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Kannauj News: एससी-एसटी एक्ट में पांच भाई दोषमुक्त
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कन्नौज। थाना ठठिया क्षेत्र से जुड़े मामले में कोर्ट ने शनिवार को साक्ष्य के अभाव में पांच सगे भाइयों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करते हुए अपील की अवधि के लिए छह माह तक दो जमानतें दाखिल करने का आदेश दिया है।
थाना ठठिया क्षेत्र की एक महिला ने कोर्ट के आदेश पर पांच भाइयों सतीशचंद्र उर्फ लल्लू, मोहन उर्फ रावेंद्र कुमार, मुरारी उर्फ सर्वेश कुमार, राधू उर्फ राधेश्याम और घनश्याम पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि 14 नवंबर 2018 की शाम पांच बजे वह बाजार से घर लौट रही थीं। तभी पांचों आरोपियों ने उसे रोक लिया। आरोप था कि आरोपियों ने उसके साथ जातिसूचक गालियां देते हुए अश्लील हरकतें की और अभद्रता की।
पीड़िता का यह भी आरोप था कि आरोपी उस पर दीवानी न्यायालय में चल रहे एक पुराने मुकदमे को वापस लेने का दबाव बना रहे थे। उसने मुकदमा वापस लेने से इन्कार किया तो आरोपियों ने उसे धमकाया और भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया।
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कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। गवाहों के बयानों में भी स्पष्टता नहीं थी। विशेष न्यायाधीश एससी,एसटी एक्ट के न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव का लाभ देते हुए सभी पांच आरोपियों को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सभी आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाता है और अपीलीय अवधि के लिए छह माह के लिए दो जमानतें दाखिल करनी होंगी, ताकि यदि वादिनी अपील करती है तो आरोपी न्यायालय में उपस्थित हों।
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थाना ठठिया क्षेत्र की एक महिला ने कोर्ट के आदेश पर पांच भाइयों सतीशचंद्र उर्फ लल्लू, मोहन उर्फ रावेंद्र कुमार, मुरारी उर्फ सर्वेश कुमार, राधू उर्फ राधेश्याम और घनश्याम पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि 14 नवंबर 2018 की शाम पांच बजे वह बाजार से घर लौट रही थीं। तभी पांचों आरोपियों ने उसे रोक लिया। आरोप था कि आरोपियों ने उसके साथ जातिसूचक गालियां देते हुए अश्लील हरकतें की और अभद्रता की।
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पीड़िता का यह भी आरोप था कि आरोपी उस पर दीवानी न्यायालय में चल रहे एक पुराने मुकदमे को वापस लेने का दबाव बना रहे थे। उसने मुकदमा वापस लेने से इन्कार किया तो आरोपियों ने उसे धमकाया और भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी। इस मामले में पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर विवेचना की और आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया।
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कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। गवाहों के बयानों में भी स्पष्टता नहीं थी। विशेष न्यायाधीश एससी,एसटी एक्ट के न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव का लाभ देते हुए सभी पांच आरोपियों को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सभी आरोपियों को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाता है और अपीलीय अवधि के लिए छह माह के लिए दो जमानतें दाखिल करनी होंगी, ताकि यदि वादिनी अपील करती है तो आरोपी न्यायालय में उपस्थित हों।