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Kanpur News: कॉकस के खेल में फर्जी दिव्यांगता पास

Tue, 25 Aug 2026 02:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 02:48 AM IST
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The sham disability ploy in the caucus game
कानपुर। बैंक पीओ परीक्षा में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से अभ्यर्थी को सहायक (सॉल्वर) मुहैया कराने के खेल में स्वास्थ्य महकमे में कॉकस सक्रिय है। इसमें डॉक्टर, दिव्यांग बोर्ड के सदस्य, कर्मी और तकनीशियनों की मिलीभगत की आशंका है। यह कॉकस फर्जी प्रमाणपत्र तो बनवा ही रहा है। इसके साथ सुविधा शुल्क लेकर दिव्यांगता प्रतिशत भी बढ़ाता है। सचेंडी में एक परीक्षा केंद्र पर परीक्षा में सेंधमारी के खुलासे के बाद इस कॉकस के राज बाहर आने की उम्मीद है। वहीं, सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने प्रकरण की विभागीय जांच की भी बात कही है।
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सीएमओ की ओर से गठित दिव्यांग बोर्ड में हड्डी, नेत्र, नाक-कान-गला, मानसिक रोग सहित सभी तरह के विशेषज्ञ हैं। सूत्रों के अनुसार, फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनवाने वाला कॉकस इनमें से कुछ चिकित्सकों और कर्मियों की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा करता है। इनमें उर्सला और कांशीराम अस्पताल के कुछ तकनीशियन भी शामिल बताए गए हैं। बोर्ड के चिकित्सक आम तौर पर इन्हीं अस्पतालों से दिव्यांगता के लिए बेरा मशीन से बहरेपन की जांच के अलावा नेत्रों, एक्सरे, मानसिक स्थिति आदि की जांच कराते हैं। सूत्रों का कहना है कि फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाला कॉकस इसके 10 हजार से लेकर एक लाख या उससे भी ज्यादा रुपये लेता है।
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सख्त है प्रमाणपत्र बनवाने की प्रकिया, फिर भी...
दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया काफी सख्त है। ऑनलाइन आवेदन करने पर दिव्यांग बोर्ड के सामने उपस्थित होने की तारीख दी जाती है। निर्धारित तारीख पर पहुंचने पर प्रारंभिक परीक्षण के बाद जरूरत के हिसाब से जांचें लिखी जाती हैं। जांचें कराने के बाद बोर्ड फिर दिव्यांगता संबंधी परीक्षण के साथ ही जांच रिपोर्टों का भी आकलन करता है। दिव्यांगता और उसका प्रतिशत तय किया जाता है। इसी आधार पर यूडीआईडी कार्ड बनता है। यह आवेदक के पते पर पहुंचता है। ऑनलाइन भी डाउनलोड किया जा सकता है। दिव्यांग बोर्ड प्रत्येक सोमवार को कांशीराम अस्पताल और प्रत्येक गुरुवार को उर्सला में बैठता है। डीएम की अध्यक्षता में होने वाले तहसील दिवस में भी बोर्ड मौजूद रहता है। बोर्ड हर हफ्ते 80 से 100 दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करता है।
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एसटीएफ ने कहा... सीएमओ दफ्तर के कुछ लोग चिह्नित
एसटीएफ के इंस्पेक्टर ज्ञानेंद्र कुमार राय ने बताया कि फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने के बारे में सीएमओ दफ्तर के लिए कुछ लोगों को चिह्नित किया गया है। उनसे भी पूछताछ की जाएगी।
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मैंने विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। इस तरह का मामला विभाग के लिए ठीक नहीं है। जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, बख्शे नहीं जाएंगे।
- डॉ. हरिदत्त नेमी, सीएमओ

एमपी के सॉल्वर गिरोह से भी सरगना का हो सकता है लिंक
कानपुर/लखनऊ। एसटीएफ ने गिरोह के सरगना मनीष मिश्रा की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है। वह वर्तमान में झांसी के सनफ्रान अशोक सिटी में रह रहा है। एसटीफ सूत्रों के अनुसार सरगना के तार यूपी के अलावा एमपी के सॉल्वर गिरोह से भी जुड़े हो सकते हैं। उसकी तलाश के लिए संतकबीर नगर, लखनऊ, कानपुर व बुंदेलखंड के जिलों में भी दबिश दी जा रही हैं। ब्यूरो
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जूनियर क्लर्क भर्ती में भी किया था फर्जीवाड़ा
गिरोह के सरगना मनीष को इसी साल 25 मार्च को सीबीएसई की ओर से आयोजित जूनियर क्लर्क भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा में पकड़ा गया था। वह जमानत पर छूटा था। मनीष बिहार का राजू गुप्ता नाम का शख्स बेहद करीबी है।

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इन 12 लोगों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी
मनीष कुमार मिश्रा, राजू गुप्ता, राहुल यादव, शमशेर सचान उर्फ शीलू, मनोरंजन, मनोज कुमार यादव, सुरजीत, अनुराधा कनौजिया (रावतपुर, कानपुर), अंकित सचान (बर्रा दो, कानपुर) राहुल सिन्हा (बिहार) आशीष कुमार (बिहार), अवनीश यादव (संजीव नगर, चकेरी) के नाम शामिल हैं।
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