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चुनावी सरगर्मी तेज, सभी की नजर है इस संसदीय सीट पर, चर्चा डिंपल यादव की भी
Tue, 12 Feb 2019 02:42 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 12 Feb 2019 02:42 PM IST
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डेमो पिक
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के गढ़ में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी पार्टियां इलेक्शन मोड पर हैं। मार्च में संभावित चुनावी तिथियों की घोषणा से पहले राजनीतिक दल अपनी तैयारियों को धार देने में जुट गए हैं। सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर अखिलेश या फिर डिंपल का नाम पहले से ही तय माना जा रहा है। हालांकि अखिलेश ने कन्नौज से चुनाव लड़ने की पूर्व में बात कही थी लेकिन बदले राजनीतिक माहौल में अब डिंपल यादव के भी दोबारा यहां से प्रत्याशी के तौर पर उतरने की अंदरखाने में चर्चा है।
डेमो पिक
भाजपा में 15 फरवरी या इसके एक-दो दिन बाद से प्रत्याशी तय करने के लिए आवेदन शुरू हो सकते हैं। दो मार्च तक विभिन्न कार्यक्रम पहले ही तय हो चुके हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ने के बयान के बाद जिले के पार्टी पदाधिकारियों ने भी यहां प्रत्याशी उतारने की मांग तेज कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी अगर प्रत्याशी उतारती है तो उसे दमदारी से चुनाव लड़ाया जाएगा। यूपी के कन्नौज जिले में प्रमुख पार्टियों में चल रही चुनावी हलचल पर एक रिपोर्ट...
अखिलेश यादव
समाजवादी पार्टी का गढ़ रही कन्नौज लोकसभा सीट पर इस बार भी अखिलेश या डिंपल चुनावी समर में उतर सकते हैं। हालांकि पहले अखिलेश ने स्पष्ट कर दिया था कि वह ही कन्नौज सीट से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन बदले चुनावी माहौल के बाद अंदरखाने में चर्चा है कि डिंपल को यहां से फिर से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। हालांकि प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगाने से पहले सपा की नजर भाजपा की रणनीति पर भी है।
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अखिलेश यादव
पिछले दिनों कन्नौज आए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी यह स्वीकारा था कि वह अपनी रणनीति अभी उजागर नहीं करेंगे। भाजपा के पत्ते सामने आने के बाद ही प्रत्याशी तय होगा। समाजवादी विजन कार्यक्रम के जरिए पिछले माह पार्टी ने 15 दिन लगातार जिले भर में कार्यक्रम आयोजित किए थे। इन कार्यक्रमों के जरिए गांव-गांव जाकर बैठकों से लेकर चौपाल तक लगाई गई थीं। पार्टी ने इन कार्यक्रमों के जरिए अपनी चुनावी तैयारियों को भी परखा। इन सबके बीच पार्टी के सामने जिले की कार्यकारिणी की घोषणा करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
दिसंबर 2017 में निकाय चुनाव का रिजल्ट आने के बाद भंग की गई कार्यकारिणी का अभी तक गठन नहीं हो सका है। निवर्तमान जिलाध्यक्ष मुन्ना दरोगा ने बताया कि लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता पूरी तरह तैयार हैं। संगठन पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा और पार्टी को जीत दिलाएगा।