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45 साल पहले: एक सांड की हत्या के बाद 'हत्याओं का सिलसिला', बर्बाद हुए थे कई परिवार
Tue, 12 Feb 2019 06:08 AM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 12 Feb 2019 06:08 AM IST
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सजायाफ्ता की रिहाई पर परिवार में लौटी खुशी
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश का जिला हमीरपुर...वैसे तो आजकल ये जिला खनन घोटाले को लेकर देशभर में खूब चर्चित है, लेकिन आज हम आपको 45 साल पहले के एक किस्से से रूबरू कराने जा रहे हैं। एक सांड की हत्या के बाद दो गुटों में दुश्मनी हुई। इसके बाद हत्याओं का ऐसा सिलसिला शुरू जिससे कई परिवार बर्बाद हो गए। इस मामले में सजायाफ्ता आरोपी को 13 वर्ष बाद सरकार ने सजा माफ कर रिहाई कर दी है। पति की रिहाई के बाद पत्नी प्रेमकली ने जो बातें कही उसे सुनकर पत्थरदिल भी पिघल जाएंगे।
सजायाफ्ता की रिहाई पर परिवार में लौटी खुशी
- फोटो : अमर उजाला
सुमेरपुर थानाक्षेत्र के गांव पत्योरा में करीब 45 साल पहले सांड़ की हत्या के मामले को लेकर दो गुटों के बीच दुश्मनी हो गई। इस जंग में कई परिवार बर्बाद हो गए। जिसका दर्द आज भी उन परिवारों को चुभता है। इस मामले में एक आरोपी का मर्डर हो गया, दूसरे आरोपी ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। जबकि एक आरोपी अभी भी फरार है। 13 साल बाद रिहा हुए आरोपी इंद्रपाल सिंह (65) ने बताया कि चार दशक पहले हुई दुश्मनी आज तक पीछा कर रही है। कहा कि गांवदारी व गुटबाजी के चलते इस हत्याकांड में उसे फंसाया गया।
सजायाफ्ता की रिहाई पर परिवार में लौटी खुशी
- फोटो : अमर उजाला
बताया कि दस्यु रामकरन सिंह से दुश्मनी थी। जिसने साल 1976 में गांव में डकैती डालकर दो लोगों की हत्या की थी। इसके बाद फिर दोबारा कई बदमाशों के साथ धावा बोला था। जिसमें तीन हत्याएं और हुई थीं। इसी का बदला लेने के लिए साल 1980 में जयकरन सिंह पुत्र सुबेदार सिंह की हत्या कर दी गई। जिसमें पांच लोग रणविजय सिंह, अयोध्या सिंह, रामबहादुर सिंह पुत्र लल्लू सिंह व जगत सिंह पुत्र रजवा सिंह एवं इंद्रपाल सिंह पुत्र पृथ्वीनाथ सिंह नामित कराए गए।
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सजायाफ्ता की रिहाई पर परिवार में लौटी खुशी
- फोटो : अमर उजाला
जिला जज ने साल 1981 में केस की सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने केस की सुनवाई कर साल 2005 में सभी अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। जिसमें पुलिस ने चार मई 2006 को उसे व आरोपी जगत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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सजायाफ्ता की रिहाई पर परिवार में लौटी खुशी
- फोटो : अमर उजाला
बताया कि साल 2005 से ही उसे पैरालिसिस (लकवा) की शिकायत थी, पूरा शरीर कांपता था। जिससे शरीर काम नहीं करता था। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने पिछले शनिवार को उसे रिहा कर दिया। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे इंद्रपाल ने सरकार की इस पहल को सराहनीय बताया।