आंखों में धूल झोंकते यंत्र: आज भी खराब है कानपुर की आबोहवा, खराब यंत्रों से मापा जा रहा है एक्यूआई
उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में प्रदूषण के आंकड़े दिल्ली से कम नहीं है। लेकिन प्रदूषण नियंत्रण विभाग खराब मापक यंत्रों से एक्यूआई 100 से 135 के बीच स्थिर बनाए हुए है।
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कानपुर में पिछले छह महीने से वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 से 135 के बीच स्थिर है। मतलब सब ठीक है। असल में ऐसा है नहीं। दरअसल, जिन इलाकों में धूल सबसे ज्यादा उड़ रही है, वहां प्रदूषण मापक यंत्र ही नहीं हैं। प्रदूषण नियंत्रण विभाग साफ सुथरे इलाकों के एक्यूआई के आधार पर पूरे शहर की प्रदूषण की स्थिति अच्छी बताने में जुटा है। एक तरह से शहरियों की आंखों में धूल झोंकने का काम किया जा रहा है।
देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शामिल कानपुर की प्रदूषण की स्थिति में अचानक से आए इस सुधार ने सभी को आश्चर्य में डाल रखा है। इसके पीछे की वजह यह है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने स्मार्ट सिटी के तहत शहर में लगाए गए 50 प्रदूषण मापक मीटर की गणना को अमान्य बता दिया है। इन मीटरों से कई क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति पूर्व में 300 से ऊपर दर्ज की गई है। अब सीपीसीबी की मान्यता वाले तीन प्रदूषण मापक मीटर की ही रीडिंग को मान्य किया जा रहा है।
खेल यह है कि तीनों प्रदूषण मापक मीटर ऐसे स्थान पर लगे हैं, जहां पर पेड़ पौधों के साथ ही सड़कों की स्थिति भी ठीक है। जबकि पनकी, दादानगर औद्योगिक क्षेत्र, रामादेवी, नौबस्ता, भैरोघाट क्षेत्र ऐसे स्थान हैं, जहां पर एक्यूआई की मात्रा काफी रहती है। यहां का प्रदूषण ही नहीं नापा जा रहा है।
मैनुअल मापक की रीडिंग सीपीसीबी नहीं जोड़ता
कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर प्रदूषण की स्थिति ज्यादा खराब है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से रोजना प्रदूषण की स्थिति बताने वाले मापक नहीं लगे हैं। यहां बोर्ड की तरफ से प्रदूषण की स्थिति मैनुअल पता की जाती है। इसकी रिपोर्ट एक महीने बाद आती है। मैनुअल मापक की रीडिंग को सीपीसीबी की रोजाना की रीडिंग में नहीं जोड़ा जाता है। बोर्ड की तरफ से आठ स्थानों पर मैनुअल प्रदूषण मापक लगाए गए हैं। अभी फरवरी तक की ही रिपोर्ट आ पाई है।
मैनुअल प्रदूषण मापक में फरवरी का एक्यूआई
दादानगर- 275, रामादेवी-342, पनकी साइट एक-154, आवास विकास-128, जरीब चौकी-145
जिन तीन इलाकों में सीपीसीबी के प्रदूषण मापक लगे हैं, उनसे में दो स्थानों का एक्यूआई 150 के ऊपर पहुंच गया। बताया जा रहा कि तेज हवाएं चलने की वजह से धूल के कणों में बढ़ोतरी हुई है। पिछले सप्ताह तक यहां का एक्यूआई 100 के आसपास था।
नेहरू नगर : 155
किदवईनगर : 152
कल्याणपुर : 138
बता दें कि 0 से 50 एक्यूआई अच्छा, 51 से 100 तक का संतोषजनक, 101 से 200 सामान्य माना जाता है। इसके बाद खराब, बहुत खराब और खतरनाक श्रेणी शुरू हो जाती है।
आईआईटी की रिपोर्ट में धूल सबसे बड़ी वजह
आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में प्रदूषण की सबसे प्रमुख वजह सड़कों से उड़ने वाली धूल को माना गया है। आईआईटी ने यह रिपोर्ट पिछले साल शासन को भी भेजी थी। आवास विकास, दादानगर, फजलगंज, रामादेवी, नौबस्ता, जाजमऊ, पनकी के अलावा जिन क्षेत्रों में मेट्रो के लिए खुदाई चल रही है, वहां पर बड़ी मात्रा में धूल उड़ रही है, लेकिन यहां की रोजाना की प्रदूषण की स्थिति सामने नहीं आ पाती है।
सीपीसीबी ने स्मार्ट सिटी के तहत लगाए गए सभी प्रदूषण मापक मीटर को अनुपयोगी बताकर मान्यता देने से मना कर दिया है। इसके पीछे तकनीकी वजह बताई जा रही है। शहर में बोर्ड की तरफ से जो मानीटर लगाए गए हैं, वे ही मानक पूरा करते हैं। बोर्ड की तरफ से जल्द ही शहर में दो और मानीटर लगाए जाने की योजना है। - अनिल माथुर, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड