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मानसिक रोग का शिकार हो रहे युवा

Tue, 11 Oct 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 11 Oct 2016 12:00 AM IST
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 Young victim of mental illness
mental news jhansi - फोटो : demo
पहले पढ़ाई की और उसके बाद नौकरी की टेंशन, युवा पीढ़ी को तेजी से मानसिक रोगों का शिकार बना रही है। शुरुआत में ही ध्यान दिए जाने पर इससे निजात पाना आसान होता है, वरना मानसिक बीमारी लाइलाज हो जाती है। 
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मन उदास रहना, चिड़चिड़ापन रहना, नींद न आना, बेवजह मन में तमाम शंकाओं का बना रहना मानसिक रोग के लक्षण हैं। इसका शिकार युवा पीढ़ी तेजी से हो रही है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के मनो रोग विभाग के हेड डा. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि मानसिक रोग का शुरू में ही इलाज होने पर रोगी का ठीक होना संभव है। लापरवाही बरतने पर बीमारी लाइलाज हो जाती है। उन्होंने बताया कि बढ़ती बेरोजगारी और अनियमित होती दिनचर्या से युवा तनाव का शिकार हो रहे हैं। यहां तक कि वह आत्महत्या जैसे कदम भी उठा लेते हैं। उन्होंने बताया कि इसका कारण दिमाग में मौजूद न्यूरोट्रांसमिट है, जिससे संवेदनाओं का आदान - प्रदान होता है। इसके असंतुलित होने पर लोग मानसिक रोग का शिकार हो जाते हैं। देखने में आया है कि छोटे बच्चों में एकाकीपन की वजह से न्यूरोट्रांसमिट असंतुलित हो जाते हैं, जिससे वह भी मनोरोग की चपेट में आ जाते हैं।  
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यह हैं लक्षण 
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- मन उदास रहना 
- नींद न आना
- बेवजह शक करना
- अपने आप में खोए रहना
- स्वयं से बातें करना
- एक ही काम को कई बार करना
- ऊंचाई, पानी व अन्य बात से डर लगना 
- बात - बात पर चिड़चिड़ाना 

यह हैं कारण  
- बेरोजगारी, तनाव, अकेलापन, आर्थिक पक्ष कमजोर, अधिक महत्वाकांक्षा, अभिभावकों द्वारा बच्चों में तुलना करना, नशे की लत।

उपचार
- मनोचिकित्सक से सलाह लें 
- काउंसलिंग और साइकोथैरेपी कराएं
- दिनचर्या व्यस्त रखें
- योग और कसरत करते रहें
- घर के अन्य सदस्य मरीज की भावनाओं और समस्याओं को समझें 
- पॉजिटिव सपोर्ट सिस्टम तैयार करें


सकारात्मक सोच से मजबूत होता है मन 
झांसी। सोमवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में गोष्ठी हुई। अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डा. विनोद कुमार यादव ने कहा कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 1992 से प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। वर्तमान भागदौड़ की जीवन शैली में भावनात्मक सहारा, व्यक्तिगत रुचि और हॉबी को पूरा कर क्रियाशील जीवन और सकारात्मक सोच से व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत बन सकता है। मनोचिकित्सक की सलाह से इस बीमारी से आसानी छुटकारा पाया जा सकता है। इस मौके पर जिला अस्पताल के सीएमएस डा. रमेश चंद्रा, डा. नीति शास्त्री, डा. डी एस गुप्ता, डा. एन के जैन मौजूद रहे। आभार आर एस वर्मा ने जताया।
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