{"_id":"c3fb75bc4d4358e44108404c5332b486","slug":"hunger-needs-tastes-like-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘भूख जरूरत, स्वाद कामना’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘भूख जरूरत, स्वाद कामना’
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Fri, 09 Oct 2015 12:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीराम कथा महोत्सव के अंतिम दिन राम राज्यभिषेक की
विज्ञापन
जीवंत झांकियों को देखकर भक्त भावविभोर हो उठे। इस दौरान कथा का रसपान
कराते हुए ब्रह्मचारी ने आवश्यकता और कामना में अंतर का वर्णन करते हुए
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के राज्यभिषेक की कथा का संगीतमय वर्णन किया।
गोविंद सत साहित्य समिति, प्रभात फेरी मंडल की ओर से बटेश्वरदयाल महाविद्यालय में आयोजित नौ दिवसीय दुर्लभ सत्संग एवं श्रीराम कथा महोत्सव के अंतिम दिन ऋषिकेश के ब्रह्मचारी बाल संत भोले बाबा ने राम राज्यभिषेक के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने जरूरत और कामना में अंतर बताते हुए कहा कि जरूरत की पूर्ति की जा सकती है, पर कामना की पूर्ति कभी नहीं की जा सकती।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भूख जरूरत है और स्वाद कामना है। राम कहो राधे श्याम कहो मन मेरे और...बहना हो या भाई सब के हाथ कन्हाई भजन प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। उन्होंने पंडाल में उमड़ी भक्तों की भीड़ देखकर कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि भक्तों में भाव की कमी नहीं है।
उन्होंने भगवान से भाई बेटा मित्र, माता, पिता और गुरु का संबंध जोड़ लिया है। कथा के अंत में प्रस्तुत की गई राम दरबार की झांकी में गुरु वशिष्ठ ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का तिलक कर उनका राज्यभिषेक किया। इस दौरान पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोषों से गूंज उठा। महिलाओं ने राम दरबार की झांकी पर पुष्प वर्षा की।
गोविंद सत साहित्य समिति, प्रभात फेरी मंडल की ओर से बटेश्वरदयाल महाविद्यालय में आयोजित नौ दिवसीय दुर्लभ सत्संग एवं श्रीराम कथा महोत्सव के अंतिम दिन ऋषिकेश के ब्रह्मचारी बाल संत भोले बाबा ने राम राज्यभिषेक के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने जरूरत और कामना में अंतर बताते हुए कहा कि जरूरत की पूर्ति की जा सकती है, पर कामना की पूर्ति कभी नहीं की जा सकती।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भूख जरूरत है और स्वाद कामना है। राम कहो राधे श्याम कहो मन मेरे और...बहना हो या भाई सब के हाथ कन्हाई भजन प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। उन्होंने पंडाल में उमड़ी भक्तों की भीड़ देखकर कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि भक्तों में भाव की कमी नहीं है।
उन्होंने भगवान से भाई बेटा मित्र, माता, पिता और गुरु का संबंध जोड़ लिया है। कथा के अंत में प्रस्तुत की गई राम दरबार की झांकी में गुरु वशिष्ठ ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का तिलक कर उनका राज्यभिषेक किया। इस दौरान पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोषों से गूंज उठा। महिलाओं ने राम दरबार की झांकी पर पुष्प वर्षा की।