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इमाम हुसैन की याद में छलके आंसू
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Sun, 25 Oct 2015 12:18 AM IST
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हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 शैदाइयों की कुर्बानी की
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याद में मुहर्रम की 10वीं तारीख पर मातमी धुनों के साथ ताजियों का जुलूस
निकाला गया। गमगीन अकीदतमंद हुसैन की याद में आंसू बहाते हुए निकले। इस
दौरान पुलिस प्रशासन ने विशेष चौकसी बरती।
मोहल्ला बिर्तिया स्थित इमाम चौक से शनिवार दोपहर शुरू हुआ जुलूस ऊंचा, लाहौरी टोला, रजा नगर, सैयदबाड़ा, जेरकिला, अस्पताल रोड, बजरिया, जुलाहापुरी, कस्साबान व सराय होता हुआ देर शाम कर्बला के मैदान पहुंचा, जहां नम आंखों के बीच ताजिए सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए।
सुबह से ही कुरानखानी व गरीबों को खाना खिलाने का सिलसिला शुरू हो गया था। पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था के बीच निकले जुलूस में या हुसैन या हुसैन की सदाएं बुलंद हो रही थीं। जुलूस में शामिल लोगों के इस्तकबाल के लिए जगह-जगह सबील लगाई गई थी। कई जगह घरों, दुकानों की छतों से बिरयानी, मिठाई के पैकेट व बर्तन लुटाए गए।
इससे पहले मोहर्रम की नौवीं तारीख शुक्रवार को घर-घर में हजरत इमाम हुसैन की याद ताजा करने को कुरान की तिलावत व फातिहा ख्वानी का सिलसिला जारी रहा। कई घरों पर लोगों ने अपने बच्चों को कलावा पहनाए और इमाम आली मुकाम को याद किया। इसी सिलसिले में नगर के कई इमामबाड़ों में मन्नत मुराद की मेंहदी चढ़ाई गई।
महिलाएं अपने बच्चों के साथ मेहंदी लेकर इमामबाड़ा पहुंची जहां शमां रोशन कर फातिहा कराई और अपने सहित घरवालों व बच्चों के लिए दुआ मांगी। करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मोहम्मद कामरान व मो. जीलानी खान ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 जानिसारों के साथ तारीखसाज कुर्बानी देकर इस्लामी झंडे को कयामत तक के लिए ऊंचा कर दिया।
कत्ले हुसैन अस्ल में मरगे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद। उधर, नगर में मुहर्रम पर निकलने वाली ताजिए को लेकर पुख्त इंतजाम किए गए थे। सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अस्पताल रोड पर कोतवाली पुलिस बल सहित पीएसी के जवानों को तैनात कर दिया गया था।
रात में मोहल्ला बजरिया में सुरक्षा की दृष्टि से कई घरों की छतों पर पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके साथ ही ताजिए निकलने के दौरान नगर के सौरिख तिराहे, अस्पताल रोड, सौरिख बस स्टैंड, नगरपालिका रोड, पीपल चौराह, विशुनगढ़ आदि कई स्थानों पर बैरियर लगाकर ट्रैफिक रोका गया।
इसके साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाए गए बीडीओ अनिल कुमार और कोतवाल अरविंद मोहन जायसवाल की अगुवाई में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी पुलिस व पीएसी बल ताजियों के साथ-साथ चल रहा था। इसके अलावा खुफिया विभाग के अधिकारी भी पूरे समय सक्रिय रहकर नजर बनाए रहे।
उधर, सौरिख इमामबाड़े से उठे ताजिए सदर बाजार होते हुए राजापुर माइनर के पास कर्बला में देर शाम सुपुर्द ए खाक कर दिए गए। जुलूस में चल रहे अखाड़ों में युवकों ने लाठियों व तलवारों के कारनामे दिखाए। इस दौरान पुलिस बल मुस्तैद रहा। उधर, विशुनगढ़ कस्बे की जामा मस्जिद से शुरू हुआ ताजियों का जुलूस बाजार में होते हुए करबला पहुंचा।
यहां पर ताजिए सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए। इसमें जोत, सरदामई, कैथोली व रामपुर हृदय आदि गांवों के मुसलमानों ने भी हिस्सा लिया। वहीं पट्टी सकरावा के मोहल्ला मोहद्दीनगर, सैयदवाड़ा, पठाना व कुरेशियान से अलग अलग ताजिया निकाले गए। सदर बाजार में सभी ताजिए एकत्र होने के बाद कर्बला पहुंचे, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
मोहल्ला बिर्तिया स्थित इमाम चौक से शनिवार दोपहर शुरू हुआ जुलूस ऊंचा, लाहौरी टोला, रजा नगर, सैयदबाड़ा, जेरकिला, अस्पताल रोड, बजरिया, जुलाहापुरी, कस्साबान व सराय होता हुआ देर शाम कर्बला के मैदान पहुंचा, जहां नम आंखों के बीच ताजिए सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए।
सुबह से ही कुरानखानी व गरीबों को खाना खिलाने का सिलसिला शुरू हो गया था। पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था के बीच निकले जुलूस में या हुसैन या हुसैन की सदाएं बुलंद हो रही थीं। जुलूस में शामिल लोगों के इस्तकबाल के लिए जगह-जगह सबील लगाई गई थी। कई जगह घरों, दुकानों की छतों से बिरयानी, मिठाई के पैकेट व बर्तन लुटाए गए।
इससे पहले मोहर्रम की नौवीं तारीख शुक्रवार को घर-घर में हजरत इमाम हुसैन की याद ताजा करने को कुरान की तिलावत व फातिहा ख्वानी का सिलसिला जारी रहा। कई घरों पर लोगों ने अपने बच्चों को कलावा पहनाए और इमाम आली मुकाम को याद किया। इसी सिलसिले में नगर के कई इमामबाड़ों में मन्नत मुराद की मेंहदी चढ़ाई गई।
महिलाएं अपने बच्चों के साथ मेहंदी लेकर इमामबाड़ा पहुंची जहां शमां रोशन कर फातिहा कराई और अपने सहित घरवालों व बच्चों के लिए दुआ मांगी। करबला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मोहम्मद कामरान व मो. जीलानी खान ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 जानिसारों के साथ तारीखसाज कुर्बानी देकर इस्लामी झंडे को कयामत तक के लिए ऊंचा कर दिया।
कत्ले हुसैन अस्ल में मरगे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद। उधर, नगर में मुहर्रम पर निकलने वाली ताजिए को लेकर पुख्त इंतजाम किए गए थे। सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अस्पताल रोड पर कोतवाली पुलिस बल सहित पीएसी के जवानों को तैनात कर दिया गया था।
रात में मोहल्ला बजरिया में सुरक्षा की दृष्टि से कई घरों की छतों पर पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके साथ ही ताजिए निकलने के दौरान नगर के सौरिख तिराहे, अस्पताल रोड, सौरिख बस स्टैंड, नगरपालिका रोड, पीपल चौराह, विशुनगढ़ आदि कई स्थानों पर बैरियर लगाकर ट्रैफिक रोका गया।
इसके साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाए गए बीडीओ अनिल कुमार और कोतवाल अरविंद मोहन जायसवाल की अगुवाई में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी पुलिस व पीएसी बल ताजियों के साथ-साथ चल रहा था। इसके अलावा खुफिया विभाग के अधिकारी भी पूरे समय सक्रिय रहकर नजर बनाए रहे।
उधर, सौरिख इमामबाड़े से उठे ताजिए सदर बाजार होते हुए राजापुर माइनर के पास कर्बला में देर शाम सुपुर्द ए खाक कर दिए गए। जुलूस में चल रहे अखाड़ों में युवकों ने लाठियों व तलवारों के कारनामे दिखाए। इस दौरान पुलिस बल मुस्तैद रहा। उधर, विशुनगढ़ कस्बे की जामा मस्जिद से शुरू हुआ ताजियों का जुलूस बाजार में होते हुए करबला पहुंचा।
यहां पर ताजिए सुपुर्द-ए-खाक कर दिए गए। इसमें जोत, सरदामई, कैथोली व रामपुर हृदय आदि गांवों के मुसलमानों ने भी हिस्सा लिया। वहीं पट्टी सकरावा के मोहल्ला मोहद्दीनगर, सैयदवाड़ा, पठाना व कुरेशियान से अलग अलग ताजिया निकाले गए। सदर बाजार में सभी ताजिए एकत्र होने के बाद कर्बला पहुंचे, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।