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GST का झांसा देकर ठगी, मोबाइल पर मैसेज भेजकर जुटा लेत थे डिटेल

Sun, 09 Jul 2017 11:49 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 09 Jul 2017 11:49 AM IST
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cheating on the name of GST
डेमो
कानपुर शहर में जीएसटी लागू हुए अभी सात दिन भी नहीं बीते कि साइबर ठगों ने जीएसटी के नाम पर चार लाख की ठगी कर दी। यह शहर का पहला मामला है जिसमें जीएसटी के नाम पर ठगी हुई है। साइबर ठगों ने दवा व्यापारी को फोन कर जीएसटी का हवाला देकर खाते और क्रेडिट कार्ड की जानकारी ले ली। इसके बाद खाते से चार लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए। व्यापारी को मोबाइल पर मैसेज आने पर जानकारी हुई तो उन्होंने खाते को ब्लॉक कराने के साथ ही थाने के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। 
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गोविंदनगर निवासी एचपी लांबा दवा कारोबारी हैं। उनका एसबीआई की पांडुनगर शाखा में खाता है। उनके मोबाइल पर शुक्रवार को 9073028490 नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को बैंक कर्मी बताते हुए उनसे कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद खातों को अपडेट किया जा रहा है। आप खाते और क्रेडिट कार्ड से संबंधित सारी जानकारी दीजिए। वरना आपके खाते को ब्लॉक कर दिया जाएगा। एचपी लांबा ने उस पर विश्वास कर खाते और क्रेडिट कार्ड की सारी जानकारी दे दी।
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इसके बाद ही उनके खाते से 1.53 लाख रुपये और क्रेडिट कार्ड से 2.47 लाख रुपये रुपये ट्रांसफर हो गए। मोबाइल पर मैसेज आने पर लांबा को पता चला तो उन्होंने बैंक जाकर अफसरों को जानकारी दी, लेकिन इससे पहले चार लाख रुपये ट्रांसफर हो चुके थे। उन्होंने खाते को ब्लॉक कराने के साथ ही थाने में तहरीर दी। इंस्पेक्टर ने बताया कि उनकी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मोबाइल नंबर से आरोपी का पता लगाया जा रहा है। 
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बैंक फोन पर नहीं मांगता खाते से संबंधित जानकारी
बैंक से कभी भी फोन कर खाते या एटीएम व क्रेडिट कार्ड से संबंधी जानकारी नहीं मांगी जाती है। इसलिए कभी भी फोन पर इस तरह की जानकारी न दें। अगर बैंक को खाता धारक से कोई जानकारी लेनी होती है तो बैंक से खाता धारक के मोबाइल पर मैसेज भेजा जाता है। जिसमें डोंट रिप्लाई (मैसेज का जवाब न दें) लिखा होता है। मैसेज से खाता धारक को बैंक आकर संबंधित कागजात जमा करने के लिए बोला जाता है। इसलिए फोन पर खाते संबंधी कोई जानकारी न दें। इसके अलावा एटीएम से रुपये निकालते समय भी अलर्ट रहना चाहिए। यह देख लेना चाहिए कि एटीएम बूथ पर पहले से कोई मौजूद तो नहीं है। साथ ही, अपना पासवर्ड न तो किसी को बताएं और न ही मोबाइल पर सेव करें। 

- साइबर ठगों ने दवा व्यापारी को बनाया शिकार 
- मैसेज आने पर कारोबारी को जानकारी मिली 
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