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वाणिज्य कर अफसर ही लीक कर रहे सूचनाएं!
झांसी / ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2015 12:46 AM IST
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झांसी के कई नामचीन ट्रांसपोर्टर दिल्ली से टैक्स चोरी का माल मंगाते हैं। ट्रक के उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करते ही माल को बहती के आधार पर एमपी से एमपी जाते दिखाया जाता है। जबकि, ट्रक में लोड माल को मौका मिलते ही झांसी में उतार लिया जाता है। इससे व्यापारियों के करोड़ों के वारे न्यारे हो रहे हैं। इस बात का उदाहरण शनिवार को देखने को मिला। शनिवार को तड़के 5.30 बजे शिवाजी नगर निवासी एक शिकायतकर्ता ने लखनऊ कंट्रोल को सूचना दी कि मिनर्वा चौराहे पर परचून से भरा एक ट्रक उतरने के लिए तैयार खड़ा है। कंट्रोल ने सूचना झांसी के अफसरों को दी।
सूचना पर अफसर मौके पर पहुंचे, इसके पहले ही सूचना लीक हो गई। मिनर्वा पर खड़ा ट्रक अचानक इलाइट चौराहे से होकर ग्वालियर रोड की तरफ बढ़ गया। यह सब शिकायतकर्ता देख रहा था और उसने तुरंत इस बात की जानकारी मुख्यालय कंट्रोल, जिलाधिकारी व नगर मजिस्ट्रेट को एसएमएस के माध्यम से दी। हालांकि, नगर मजिस्ट्रेट ने पलटकर एसएमएस के जरिये बताया कि वह लखनऊ में हैं मगर इसके बाद किसी अन्य दूसरे उच्च अफसर के निर्देश पर एक सचल दल अधिकारी को मौके पर भेजा गया। मामला फैलता देख सचल दल अधिकारी ने आखिर ट्रक को ग्रासलैंड पर पकड़ ही लिया।
वहीं, ट्रक को पकड़ने वाले सचल दल अधिकारी राजेश मौर्या ने बताया कि वाहन की ग्वालियर से छतरपुर के लिए बहती बनी हुई है। रविवार को ट्रक में भरे माल का भौतिक सत्यापन होगा। इसके बाद ही पता लग सकेगा कि कितना माल बिना प्रपत्रों के ले जाया जा रहा था?
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ग्यारह अप्रैल को भी पकड़ा गया था यह ट्रक
ग्यारह अप्रैल की दोपहर वाणिज्य कर मुख्यालय ने झांसी के अफसरों को सूचना दी थी कि कानपुर से परचून भरकर आया एक ट्रक बाहर बड़ागांव गेट स्थित एक ट्रांसपोर्ट पर उतरने वाला है। सूचना पर नगर मजिस्ट्रेट आर पी मिश्रा के नेतृत्व में सचल दल अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान ट्रांसपोर्ट के निकट ही खड़े संबंधित नंबर के ट्रक को अधिकारियों ने बरामद कर लिया। वह ट्रक भी इसी नंबर का था। प्रारंभिक जांच में ट्रक के अंदर कुछ बिल बिल्टियां पायी गई थीं, मगर ट्रक में रखे माल के हिसाब से प्रपत्र बहुत कम नजर आ रहे थे। ट्रक में पंद्रह लाख से अधिक का माल था। मगर भौतिक सत्यापन के उपरांत दो लाख के करीब ही टैक्स चोरी का माल दिखाया गया और मात्र 55 हजार रुपये जमा करा कर ट्रक छोड़ दिया गया था।
शिकायतकर्ता को मिल रही धमकियां
शनिवार को शिकायत कर्ता दिन भर मुख्यालय व जिला प्रशासन के अधिकारियों के संपर्क में बना रहा। देर शाम शिकायत कर्ता का नाम खुलकर सामने आने पर उन्हें धमकियां मिलना शुरू हो गईं।
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सूचना पर अफसर मौके पर पहुंचे, इसके पहले ही सूचना लीक हो गई। मिनर्वा पर खड़ा ट्रक अचानक इलाइट चौराहे से होकर ग्वालियर रोड की तरफ बढ़ गया। यह सब शिकायतकर्ता देख रहा था और उसने तुरंत इस बात की जानकारी मुख्यालय कंट्रोल, जिलाधिकारी व नगर मजिस्ट्रेट को एसएमएस के माध्यम से दी। हालांकि, नगर मजिस्ट्रेट ने पलटकर एसएमएस के जरिये बताया कि वह लखनऊ में हैं मगर इसके बाद किसी अन्य दूसरे उच्च अफसर के निर्देश पर एक सचल दल अधिकारी को मौके पर भेजा गया। मामला फैलता देख सचल दल अधिकारी ने आखिर ट्रक को ग्रासलैंड पर पकड़ ही लिया।
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वहीं, ट्रक को पकड़ने वाले सचल दल अधिकारी राजेश मौर्या ने बताया कि वाहन की ग्वालियर से छतरपुर के लिए बहती बनी हुई है। रविवार को ट्रक में भरे माल का भौतिक सत्यापन होगा। इसके बाद ही पता लग सकेगा कि कितना माल बिना प्रपत्रों के ले जाया जा रहा था?
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ग्यारह अप्रैल को भी पकड़ा गया था यह ट्रक
ग्यारह अप्रैल की दोपहर वाणिज्य कर मुख्यालय ने झांसी के अफसरों को सूचना दी थी कि कानपुर से परचून भरकर आया एक ट्रक बाहर बड़ागांव गेट स्थित एक ट्रांसपोर्ट पर उतरने वाला है। सूचना पर नगर मजिस्ट्रेट आर पी मिश्रा के नेतृत्व में सचल दल अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। इस दौरान ट्रांसपोर्ट के निकट ही खड़े संबंधित नंबर के ट्रक को अधिकारियों ने बरामद कर लिया। वह ट्रक भी इसी नंबर का था। प्रारंभिक जांच में ट्रक के अंदर कुछ बिल बिल्टियां पायी गई थीं, मगर ट्रक में रखे माल के हिसाब से प्रपत्र बहुत कम नजर आ रहे थे। ट्रक में पंद्रह लाख से अधिक का माल था। मगर भौतिक सत्यापन के उपरांत दो लाख के करीब ही टैक्स चोरी का माल दिखाया गया और मात्र 55 हजार रुपये जमा करा कर ट्रक छोड़ दिया गया था।
शिकायतकर्ता को मिल रही धमकियां
शनिवार को शिकायत कर्ता दिन भर मुख्यालय व जिला प्रशासन के अधिकारियों के संपर्क में बना रहा। देर शाम शिकायत कर्ता का नाम खुलकर सामने आने पर उन्हें धमकियां मिलना शुरू हो गईं।