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आधे से ज्यादा छात्रों का वजीफा नामंजूर

Sun, 22 Feb 2015 11:11 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
अमर उजाला कन्नाैैज Updated Sun, 22 Feb 2015 11:11 PM IST
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thousands of the student rejected scholarship
जिले में दशमोत्तर कक्षाओं में अध्यनरत पिछड़ा वर्ग के हजारों छात्रों का डाटा पीएफएमएस पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम ने रिजेक्ट कर दिया है। डाटा रिजेक्ट हो जाने से कक्षा 9 व 10 में पढ़ रहे हजारों छात्रों को इस बार छात्रवृत्ति नहीं मिल सकेगी। उधर निदेशालय भी इस गलती को सुधारने की किसी तरह की मोहलत नहीं प्रदान कर रहा है।
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दशमोत्तर कक्षाओं में पिछड़ा वर्ग के 7393 छात्रों का डाटा आन-लाइन छात्रवृत्ति के लिए फारवर्ड किया गया था। पीएफएमएस पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम के सर्वर पर डाले गए डाटे में महज 2900 छात्रों का डाटा ही मंजूर किया है। जबकि 1309 छात्रों का इनकम सार्टिफिकेट सही न होने से रिजेक्ट कर दिया गया। इसमें बताया गया कि तमाम छात्रों ने आय प्रमाण पत्र हड़बड़ाहट में गलत जगहों से तैयार करा लिए थे।
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जिस कारण वह बेबसाइट पर दिखाई न पड़ने के कारण उन आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया गया। इसके अलावा कुछ छात्रों ने इनकम सार्टिफिकेट सही लगाया, जबकि उसमें नंबर दूसरे का लिख दिया। इसके अलावा 3800 छात्रों के बैंक के पासबुक नंबर सहित अन्य कारणों से रिजेक्ट कर दिया गया।
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बताया गया कि इस संबंध में प्रशासनिक अफसरों ने निदेशालय वार्ता भी की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। पिछड़ा वर्ग अधिकारी राजेश कुमार बघेल ने कहा कि इन छात्रों को किसी तरह की राहत मिलना नामुंकिन दिख रहा है।


सैकड़ों रुपया बर्बाद, मिला कुछ नहीं
छात्रवृत्ति पाने के लिए छात्र दाखिले के बाद से इंतजार करता है। इसके अलावा कागजी कार्रवाई पूरी करने में उसे तहसील सहित अन्य स्थानों के काफी चक्कर भी काटने पड़ते हैं। आन-लाइन फार्म भराए जाने के लिए उससे करीब 50 रुपया व तहसील में आय-जाति प्रमाण पत्र बनवाने में भी सैकड़ों रुपये का खर्चा आता है। इसके बावजूद हजारों छात्र इस बार वजीफा नहीं पा सकेंगे।
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