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अंतिम वर्ष को छोड़ बाकी छात्र अगली कक्षा में प्रमोट
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में शुक्रवार को कई अहम फैसले लिए गए हैं। अंतिम वर्ष को छोड़ बाकी सभी छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया है। उन्हें नंबर देने का भी एक फॉर्मूला तैयार किया गया है। इसके अलावा फीस बढ़ोतरी के प्रतिशत में भी कमी की गई है।
कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की बैठक में प्रवेश और परीक्षा समिति की बैठकों का अनुमोदन किया गया। इसके अलावा कई बिंदुओं पर चर्चा करने के बाद अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई। शासनादेश पर अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर को छोड़कर बाकी सभी विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया है। प्रमोट किए गए छात्रों की मार्कशीट में भी प्रमोट के बजाए पास लिखा जाएगा। इन्हें नंबर देने का भी एक फॉर्मूला तैयार किया गया है। इसके तहत द्वितीय वर्ष के छात्रों को तृतीय वर्ष में प्रमोट करने पर प्रथम वर्ष में असेसमेंट और लिखित परीक्षा के नंबरों का औसत निकाला जाएगा। उसके अनुसार ही नंबर दिया जाएगा। वहीं, जो परीक्षार्थी प्रथम से द्वितीय वर्ष में प्रमोट हो रहे हैं, उन्हें आगामी परीक्षा में मिलने वाले नंबरों के हिसाब से प्रथम वर्ष में अंक दिए जाएंगे। वहीं, जिनकी प्रीवियस जिनके बैक पेपर इस साल नहीं हो सके हैं, वो अगले साल परीक्षा के साथ यह भी दे सकेंगे। इसके अलावा स्नातक में सामान्य हिंदी, अंग्रेजी, उर्द, सामान्य संस्कृत के ऑब्सनशल कोर्सों को खत्म कर दिया गया है। तीन वर्ष में इन्हें एक बार पास करना होता है। यदि छात्र फेल हो जाते थे, तो रिजल्ट रुक जाता था। अगले वर्ष से स्नातक पाठ्यक्रमों में ये नहीं पढ़ाए जाएंगे। हालांकि, एनवायरमेंट और ह्यूमन राइट्स कोर्स चलता रहेगा। इसके अलावा जिन कोर्सों में 50 प्रतिशत से ज्यादा फीस वृद्धि की गई थी, उनमें कटौती करने का फैसला लिया गया है। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए भी कुलपति ने राहत देने वाला फैसला लिया है। उन्हें दो किस्तों में फीस जमा करने की सहूलियत दी जाएगी। हालांकि, पहले जांच कर यह पुख्ता कर लिया जाएगा कि छात्रा वाकई में जरूरतमंद है अथवा नहीं। वहीं, एनबीए प्रमाणपत्र के लिए आईईटी विभाग में नए पदों के सृजन की मांग पर विचार नहीं किया गया। कहा गया कि एसएफएस योजना अंतर्गत वैसे ही आय से अधिक पैसा खर्च हो रहा है। वहीं, यह मामला विद्या परिषद के जरिए कार्य परिषद में आता है तो सीधे कैसे विचार किया जा सकता है।
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कुलपति प्रो. जेवी वैशम्पायन की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की बैठक में प्रवेश और परीक्षा समिति की बैठकों का अनुमोदन किया गया। इसके अलावा कई बिंदुओं पर चर्चा करने के बाद अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई। शासनादेश पर अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर को छोड़कर बाकी सभी विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया गया है। प्रमोट किए गए छात्रों की मार्कशीट में भी प्रमोट के बजाए पास लिखा जाएगा। इन्हें नंबर देने का भी एक फॉर्मूला तैयार किया गया है। इसके तहत द्वितीय वर्ष के छात्रों को तृतीय वर्ष में प्रमोट करने पर प्रथम वर्ष में असेसमेंट और लिखित परीक्षा के नंबरों का औसत निकाला जाएगा। उसके अनुसार ही नंबर दिया जाएगा। वहीं, जो परीक्षार्थी प्रथम से द्वितीय वर्ष में प्रमोट हो रहे हैं, उन्हें आगामी परीक्षा में मिलने वाले नंबरों के हिसाब से प्रथम वर्ष में अंक दिए जाएंगे। वहीं, जिनकी प्रीवियस जिनके बैक पेपर इस साल नहीं हो सके हैं, वो अगले साल परीक्षा के साथ यह भी दे सकेंगे। इसके अलावा स्नातक में सामान्य हिंदी, अंग्रेजी, उर्द, सामान्य संस्कृत के ऑब्सनशल कोर्सों को खत्म कर दिया गया है। तीन वर्ष में इन्हें एक बार पास करना होता है। यदि छात्र फेल हो जाते थे, तो रिजल्ट रुक जाता था। अगले वर्ष से स्नातक पाठ्यक्रमों में ये नहीं पढ़ाए जाएंगे। हालांकि, एनवायरमेंट और ह्यूमन राइट्स कोर्स चलता रहेगा। इसके अलावा जिन कोर्सों में 50 प्रतिशत से ज्यादा फीस वृद्धि की गई थी, उनमें कटौती करने का फैसला लिया गया है। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए भी कुलपति ने राहत देने वाला फैसला लिया है। उन्हें दो किस्तों में फीस जमा करने की सहूलियत दी जाएगी। हालांकि, पहले जांच कर यह पुख्ता कर लिया जाएगा कि छात्रा वाकई में जरूरतमंद है अथवा नहीं। वहीं, एनबीए प्रमाणपत्र के लिए आईईटी विभाग में नए पदों के सृजन की मांग पर विचार नहीं किया गया। कहा गया कि एसएफएस योजना अंतर्गत वैसे ही आय से अधिक पैसा खर्च हो रहा है। वहीं, यह मामला विद्या परिषद के जरिए कार्य परिषद में आता है तो सीधे कैसे विचार किया जा सकता है।
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