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एक्सप्रेसवे पर अन्ना जानवर बने हादसों का सबब
Updated Fri, 23 Nov 2018 12:17 AM IST
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तिर्वा (कन्नौज)। एक्सप्रेसवे पर हादसों की रोकथाम के लिए लोहे के जाल लगाए गए हैं, जिससे कोई आसानी से इधर से उधर न हो सके। कई जगह ग्रामीणों ने अपना आवागमन बनाने के लिए जाल तोड़ दिए हैं। इससे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मवेशी पहुंच जाते हैं। इन मवेशियों को बचाने के प्रयास में आए दिन हादसे हो रहे हैं।
एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार को देखते हुए सुरक्षा के भी इंतजाम हैं। दोनों तरफ बडे़-बड़े एंगल लगाए गए हैं। इसके साथ ही कोई आसानी से एक साइड से दूसरी साइड न पहुंच पाए, इसके लिए बीच डिवाइडर पर जाल लगाकर सुरक्षा की गई है। किनारे बसे गांवों से कोई भी जानवर या ग्रामीण वे पर न चढ़ पाए, इसके लिए लोहे के जाल व तार लगाकर सीमांकन किया गया है पर जालियां आसपास के ग्रामीणों ने तोड़ दीं और एक्सप्रेसवे पर चढ़ना शुरू कर दिया।
जाल टूट जाने से जानवर भी घूमने लगे। ये अन्ना जानवर तेज रफ्तार मे चल रहे वाहनों के लिए परेशानी का सबब बनने लगे हैं। कई बार इनके सामने आ जाने से वाहनसवार लोग हादसे का शिकार हो चुके है। इसके बाद भी यूपिडा (उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट अथारिटी) और प्रशासन मौन बना हुआ है।
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-एक्सप्रेसवे पर अन्ना जानवर बने हादसों का सबब
-जगह-जगह पर टूटे लोहे के जाल, जिम्मेदार मौन, हादसों का दौर जारी
अमर उजाला ब्यूरो
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एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार को देखते हुए सुरक्षा के भी इंतजाम हैं। दोनों तरफ बडे़-बड़े एंगल लगाए गए हैं। इसके साथ ही कोई आसानी से एक साइड से दूसरी साइड न पहुंच पाए, इसके लिए बीच डिवाइडर पर जाल लगाकर सुरक्षा की गई है। किनारे बसे गांवों से कोई भी जानवर या ग्रामीण वे पर न चढ़ पाए, इसके लिए लोहे के जाल व तार लगाकर सीमांकन किया गया है पर जालियां आसपास के ग्रामीणों ने तोड़ दीं और एक्सप्रेसवे पर चढ़ना शुरू कर दिया।
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जाल टूट जाने से जानवर भी घूमने लगे। ये अन्ना जानवर तेज रफ्तार मे चल रहे वाहनों के लिए परेशानी का सबब बनने लगे हैं। कई बार इनके सामने आ जाने से वाहनसवार लोग हादसे का शिकार हो चुके है। इसके बाद भी यूपिडा (उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट अथारिटी) और प्रशासन मौन बना हुआ है।
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-जगह-जगह पर टूटे लोहे के जाल, जिम्मेदार मौन, हादसों का दौर जारी
अमर उजाला ब्यूरो