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Kannauj News: धान की फसल को कीट व रोगों से बचाना जरूरी
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कन्नौज। खरीफ की मुख्य फसल धान लगभग तैयार होने को है। ऐसी अवस्था में फसल को मौसम जनित कीट और रोगों से बचाए रखना बहुत आवश्यक है। ऐसा न करने पर पैदावार प्रभावित हो सकती है। यह बात जिला कृषि रक्षा अधिकारी अविशांक सिंह चौहान ने कही।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि बदलते मौसम के दृष्टिगत प्रमुख कीट भूरा, फुदका आदि हैं, जो धान की पत्तियों व बालियों का रस चूस कर फसल पैदावार में कमी लाता है। इसके प्रकोप से फसल मात्र तीन से चार दिनों में नष्ट हो जाती है। यह कीट परौना अवस्था में भूरे पंख युक्त जबकि शिशु किट भूरे रंग का पंख विहीन होता है। इस कीट की रोकथाम के लिए बिफिनेथरीन, थिओमेथस्डिम दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पत्ती लपेटक कीट, पत्ती के दोनों सिरों को मुड़कर नालीदार संरचना बना देता है। इसके नियंत्रण के लिए कुनोल्पहोस का छिड़काव करें। इसी क्रम में दीमक एवं सुड़ी कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरोपैरीपॉस को सिंचाई के पानी में मिलाकर प्रयोग करें। धान की फसल में खैरा रोग लगने की संभावना रहती हैं। इस रोग में पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, जिस पर बाद में कत्थई रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। इसका कारण जिंक तत्व की कमी है। इसके नियंत्रण के लिए जिंक सल्फेट को यूरिया के साथ पानी में घोलकर छिड़काव करें।
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किसान सलाह लें
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि किसी भी कीट या रोग का प्रकोप होने पर किसान जनपद के प्रत्येक विकासखंड पर तकनीकी अधिकारियों से सलाह ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभाग के निशुल्क व्हाट्सएप नंबर 9452247111 व 94522 57111 पर फसल की फोटो खींचकर अपने नाम व पता लिख करके भेज दें तो उनको घर बैठे ही समस्या का निदान प्राप्त होगा।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि बदलते मौसम के दृष्टिगत प्रमुख कीट भूरा, फुदका आदि हैं, जो धान की पत्तियों व बालियों का रस चूस कर फसल पैदावार में कमी लाता है। इसके प्रकोप से फसल मात्र तीन से चार दिनों में नष्ट हो जाती है। यह कीट परौना अवस्था में भूरे पंख युक्त जबकि शिशु किट भूरे रंग का पंख विहीन होता है। इस कीट की रोकथाम के लिए बिफिनेथरीन, थिओमेथस्डिम दवाओं का इस्तेमाल करना चाहिए।
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उन्होंने बताया कि पत्ती लपेटक कीट, पत्ती के दोनों सिरों को मुड़कर नालीदार संरचना बना देता है। इसके नियंत्रण के लिए कुनोल्पहोस का छिड़काव करें। इसी क्रम में दीमक एवं सुड़ी कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरोपैरीपॉस को सिंचाई के पानी में मिलाकर प्रयोग करें। धान की फसल में खैरा रोग लगने की संभावना रहती हैं। इस रोग में पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, जिस पर बाद में कत्थई रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। इसका कारण जिंक तत्व की कमी है। इसके नियंत्रण के लिए जिंक सल्फेट को यूरिया के साथ पानी में घोलकर छिड़काव करें।
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किसान सलाह लें
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा कि किसी भी कीट या रोग का प्रकोप होने पर किसान जनपद के प्रत्येक विकासखंड पर तकनीकी अधिकारियों से सलाह ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभाग के निशुल्क व्हाट्सएप नंबर 9452247111 व 94522 57111 पर फसल की फोटो खींचकर अपने नाम व पता लिख करके भेज दें तो उनको घर बैठे ही समस्या का निदान प्राप्त होगा।