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जर्जर अवस्था में पशु चिकित्सालय का भवन
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गुरसहायगंज। पशु चिकित्सालय का भवन अत्यंत जर्जर हो गया है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी भवन की मरम्मत की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। जिससे यहां काम करने वाले डॉक्टर और अन्य स्टाफ हमेशा दहशत में रहते हैं। वहीं पशुओं के लिए दवा लेने आने वाले लोग भवन के बाहर ही खड़े रहते हैं। जर्जर भवन की हालत इतनी खस्ता है कि वह कभी भी गिरकर ध्वस्त हो सकता है।
कस्बा के मोहल्ला गांधी नगर वर्ष 1985 में नया भवन बनाया गया था। जिसका शिलान्यास तत्कालीन केंद्रीय मंत्री खुर्शीद आलम ने किया था। वर्तमान में इस भवन की हालत काफी खस्ता है। डॉक्टर के बैठने वाले कमरे की छत का प्लास्टर कई बार टूट कर गिर चुका है। तैनात डॉक्टर परितोष श्रीवास्तव और फार्मासिस्ट अजीत यादव ने बताया कि भवन की हालत इतनी जर्जर है कि उस में बैठने से डर लगता है। अस्पताल कि छत का प्लास्टर अक्सर गिरता रहता है जिससे वह लोग दहशत में रहते हैं। इसके अलावा जानवरों के लिए दवा लेने आने वाले लोग डर की वजह से अस्पताल परिसर के अंदर नहीं आते हैं उन्हें बाहर खड़े होकर ही दवा देनी पड़ती है।
कर्मचारियों के लिए बने आवास पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। अस्पताल की सुरक्षा के लिए बनी बाउंड्री की ईंटें अराजक तत्व काफी समय पहले उखाड़ ले गए जिससे अस्पताल परिसर में असामाजिक तत्वों का अक्सर जमावड़ा लगा रहता है। डॉक्टर ने बताया कि जर्जर भवन की मरम्मत तक ना होने से हर वक्त स्टाफ को अपनी जान का खतरा बना रहता है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में लिखित व मौखिक सूचना दी गई लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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कस्बा के मोहल्ला गांधी नगर वर्ष 1985 में नया भवन बनाया गया था। जिसका शिलान्यास तत्कालीन केंद्रीय मंत्री खुर्शीद आलम ने किया था। वर्तमान में इस भवन की हालत काफी खस्ता है। डॉक्टर के बैठने वाले कमरे की छत का प्लास्टर कई बार टूट कर गिर चुका है। तैनात डॉक्टर परितोष श्रीवास्तव और फार्मासिस्ट अजीत यादव ने बताया कि भवन की हालत इतनी जर्जर है कि उस में बैठने से डर लगता है। अस्पताल कि छत का प्लास्टर अक्सर गिरता रहता है जिससे वह लोग दहशत में रहते हैं। इसके अलावा जानवरों के लिए दवा लेने आने वाले लोग डर की वजह से अस्पताल परिसर के अंदर नहीं आते हैं उन्हें बाहर खड़े होकर ही दवा देनी पड़ती है।
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कर्मचारियों के लिए बने आवास पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। अस्पताल की सुरक्षा के लिए बनी बाउंड्री की ईंटें अराजक तत्व काफी समय पहले उखाड़ ले गए जिससे अस्पताल परिसर में असामाजिक तत्वों का अक्सर जमावड़ा लगा रहता है। डॉक्टर ने बताया कि जर्जर भवन की मरम्मत तक ना होने से हर वक्त स्टाफ को अपनी जान का खतरा बना रहता है। कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में लिखित व मौखिक सूचना दी गई लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
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