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आईआईटी कानपुर रैगिंग मामलाः सभी 22 आरोपी छात्र सस्पेंड
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 22 Sep 2017 01:25 PM IST
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आईआईटी कानपुर में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग के मामले में सीनेट ने आरोपी सभी 22 छात्रों को अगली सुनवाई तक के लिए सस्पेंड कर दिया है। तब तक आरोपी छात्रों को हॉस्टल से भी बेदखल किया जाएगा। गुरुवार देर रात तक चली बैठक में ये फैसले लिए गए। सस्पेंड किए गए सभी आरोपी छात्र सेकेंड ईयर के स्टूडेंट हैं। अब इन्हें अक्तूबर में किसी एक दिन अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
सुनवाई के बाद मामले की जांच कर रही सीनेट स्टूडेंट्स अफेयर्स कमेटी (सैक) फिर से अपना रिपोर्ट तैयार करेगी। जिसपर दोबारा नवंबर माह में होने वाली सीनेट की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। सीनेट ने स्टूडेंट जिमखाना के प्रेसिडेंट रितुज जुगाड़े को भी उनके पद से हटाने का फैसला सुनाया है। सीनेट ने सैक की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए जुगाड़े पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने और किसी भी समिति में सदस्य बनने पर रोक लगाने का भी आदेश दिया है।
रैगिंग में शामिल पूर्व छात्र निखिल कुरेले को भी कैंपस से बाहर करने का निर्णय लिया गया है। रजिस्ट्रार केके तिवारी ने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि रैगिंग के आरोपी 22 छात्रों को अगली सुनवाई के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। इन्हें दोबारा अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद अगली सीनेट में इसपर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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नहीं दर्ज होगी एफआईआर
सीनेट ने फिलहाल आरोपी छात्रों पर विधिक कार्रवाई न करने का फैसला लिया है। इसको लेकर सीनेट में काफी बहस हुई। कई सीनेटर्स आरोपी छात्रों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे थे तो कई इसके खिलाफ थे। कुछ प्रोफेसरों का तर्क था कि एफआईआर करने से पीड़ित छात्र भी लाइट में आ जाएंगे इससे उन्हें आगे नुकसान होगा इसलिए आरोपियों पर सीनेट ही कड़ी कार्रवाई करे। जिसे बाद में सभी सीनेटर्स ने एक स्वर में मान लिया।
ऐतिहासिक रही सीनेट की 500वीं बैठक
आईआईटी में गुरुवार को हुई सीनेट की बैठक ऐतिहासिक रही। सीनेट की यह 500वीं बैठक थी। इसको लेकर शुरू में डायरेक्टर ने सभी को शुभकामनाएं दीं। बोले, आईआईटी के इतिहास में यह बैठक दर्ज होगी। खास बात है कि आईआईटी सीनेट की यह पहली बैठक है जिसमें पूरे 100 सदस्य मौजूद रहे। इसके पहले जितनी भी बैठकें होती थीं उनमें बमुश्किल पचास सदस्य ही उपस्थिति हो पाते थे।
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सुनवाई के बाद मामले की जांच कर रही सीनेट स्टूडेंट्स अफेयर्स कमेटी (सैक) फिर से अपना रिपोर्ट तैयार करेगी। जिसपर दोबारा नवंबर माह में होने वाली सीनेट की बैठक में निर्णय लिया जाएगा। सीनेट ने स्टूडेंट जिमखाना के प्रेसिडेंट रितुज जुगाड़े को भी उनके पद से हटाने का फैसला सुनाया है। सीनेट ने सैक की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए जुगाड़े पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने और किसी भी समिति में सदस्य बनने पर रोक लगाने का भी आदेश दिया है।
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रैगिंग में शामिल पूर्व छात्र निखिल कुरेले को भी कैंपस से बाहर करने का निर्णय लिया गया है। रजिस्ट्रार केके तिवारी ने इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि रैगिंग के आरोपी 22 छात्रों को अगली सुनवाई के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। इन्हें दोबारा अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद अगली सीनेट में इसपर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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नहीं दर्ज होगी एफआईआर
सीनेट ने फिलहाल आरोपी छात्रों पर विधिक कार्रवाई न करने का फैसला लिया है। इसको लेकर सीनेट में काफी बहस हुई। कई सीनेटर्स आरोपी छात्रों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे थे तो कई इसके खिलाफ थे। कुछ प्रोफेसरों का तर्क था कि एफआईआर करने से पीड़ित छात्र भी लाइट में आ जाएंगे इससे उन्हें आगे नुकसान होगा इसलिए आरोपियों पर सीनेट ही कड़ी कार्रवाई करे। जिसे बाद में सभी सीनेटर्स ने एक स्वर में मान लिया।
ऐतिहासिक रही सीनेट की 500वीं बैठक
आईआईटी में गुरुवार को हुई सीनेट की बैठक ऐतिहासिक रही। सीनेट की यह 500वीं बैठक थी। इसको लेकर शुरू में डायरेक्टर ने सभी को शुभकामनाएं दीं। बोले, आईआईटी के इतिहास में यह बैठक दर्ज होगी। खास बात है कि आईआईटी सीनेट की यह पहली बैठक है जिसमें पूरे 100 सदस्य मौजूद रहे। इसके पहले जितनी भी बैठकें होती थीं उनमें बमुश्किल पचास सदस्य ही उपस्थिति हो पाते थे।
डेमो पिक
ये है मामला
आईआईटी में रैगिंग का मामला 19 व 20 अगस्त की रात का है। आरोप है कि इंस्टीट्यूट के हॉल-2 (स्टूडेंट हॉस्टल) में कई सीनियरों ने जूनियर स्टूडेंटों पर गलत हरकतें करने के लिए दबाव बनाया। मना करने पर उन्हें गालियां दी गईं। कुछ ने पिटाई करने का भी आरोप लगाया है। मामले में पीड़ित जूनियर छात्रों की शिकायत पर डीन स्टूडेंट अफेयर्स और एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच करने के बाद 22 आरोपी छात्रों को चिन्हित किया था।
चिन्हित किए गए छात्रों को टर्मिनेट करने और उनपर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। इसमें एक नाम स्टूडेंट जिमखाना के प्रेसिडेंट रितुज जुगाड़े और दूसरा पूर्व छात्र निखिल कुरेले का भी शामिल था।
खूब हुई बहस... फिर बोले
डायरेक्टर रैगिंग मामले में चर्चा करते हुए जब पूर्व छात्र निखिल कुरेले का नाम आया तो कई सीनेटर्स इसपर कड़ी कार्रवाई करने की मांग करने लगे। सीनेटर्स तत्काल प्रभाव से पूर्व छात्र को कैंपस से बेदखल करने की बात कह रहे थे। सीनेटर्स की बात सुनने के बाद डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने बताया कि यह पूर्व छात्र का मामला है। इसे पूर्व छात्र एसोसिएशन में रखा जाना चाहिए।
हालांकि सीनेटर्स का गुस्सा देखते हुए डायरेक्टर ने कहा कि आप लोग चाहते हैं कि वह कैंपस में न रहे वैसा ही होगा। मैं खुद इसपर फैसला ले लूंगा, लेकिन इस बिंदु को सीनेट के मिनट्स में नहीं रखा जाएगा। ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के लिए बुलाई गई स्पेशल सीनेट आईआईटी कानपुर के इतिहास में पहली बार ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को स्पेशल सीनेट की बैठक बुलाई गई है।
यह बैठक 20 से ज्यादा सीनेटर्स की सिफारिश पर डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कॉल की। इसमें बीते 30 अगस्त को कैंपस में आयोजित ओपन बैठक में पूर्व छात्र और कुछ प्रोफेसरों के साथ हुई अभद्रता के मामले में चर्चा की जाएगी। सिक्योरिटी इश्यू पर चर्चा होगी। प्रोफेसर इसमें कैंपस के अंदर छात्रों, पूर्व छात्रों और प्रोफेसरों को मिलने वाली आजादी का मुद्दा उठाएंगे। गार्डों द्वारा आएदिन किए जाने वाले दुर्व्यवहार का प्वाइंट भी रखा जाएगा।
आईआईटी में रैगिंग का मामला 19 व 20 अगस्त की रात का है। आरोप है कि इंस्टीट्यूट के हॉल-2 (स्टूडेंट हॉस्टल) में कई सीनियरों ने जूनियर स्टूडेंटों पर गलत हरकतें करने के लिए दबाव बनाया। मना करने पर उन्हें गालियां दी गईं। कुछ ने पिटाई करने का भी आरोप लगाया है। मामले में पीड़ित जूनियर छात्रों की शिकायत पर डीन स्टूडेंट अफेयर्स और एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच करने के बाद 22 आरोपी छात्रों को चिन्हित किया था।
चिन्हित किए गए छात्रों को टर्मिनेट करने और उनपर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई थी। इसमें एक नाम स्टूडेंट जिमखाना के प्रेसिडेंट रितुज जुगाड़े और दूसरा पूर्व छात्र निखिल कुरेले का भी शामिल था।
खूब हुई बहस... फिर बोले
डायरेक्टर रैगिंग मामले में चर्चा करते हुए जब पूर्व छात्र निखिल कुरेले का नाम आया तो कई सीनेटर्स इसपर कड़ी कार्रवाई करने की मांग करने लगे। सीनेटर्स तत्काल प्रभाव से पूर्व छात्र को कैंपस से बेदखल करने की बात कह रहे थे। सीनेटर्स की बात सुनने के बाद डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने बताया कि यह पूर्व छात्र का मामला है। इसे पूर्व छात्र एसोसिएशन में रखा जाना चाहिए।
हालांकि सीनेटर्स का गुस्सा देखते हुए डायरेक्टर ने कहा कि आप लोग चाहते हैं कि वह कैंपस में न रहे वैसा ही होगा। मैं खुद इसपर फैसला ले लूंगा, लेकिन इस बिंदु को सीनेट के मिनट्स में नहीं रखा जाएगा। ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के लिए बुलाई गई स्पेशल सीनेट आईआईटी कानपुर के इतिहास में पहली बार ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को स्पेशल सीनेट की बैठक बुलाई गई है।
यह बैठक 20 से ज्यादा सीनेटर्स की सिफारिश पर डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने कॉल की। इसमें बीते 30 अगस्त को कैंपस में आयोजित ओपन बैठक में पूर्व छात्र और कुछ प्रोफेसरों के साथ हुई अभद्रता के मामले में चर्चा की जाएगी। सिक्योरिटी इश्यू पर चर्चा होगी। प्रोफेसर इसमें कैंपस के अंदर छात्रों, पूर्व छात्रों और प्रोफेसरों को मिलने वाली आजादी का मुद्दा उठाएंगे। गार्डों द्वारा आएदिन किए जाने वाले दुर्व्यवहार का प्वाइंट भी रखा जाएगा।