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यहां ‘शोल्डर टू शोल्डर’ मुहिम के तहत शिया के साथ सुन्नी की नमाज
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 02 Sep 2017 12:10 PM IST
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लखनऊ में पिछले दो सालों से ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर शिया और सुन्नी मुसलमान एक साथ नमाज पढ़ रहे हैं। इस बार भी ‘शोल्डर टू शोल्डर’ नाम की मुहिम के तहत शिया आलिम मौलाना कल्बे सादिक के साथ सुन्नी उलेमा नमाज पढ़ेंगे। कानपुर में भी शिया और सुन्नी उलेमा व मुस्लिम एक साथ एक इमाम के पीछे नमाज पढ़ चुके हैं। हालांकि ईद और बकरीद में अभी तक एक साथ नमाज पढ़ने का मौका नहीं आया है।
14 अप्रैल 2012 को फिलिस्तीन की मस्जिद-ए-अक्सा के इमाम मुफ्ती अकरमा सईद अब्दुल्ला सबरी और करीब दस देशों के कारी (अलग अलग अंदाज में कुरान पढ़ने वाले धर्मगुरु) के साथ बेनाझाबर बड़ी ईदगाह में शिया और सुन्नी उलेमा व मुसलमानों ने नमाज पढ़ी थी। विश्व शांति और इस्लाम का संदेश देने के लिए मुस्लिमों के लिए पवित्र मस्जिद मस्जिद-ए-अक्सा के इमाम शहर आए थे। मुफ्ती अकरमा सईद अब्दुल्ला सबरी ने नमाज पढ़ाई थी। इनके पीछे शहर के शिया शहरकाजी मौलाना अली अब्बास खां नजफी और शिया मुसलमानों ने नमाज पढ़ी थी। साथ में शहरकाजी मुफ्ती मंजूर अहमद मजाहिरी, लखनऊ के मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली और ईदगाह के इमाम मरहूम कारी मोहम्मद इलाही ने नमाज पढ़ी थी। इस कार्यक्रम के आयोजक डॉ. महमूद रहमानी थे।
शिया शहरकाजी मौलाना अली अब्बास खां नजफी ने कहा कि नमाज एक साथ पढ़ने में कोई कोताही नहीं है। इसके पहले भी एक साथ नमाज हो चुकी है। कानपुर में हुए दंगों के दौरान जब सभी मसलक के लोग एक साथ निकलकर शांति व्यवस्था की अपील करते थे, तब जिस मस्जिद में जगह मिलती थी नमाज पढ़ते थे। अगर ऐसा कोई आयोजन होगा तो शिया मुसलमानों को कोई आपत्ति नहीं है। यह है कि दोनों तरफ के लोग राजी हों।
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सुन्नी देवबंदी शहरकाजी मौलाना अब्दुल कुद्दूस हादी ने कहा कि कानपुर में शियाओं की तादाद सुन्नियों की तुलना में बहुत कम है। लखनऊ में आबादी लगभग बराबर है। इसलिए आपसी एकता के लिए अगर एक साथ नमाज होती है तो कोई हर्ज नहीं है। अगर दोनों पक्ष राजी हों तो कानपुर में भी शिया सुन्नी एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं।
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14 अप्रैल 2012 को फिलिस्तीन की मस्जिद-ए-अक्सा के इमाम मुफ्ती अकरमा सईद अब्दुल्ला सबरी और करीब दस देशों के कारी (अलग अलग अंदाज में कुरान पढ़ने वाले धर्मगुरु) के साथ बेनाझाबर बड़ी ईदगाह में शिया और सुन्नी उलेमा व मुसलमानों ने नमाज पढ़ी थी। विश्व शांति और इस्लाम का संदेश देने के लिए मुस्लिमों के लिए पवित्र मस्जिद मस्जिद-ए-अक्सा के इमाम शहर आए थे। मुफ्ती अकरमा सईद अब्दुल्ला सबरी ने नमाज पढ़ाई थी। इनके पीछे शहर के शिया शहरकाजी मौलाना अली अब्बास खां नजफी और शिया मुसलमानों ने नमाज पढ़ी थी। साथ में शहरकाजी मुफ्ती मंजूर अहमद मजाहिरी, लखनऊ के मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली और ईदगाह के इमाम मरहूम कारी मोहम्मद इलाही ने नमाज पढ़ी थी। इस कार्यक्रम के आयोजक डॉ. महमूद रहमानी थे।
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शिया शहरकाजी मौलाना अली अब्बास खां नजफी ने कहा कि नमाज एक साथ पढ़ने में कोई कोताही नहीं है। इसके पहले भी एक साथ नमाज हो चुकी है। कानपुर में हुए दंगों के दौरान जब सभी मसलक के लोग एक साथ निकलकर शांति व्यवस्था की अपील करते थे, तब जिस मस्जिद में जगह मिलती थी नमाज पढ़ते थे। अगर ऐसा कोई आयोजन होगा तो शिया मुसलमानों को कोई आपत्ति नहीं है। यह है कि दोनों तरफ के लोग राजी हों।
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सुन्नी देवबंदी शहरकाजी मौलाना अब्दुल कुद्दूस हादी ने कहा कि कानपुर में शियाओं की तादाद सुन्नियों की तुलना में बहुत कम है। लखनऊ में आबादी लगभग बराबर है। इसलिए आपसी एकता के लिए अगर एक साथ नमाज होती है तो कोई हर्ज नहीं है। अगर दोनों पक्ष राजी हों तो कानपुर में भी शिया सुन्नी एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं।