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Kannauj News: जल संरक्षण के दावों की खुली पोल, 54 में 11 तालाब बने

Wed, 22 Jul 2026 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 11:30 PM IST
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Claims of water conservation exposed: only 11 out of 54 ponds constructed.
कन्नौज। जिले में जल संरक्षण के सरकारी दावों की हकीकत सामने आई है। पिछले वित्तीय वर्ष में 54 नए तालाब बनाने का लक्ष्य था लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण सिर्फ 11 का ही निर्माण हो सका। 43 तालाबों का काम फाइलों में ही सिमट कर रह गया।
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भ्रष्टाचार और अधिकारियों की उदासीनता से 80 फीसदी से अधिक लक्ष्य अधूरा रह गया। भीषण गर्मी और गिरते जलस्तर के बीच ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बने हुए 11 तालाबों की स्थिति भी दयनीय है। कई जगह सिर्फ नाममात्र की खुदाई हुई है, जो पानी रोकने में अक्षम हैं। स्थानीय लोगों में इस नाकामी को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि जब तक उच्चाधिकारियों पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक जल संरक्षण की योजनाएं सफल नहीं हो पाएंगी। चालू वित्तीय वर्ष शुरू होने के बावजूद पिछले वर्ष के अधूरे 43 तालाबों का हिसाब नहीं है।
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जल संरक्षण को बढ़ावा देने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए खेत तालाब योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत जिले में 11 नए खेत तालाबों का निर्माण कराया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को सहेजकर सिंचाई के लिए स्थायी जलस्रोत तैयार करना है। इससे किसानों की भू-जल पर निर्भरता कम होगी।
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किसानों को मिलेगा अनुदान और अतिरिक्त आय
भूमि संरक्षण अधिकारी कौशल किशोर ने बताया कि मानसूनी बारिश का पानी तालाबों में एकत्र किया जाएगा। किसान इस पानी का उपयोग फसलों की सिंचाई के लिए कर सकेंगे। वे मत्स्य पालन और सिंघाड़े की खेती जैसे व्यवसाय से अतिरिक्त मुनाफा भी कमा पाएंगे। चयनित किसानों को लागत पर 50 फीसदी तक का अनुदान सीधे उनके बैंक खातों में दिया जाएगा। इच्छुक किसान पारदर्शी किसान सेवा योजना पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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वर्षा जल संचयन ही भविष्य की सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम
कन्नौज। वर्षा जल संचयन सप्ताह को लेकर बुधवार को जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और वर्षा जल संचयन को प्रभावी ढंग से लागू करने पर चर्चा की गई। सीडीओ राजेंद्र कुमार श्रीवास ने बताया कि 16 से 22 जुलाई तक चले वर्षा जल संचयन सप्ताह में ग्राम पंचायत, विकास खंड और जनपद स्तर पर गोष्ठियों व जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। तीन नदियां होने के बावजूद भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है। विकास खंड छिबरामऊ में वर्ष 2021 में भू-जल स्तर 15.19 मीटर था जो अब 21.06 मीटर हो गया है। हसेरन, कन्नौज, जलालाबाद, तालग्राम और सौरिख में भी गिरावट आई है। उन्होंने संबंधित विभागों को वैज्ञानिक और दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करने के निर्देश दिए। उपनिदेशक कृषि संतोष कुमार ने कहा कि जल संकट से बचने के लिए वर्षा जल संचयन को जनभागीदारी से अपनाना होगा। श्री अन्न जैसी कम पानी की फसलों को बढ़ावा देने से भू-जल दोहन घटेगा। कार्यशाला के अंत में अधिकारियों और कर्मचारियों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई गई।
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