गए।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड : सीबीआई ने रिपोर्ट दर्ज कर शुरू की जांच, गोरखपुर में हुई थी हत्या, पुलिसवालों पर है आरोप

चर्चित मनीष गुप्ता हत्याकांड की सीबीआई जांच शुरू हो गई है। सीबीआई ने मंगलवार को लखनऊ की स्पेशल क्राइम ब्रांच यूनिट में एफआईआर दर्ज कर ली है। सीबीआई ने मनीष की पत्नी मीनाक्षी की ओर से गोरखपुर के रामगढ़ ताल थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर को आधार बनाया है। इसलिए केस में इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, दरोगा अक्षय मिश्रा, दरोगा विजय यादव व तीन अज्ञात पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया है।

सीबीआई अब नए सिरे से एक-एक बिंदु पर पड़ताल करेगी। जल्द ही गोरखपुर जाकर घटनास्थल का निरीक्षण भी करेगी। गौरतलब है कि कानपुर के कारोबारी मनीष की 27 सितंबर को गोरखपुर में पुलिसकर्मियों द्वारा पीट पीटकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के आरोप में इंस्पेक्टर समेत छह पुलिसकर्मी जेल भेजे जा चुके हैं।
 
अब तक एसआईटी कर रही थी जांच
अभी तक इस मामले की जांच एसआईटी कर रही थी। एसआईटी सभी छह आरोपियों को जेल भेज चुकी है। तमाम अहम साक्ष्य भी जुटाए हैं। केवल चश्मदीदों के कोर्ट में बयान होने बाकी थे। अब जांच सीबीआई अपने स्तर से करेगी।

मीनाक्षी बोलीं... अब न्याय मिलने का भरोसा
एफआईआर दर्ज होने के बाद मीनाक्षी ने कहा कि अब उनको भरोसा है कि न्याय मिलेगा। दोषियों को सजा मिलेगी। अब सरकार ने उन सभी मांगों को पूरा कर दिया है, जो उन्होंने मांगी थीं।
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दारू-मुर्गा पार्टी के बाद पुलिस के सामने खूनी खेल: बुजुर्ग की हत्या, दरोगा समेत चार पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

कानपुर के चौबेपुर के पनऊपुरवा गांव में सोमवार रात एक परिवार ने पुलिस को घर बुलाकर दारू पार्टी करने के बाद घर के सामने रहने वाले परिवार पर हमला कर दिया। पुलिस की मौजूदगी में ही चापड़, कुल्हाड़ी, लाठी-डंडों और असलहों से लैस होकर दलित के घर में घुसकर खूनी खेल खेला। 58 वर्षीय बुजुर्ग को मौत के घाट उतार दिया। घर पर पथराव किया, जिसमें तीन महिलाओं समेत पांच लोग घायल हो गए। मृतक की पत्नी की हालत गंभीर है। ग्रामीणों के एकजुट होने के बाद आरोपी भाग निकले। वारदात के दौरान मौजूद दो दरोगा और दो सिपाहियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। पनऊपुरवा निवासी रवि शंकर कुरील ने बताया कि वह भाई अमित कुमार के साथ कुछ महीनों से कल्याणपुर में रहकर पुताई का काम कर रहा है। ... और पढ़ें

मनीष हत्याकांड: जेल प्रशासन ने सीबीआई कोर्ट से मांगी गाइडलाइन, जानिए क्या है वजह

मनीष हत्याकांड के आरोपी छह पुलिस वालों को लेकर गोरखपुर जेल प्रशासन ने सीबीआई कोर्ट को पत्र भेजकर गाइडलाइन मांगी है। दरअसल, आरोपियों की ना तो पेशी की तारीख तय है, न ही कोर्ट, लिहाजा जेल प्रशासन ने अब सीबीआई लखनऊ कोर्ट को चिट्ठी लिखी है। जवाब के आधार पर इस मामले में जेल प्रशासन आगे का कदम उठाएगा।

 जानकारी के मुताबिक, कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की 27 सितंबर 2021 की रात में रामगढ़ताल इलाके के कृष्णा पैलेस होटल मौत हो गई थी। आरोप है कि पुलिस की पिटाई से उनकी मौत हुई थी। आधी रात को चेकिंग करने आई पुलिस ने मनीष को काफी ज्यादा पीटा था। इस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर जेएन सिंह के अलावा साथ गए सबइंस्पेक्टर अक्षय मिश्रा, दरोगा विजय यादव और राहुल दुबे, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव तथा कांस्टेबल प्रशांत के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था।

मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने हत्या का केस दर्ज कराने के साथ ही सीबीआई से जांच की मांग की थी। पहले कानपुर की एसआईटी और फिर सीबीआई ने जांच शुरू की और सीबीआई ने बीते सात जनवरी को सभी छह पुलिस वालों पर हत्या सहित अन्य धाराओं में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। सीबीआई ने जब से आरोपपत्र दाखिल किया है, तभी से पुलिस वालों की पेशी को लेकर पेच फंसा हुआ है।

गोरखपुर जेल में बंद पुलिस वालों की गोरखपुर कोर्ट में 10 जनवरी को आखिरी पेशी हुई थी। उसके बाद 13 जनवरी को सीबीआई लखनऊ कोर्ट में पेशी की बात सामने आई थी, लेकिन जेल प्रशासन के पास न तो आरोपियों के ट्रांसफर को लेकर कोई चिट्ठी आई और न ही उनकी वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी ही हो पाई। इस बीच जेल प्रशासन ने गोरखपुर कोर्ट को इस मामले से अवगत कराते हुए गाइडलाइन मांगी थी।

वहां से बताया गया था कि सीबीआई ने अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई कोर्ट अब इस मामले को देख रहा है। उसके बाद जेल प्रशासन ने सीबीआई लखनऊ कोर्ट को चिट्ठी लिखी है और सभी मामलों से अवगत कराते हुए उनसे गाइडलाइन मांगी है। जेल प्रशासन को चिट्ठी के जवाब का इंतजार है। उधर, जेल सूत्रों के मुताबिक इस तरह के संकेत मिल रहे हैं कि आरोपियों को जल्द ही यहां से ट्रांसफर किया जा सकता है। हालांकि, जबतक कोई आदेश नहीं आता है तब तक आधिकारिक तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता है।

 
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मृतक कारोबारी मनीष गुप्ता। मृतक कारोबारी मनीष गुप्ता।

मनीष हत्याकांड: पुलिस ने पहले तड़पा-तड़पा कर मारा फिर बचने के लिए किए ये उपाय, सीसीटीवी की मदद से पहुंच गए सलाखों के पीछे

कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या मामले में गोरखपुर पुलिस की पहले दिन से ही किरकिरी हुई थी। आरोपियों ने अपने बचने के जितने उपाय किए उतनी ही पुलिस की फजीहत बढ़ती गई। हालांकि उनके एक भी पैतरे काम नहीं आए। पहले कानपुर पुलिस की एसआईटी ने और उसके बाद सीबीआई ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा ही दिया।  

घटना वाले दिन पुलिस इस बात को मानने के लिए तैयार ही नहीं थी कि उसके छह मुलाजिमों ने किसी की ऐसी पिटाई की उसकी जान चली गई। पुलिस आला अधिकारी तक इस मामले में कठघरे में आ गए थे। मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी के हंगामा करने के बाद पुलिस ने मामले में हत्या का केस दर्ज किया था। मीनाक्षी के अनुरोध पर ही पहले मामले की जांच कानपुर पुलिस को दी गई। उसके बाद सीबीआई को सौंप दी गई।
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कानपुर: धोखाधड़ी कर 35 लाख डकारे, बैंक अफसरों समेत पांच पर रिपोर्ट दर्ज

कानपुर के नवाबगंज में धोखाधड़ी कर लाखों की प्रॉपर्टी हड़पने के आरोप में पीड़ित ने बैंक के मुख्य प्रबंधक, शाखा प्रबंधक समेत पांच पर षड़यंत्र रच कर धोखाधड़ी करने, खुदकुशी के लिए उकसाने समेत अन्य धाराओं में कोर्ट के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई है।

नेहरु नगर निवासी सनटेक इनर्जी कंपनी के मालिक नवनीत सिंह ने बताया कि मसवानपुर बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अनिल अवस्थी ने कुछ लोगों संग मिलकर उनकी प्रापर्टी पर लोन कराकर 35 लाख रुपये डकार लिए थे।

लोन न चुकाने पर रिकवरी के लिए बैंकअधिकारियों ने उनकी नवाबगंज बाजार में स्थित दुकान भी नीलाम कर दी। मामला कोर्ट में लंबित है। आरोप है कि इसके बावजूद बैंक अधिकारी उनके परिवार को प्रताड़ित कर रहे थे। इससे परेशान होकर पिछले साल फरवरी में पिता अनिल सिंह ने खुदकुशी कर ली थी।

पुलिस को तहरीर देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट ने आरोपियों पर रिपोर्ट दर्ज करने के पुलिस को आदेश दिए थे। इसके बाद भी पुलिस लंबे वक्त से टहला रही थी।

अफसरों से शिकायत के बाद नवाबगंज थाना पुलिस ने कौशलपुरी स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक दीपेंद्र शुक्ला, शाखा प्रबंधक अनिल अवस्थी, उप-प्रबंधक बीआर धीमान, रिकवरी एजेंट सौरभ शर्मा व जेके वर्मा समेत पांच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। थाना प्रभारी आशीष कुमार द्विवेदी ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जा रही है। 
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यूपी: गर्भवती होने के बाद भी लेखपाल करता था किशोरी से दुष्कर्म, पीड़िता ने पुलिस व कोर्ट के बयानों में बताई थी बर्बरता की दास्तां

कानपुर में सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता किशोरी (15) की प्रसव के दौरान मौत के मामले में पुलिस ने बुधवार को आरोपी लेखपाल रंजीत वरबार को जेल भेज दिया। आउटर पुलिस ने ककवन थाना क्षेत्र स्थित गांव जाकर केस की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

जांच में सामने आया कि गर्भवती होने के बाद भी आरोपी किशोरी को हवस का शिकार बनाते थे। साथ ही किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देते थे। ग्रामीणों ने लेखपाल को कई बार नशे में किशोरी की झोपड़ी में जाते देखा था। पीड़िता ने उसपर हो रही ज्यादती की बात अपनी चाची से कही थी।

पीड़िता ने बयानों में कहा था कि आरोपियों ने उससे कई बार दुष्कर्म किया है। किशोरी आठ महीने की गर्भवती थी। जनवरी में उसका प्रसव होना था। चूंकि 11 अक्तूबर को दर्ज एफआईआर में दुष्कर्म कब हुआ यह जानकारी नहीं दी गई थी। न बयानों में एक निश्चित तारीख का पता चला।
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सामूहिक दुष्कर्म मामला: आईजी से लगाई गुहार भी गई थी बेकार, पीड़िता संग होता रहा अत्याचार, बड़ा खुलासा

आरोपी लेखपाल रंजीत
कानपुर में दुष्कर्म पीड़िता किशोरी व उसके परिवार पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था। आरोपी धमकी दे रहे थे। इसकी गुहार पीड़िता के पिता ने आईजी रेंज प्रशांत कुमार से लगाई थी। आईजी के निर्देश के बावजूद आउटर पुलिस लेखपाल पर मेहरबान रही।

आरोपी लेखपाल धमकाता रहा। एक आरोपी को गिरफ्तार कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया था। जब पीड़िता की मौत हुई तो आठ घंटे में ही लेखपाल को पुलिस पकड़ लाई। जैसे उसे आरोपी का ठिकाना मालूम हो। पीड़िता के पिता 29 नवंबर को आईजी दफ्तर पहुंचे थे।

वहां पर प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें लिखा था कि उन्होंने करन, लेखपाल रंजीत व अन्य दो अज्ञात पर बेटी से सामूहिक दुष्कर्म करने का केस दर्ज कराया था। पुलिस ने अब तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की। आरोपी लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं, ताकि वह मुकदमा वापस ले लें।
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कानपुर: जेल से छूटे आरोपी ने महिला को दी जान से मारने की धमकी, पथराव

कानपुर में गोविंदनगर के महादेव नगर में मंगलवार को मुकदमा वापस न लेने पर जेल से छूटे आरोपी ने भाई संग मिलकर महिला को जान से मारने की धमकी दी। विरोध पर घर पर पथराव कर सीसीटीवी कैमरे तोड़ डाले।

मामले में पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मोहिनी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि फरवरी माह में विकास उर्फ मैडी ने साथियों संग मिलकर उनके भाई रिंकू पहाड़ी पर जानलेवा हमला किया था।

मामले में पुलिस ने विकास समेत तीन को जेल भेज दिया था। जबकि विक्रम अभी भी फरार चल रहा है। आरोप है कि मंगलवार को जेल से छ्रूटकर आए विकास उर्फ मैडी ने अपने भाई विवेक, पत्नी रेनू, नरेश, कमलेश व अपने अन्य साथियों की मदद से मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया।

इंकार पर विवेक ने परिजनों संग मिलकर उनके घर पर पथराव कर दिया। इस दौरान घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ जान से मारने की धमकी दी। थानाप्रभारी रोहित तिवारी ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
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गोंडा : घर में घुसकर माता-पिता व दो बेटियों को तलवार से काट डाला, तीन की मौत, एक बेटी की हालत नाजुक

शहर के गल्ला मंडी रोड स्थित एक कॉलोनी में बुधवार की शाम रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी के घर में घुसकर एक युवक ने पूरे परिवार पर तलवार से हमला बोल दिया। युवक ने घर में घुसते ही अंदर से चैनल गेट बंद कर लॉक कर दिया। इसके बाद तलवार से पिता, माता व उनकी दोनों बेटियों को काट डाला। इसमें माता-पिता व एक बेटी की मौत हो गई, जबकि छोटी बेटी को गंभीर हालत में इलाज के लिए लखनऊ भेजा गया है।

नगर कोतवाली क्षेत्र के गल्लामंडी रोड के बगल शिवनगर कॉलोनी में बुधवार की शाम दिल दहलाने वाली घटना हुई। यहां रहने वाले रेलवे के सेवनिवृत्त कर्मचारी देवी प्रसाद (67), देवी प्रसाद की पत्नी पार्वती देवी  (65), देवी प्रसाद की बड़ी बेटी शिंपा  (25) व छोटी बेटी इस्पा  (22) अपने घर में थे। शाम तकरीबन साढ़े छह बजे एक युवक उनके घर पहुंचा और अंदर से चैनल गेट बंद कर लिया। इसके बाद देवी प्रसाद, उनकी पत्नी पार्वती देवी, शिंपा व इस्पा को तलवार से काट डाला। इसमें देवी प्रसाद, उनकी पत्नी पार्वती व शिंपा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि देवी प्रसाद की छोटी बेटी इस्पा गंभीर रूप से घायल हो गई।

देवी प्रसाद की बहू लक्ष्मी ने बताया कि उनकी ननद शिंपा शहर के एक ही निजी अस्पताल में काम करती थी। लक्ष्मी के पति अशोक सुबह लखनऊ गये थे। घटना के वक्त लक्ष्मी घर की दूसरी मंजिल पर थी। आरोपी दूसरी मंजिल पर उन्हें भी मारने के लिए पहुंचा था। मगर उनके शोर मचाने पर वह छत से रस्सी के सहारे कूदकर भाग निकला। लक्ष्मी के मुताबिक मारने वाला युवक कानपुर का रहने वाला है। उसका नाम मनोज है। वह उनकी ननद शिंपा को पिछले दो साल से फोन करके शादी का दबाव बना रहा था। उन्होंने बताया कि शिंपा की शादी अभी तय हुई है। लक्ष्मी के मुताबिक बुधवार की सुबह से ही वह फोन करके शिंपा को मारने की धमकी दे रहा था। डीआईजी उपेंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि प्रेम प्रसंग में एक ही परिवार के चार लोगों पर हमला किया गया है। जिसमें तीन लोगों की मौत हुई है, एक की हालत नाजुक है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगाई गई है।
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हैवानियत की हदें पार: टॉफी दिलाने के बहाने मासूम को घर ले जाकर नाबालिग ने किया दुष्कर्म, बच्ची की हालत बिगड़ी, भर्ती

कानपुर में बिधनू थाना क्षेत्र के एक गांव में 13 वर्षीय किशोर ने साढ़े 3 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक चालक पीड़ित पिता के मुताबिक सोमवार देर शाम पड़ोस में रहने वाले नाबालिग किशोर के परिजन घर से बाहर गए थे।

घर में कोई नही था। जिसके चलते किशोर उसकी साढ़े तीन वर्ष की मासूम बच्ची को टॉफी दिलाने के बहाने अपने घर ले गया। उसके बाद मोबाइल में पोर्न वीडियो देखते देखते बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। हालात बिगड़ने पर आरोपी बच्ची को घर में अकेला छोड़कर भाग गया।

किशोर के पिता के घर आने पर घटना की जानकारी के बाद वह अपने चचेरे भाई के साथ बच्ची को लेकर बिधनू प्राइवेट डाक्टर के पास इलाज के लिए ले गया। डाक्टर के इलाज करने से मना करने पर बच्ची को उसके घर छोड़ दिया।

बच्ची के बाबा द्वारा विरोध करने पर आरोपी के पिता ने उनसे मारपीट की और धमकी देकर चला गया। जिसके बाद बच्ची की मां ने पिता को घटना की जानकारी दी। देर रात घर लौटने पर पिता ने पुलिस को सूचना दी।

आनन-फानन गांव पहुंचकर पुलिस ने गंभीर हालात में बच्ची को बिधनू सीएचसी में भर्ती कराया। जहां से डॉक्टर ने उसे डफरिन रेफर कर दिया। बिधनू थाना प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि पिता की तहरीर पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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मनीष हत्याकांड : सीबीआई ने दर्ज किए मित्रों के बयान, गोरखपुर के होटल में घटी घटना का लिया पूरा विवरण

कानपुर के व्यवसाई की गोरखपुर में पुलिस कर्मियों द्वारा की गई हत्या के मामले में सीबीआई ने बुधवार को मनीष गुप्ता केदोस्तों के बयान दर्ज किए। सीबीआई ने मनीष के दोस्त हरबीर सिंह, प्रदीप सिंह और चंदन सैनी को लखनऊ कार्यालय बुलाया था।
    
गुरुग्राम के रहने वाले मनीष के तीनों दोस्तों से पूरी घटना की जानकारी ली गई। इन सभी के बयान इस पूरे घटना क्रम में काफी अहम हैं। क्योंकि जब पुलिस मनीष के कमरे में दाखिल हुई उस समय हरबीर सिंह, प्रदीप सिंह और चंदन सैनी तीनों ही उसी कमरे में थे। सूत्रों ने बताया कि सीबीआई बृहस्पतिवार को भी इनके बयान दर्ज करेगी। बयान दर्ज करने के बाद तीनों को लेकर गोरखपुर जाएगी और वहां सीन रिक्रिएट किया जाएगा।

बता दें कि 27 सितंबर को गोरखपुर अपने दोस्तों के साथ पहुंचे कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के कृष्णा पैलेस होटल में ठहरे थे। रात लगभग 12 बजे मनीष के कमरे में पहुंची पुलिस ने पहले मनीष के साथ दुर्व्यवहार किया और फिर मनीष की इतनी पिटाई की कि उससे मनीष की मौत हो गई। मनीष की पत्नी ने इस मामले में रामगढ़ताल थाने में छह पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। यह सभी पुलिस कर्मी गिरफ्तार हो चुके हैं। मनीष की पत्नी की मांग पर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने 2 नवंबर को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
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कानपुर: लखनऊ डीसीपी पूर्वी कार्यालय के आठ पुलिसकर्मियों पर डकैती का मुकदमा, वसूले थे 40 लाख

लखनऊ पुलिस कमिश्नरी के डीसीपी पूर्वी लखनऊ की क्राइम ब्रांच में तैनात आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ काकादेव थाने में डकैती समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की है। आरोप है कि एमबीए छात्र, उसके मामा व दोस्तों को उठाकर टॉर्चर किया और छोड़ने के एवज में 40 लाख रुपये वसूले। घर पर डाका डालकर नकदी व जेवरात लूटे।

आखिर में खुद को फंसता देख पुलिसकर्मियों ने साजिश के तहत इन सभी पर लखनऊ के गोमती नगर थाने में जुआं अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी दिखाई। शास्त्री नगर निवासी मयंक एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं। मयंक के मुताबिक 24 जनवरी 2021 को शाम चार बजे अपने दोस्त जमशेद व आकाश गोयल के साथ बदनाम टी स्टॉल पर चाय पी।

जब मयंक व आकाश वहां से घर के लिए चले तो डबल पुलिया के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार (यूपी 32 एलई 2282) व एक बिना नंबर की नीले रंग की टाटा सूमो गोल्ड वहां आकर रुकी। जिसमें डीसीपी पूर्वी लखनऊ की क्राइम ब्रांच के पुलिसकर्मी मौजूद थे। आरोप है कि पुलिसकर्मी मयंक व आकाश गोयल को कार में उठा ले गए। लखनऊ कैंट थाने में मारा पीटा। फिर यहां से हजरतगंज में मयंक के मामा के घर जाकर दुर्गा सिंह को उठा लिया।

फिर कोचिंग संचालक शमशाद को लेकर फिर कैंट थाने आते हैं। टॉर्चर करने के बाद 25 जनवरी के तड़के करीब साढ़े तीन बजे इन सभी को लेकर पुलिसकर्मी मयंक के घर पर दबिश देते हैं। आरोप है यहां से तीस हजार रुपये की नकदी व एक हार का सेट ले जाते हैं। वापस लखनऊ लौट जाते हैं। बाद में मयंक के परिवार वालों से 40 लाख रुपये की मांग करते हैं।

उसी दिन सुबह परमट चौराहे पर पुलिसकर्मी यह रकम लेते हैं। जब इसकी शिकायत तत्कालीन डीआईजी डॉ. प्रीतिंदर सिंह से की जाती है तो इसकी भनक आरोपी पुलिसकर्मियों को लगती है। जिसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी साजिश के तहत दुर्गा सिंह, मयंक सिंह, शमशाद अहमद, मुस्ताक, आकाश गोयल पर गोमती नगर जुआ अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाकर 23 लाख रुपये की रिकवरी दिखाते हैं।
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