{"_id":"58e53fc84f1c1bf8335b4591","slug":"sewerage-treatment-plant-approved-in-cantonment-area","type":"story","status":"publish","title_hn":"छावनी क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को मंजूरी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छावनी क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Apr 2017 12:34 AM IST
विज्ञापन
सीवरेज ट्रीटमेंट
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी छावनी क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना होगी। केंद्र सरकार ने पच्चीस करोड़ की इस परियोजना को मंजूरी दे दी है। 2.8 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी भी कर दी गई है। प्लांट भगवंतपुरा के स्थापित होगा। छावनी परिषद की जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू करने की तैयारी है।
झांसी छावनी क्षेत्र में सात वार्ड हैं। इनमें सदर बाजार क्षेत्र के कई मुहल्ले, तोपखाना क्षेत्र व लाल कुर्ती सिविल क्षेत्र हैं, जिनकी आबादी लगभग पंद्रह हजार है। इन क्षेत्रों के लिए तीन साल पहले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना बनाई गई थी, जिसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया था। सरकार ने अब इस योजना को हरी झंडी दिखा दी है। पच्चीस करोड़ की इस योजना के लिए बतौर पहली किस्त 2.8 करोड़ रुपये की जारी भी कर दी गई है। इस योजना के तहत लोगों के घरों से निकलने वाली गंदगी पाइप लाइन के जरिये सीधे ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाई जाएगी। प्लांट में इसका ट्रीटमेंट कर पानी और सालिड वेस्ट अलग - अलग किया जाएगा। पानी खेतों के सिंचाई में उपयोग किया जाएगा, जबकि सॉलिड वेस्ट का उपयोग खाद के रूप में होगा। प्लांट की स्थापना भगवंतपुरा के पास छावनी क्षेत्र की भूमि पर की जाएगी, जिसकी रोजाना की क्षमता तीस लाख लीटर की होगी। काम पूरा होने में तीन साल लगेंगे।
पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की मंजूरी 28 मार्च को दी गई और 31 मार्च को पहली किस्त भी जारी कर दी गई। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इसका लाभ छावनी क्षेत्र के सिविल एरिया में रहने वाले लोगों को मिलेगा।
विज्ञापन
- डा. रोहित सिंह मालन, सीईओ - कैंट बोर्ड, झांसी
सभी निकायों में जरूरी है सीवरेज
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रभारी क्षेत्रीय अधिकारी निरंजन शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2016 को सभी नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना के निर्देश दिए थे, ताकि गंदगी को नदियों में जाने से रोका जा सके। न्यायालय के निर्देश थे कि ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध होने वाले पानी और सॉलिड वेस्ट को खेती के लिए इस्तेमाल किया जाए।
विज्ञापन
झांसी छावनी क्षेत्र में सात वार्ड हैं। इनमें सदर बाजार क्षेत्र के कई मुहल्ले, तोपखाना क्षेत्र व लाल कुर्ती सिविल क्षेत्र हैं, जिनकी आबादी लगभग पंद्रह हजार है। इन क्षेत्रों के लिए तीन साल पहले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना बनाई गई थी, जिसे मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया था। सरकार ने अब इस योजना को हरी झंडी दिखा दी है। पच्चीस करोड़ की इस योजना के लिए बतौर पहली किस्त 2.8 करोड़ रुपये की जारी भी कर दी गई है। इस योजना के तहत लोगों के घरों से निकलने वाली गंदगी पाइप लाइन के जरिये सीधे ट्रीटमेंट प्लांट में ले जाई जाएगी। प्लांट में इसका ट्रीटमेंट कर पानी और सालिड वेस्ट अलग - अलग किया जाएगा। पानी खेतों के सिंचाई में उपयोग किया जाएगा, जबकि सॉलिड वेस्ट का उपयोग खाद के रूप में होगा। प्लांट की स्थापना भगवंतपुरा के पास छावनी क्षेत्र की भूमि पर की जाएगी, जिसकी रोजाना की क्षमता तीस लाख लीटर की होगी। काम पूरा होने में तीन साल लगेंगे।
विज्ञापन
पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की मंजूरी 28 मार्च को दी गई और 31 मार्च को पहली किस्त भी जारी कर दी गई। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित होगी। इसका लाभ छावनी क्षेत्र के सिविल एरिया में रहने वाले लोगों को मिलेगा।
विज्ञापन
- डा. रोहित सिंह मालन, सीईओ - कैंट बोर्ड, झांसी
सभी निकायों में जरूरी है सीवरेज
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रभारी क्षेत्रीय अधिकारी निरंजन शर्मा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2016 को सभी नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना के निर्देश दिए थे, ताकि गंदगी को नदियों में जाने से रोका जा सके। न्यायालय के निर्देश थे कि ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध होने वाले पानी और सॉलिड वेस्ट को खेती के लिए इस्तेमाल किया जाए।