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गेहूं की बुवाई का रकबा घटा, दलहन और तिलहन का बढ़ा
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झांसी। इस रबी सीजन में जिले में गेहूं की बुवाई का रकबा घट गया है, जबकि दलहन और तिलहन का बढ़ गया है। माना जा रहा है कि पानी की कमी की वजह से किसानों का रुख बदल गया है। गेहूं की अपेक्षा दलहन और तिलहन में पानी की कम खपत होती है।
इस साल रबी सीजन मेें गेहूं की बुवाई का 1,49,691 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन, अब तक बुवाई 86,450 हेक्टेयर में ही हुई है। जबकि, पिछले साल लक्ष्य 1,83,917 के सापेक्ष 1,91,630 हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था। वहीं, तिलहन की बुवाई का रकबा बढ़ा दिया गया है। राई, तोरिया और अलसी की 12,238 हेक्टेअर के सापेक्ष 14,340 हेक्टेयर में बुवाई की गई है। जबकि, पिछले साल 15,445 हेक्टेअर में तिलहन की बुवाई हुई थी।
इस बार दलहन चना, मटर और मसूर की बुवाई का 1,80,089 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, इसके सापेक्ष अब तक 2,05,085 हेक्टेयर में बुवाई की जा चुकी है। जबकि, पिछले साल 1,46,550 हेक्टेयर में दलहन की बुवाई हुई थी। माना जा रहा है कि पानी की कमी की वजह से किसानों की रुचि कम पानी की फसलों में है। गेहूं के मुकाबले दलहन और तिलहन में कम पानी खर्च होता है, जिससे किसानों ने गेहूं की बुवाई को तरजीह दी है।
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इस साल रबी सीजन मेें गेहूं की बुवाई का 1,49,691 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन, अब तक बुवाई 86,450 हेक्टेयर में ही हुई है। जबकि, पिछले साल लक्ष्य 1,83,917 के सापेक्ष 1,91,630 हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था। वहीं, तिलहन की बुवाई का रकबा बढ़ा दिया गया है। राई, तोरिया और अलसी की 12,238 हेक्टेअर के सापेक्ष 14,340 हेक्टेयर में बुवाई की गई है। जबकि, पिछले साल 15,445 हेक्टेअर में तिलहन की बुवाई हुई थी।
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इस बार दलहन चना, मटर और मसूर की बुवाई का 1,80,089 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, इसके सापेक्ष अब तक 2,05,085 हेक्टेयर में बुवाई की जा चुकी है। जबकि, पिछले साल 1,46,550 हेक्टेयर में दलहन की बुवाई हुई थी। माना जा रहा है कि पानी की कमी की वजह से किसानों की रुचि कम पानी की फसलों में है। गेहूं के मुकाबले दलहन और तिलहन में कम पानी खर्च होता है, जिससे किसानों ने गेहूं की बुवाई को तरजीह दी है।
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