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पीडब्लयूडी के ठेेकों में गड़बड़ियां रोकेने आया प्रहरी
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झांसी। लोक निर्माण विभाग की निविदाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए ई-प्रहरी नामक सॉफ्टवेयर लांच किया गया है। इसे अगले माह से पूरे प्रदेश में एक साथ लागू किया जा रहा है। इसके लांच होने के बाद अभियंताओं का दखल पूरी तरह खत्म हो जाएगा। निविदाएं सीधे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से खुलेंगी। इसके जरिए ठेकेदारों का भी डेटा बैंक तैयार होगा।
पीडब्ल्यूडी में करोड़ों रुपये की निविदाओं को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ समय पहले ई-टेंडरिंग आरंभ की गई लेकिन, चाभी अभियंताओं के हाथ में होने की वजह से अक्सर इस प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए जाते हैं। अब इसके अगले कदम के तौर पर ई-प्रहरी व्यवस्था को लांच किया जा रहा है। इसके जरिए ठेकेदारों का डेटा बैंक तैयार होगा। इसमें ठेकेदार अपनी हैसियत प्रमाण पत्र, टर्न ओवर समेत अन्य ब्यौरे अपलोड करेंगे। निविदाएं एनआईसी पर ई-टेंडरिंग के साथ ही ई-प्रहरी पर अपलोड होंगी। इसी प्रहरी से अब ई-वन फार्म जनरेट होगा। अभी तक यह व्यवस्था मैनुअल थी। इसकी वजह से कई बार पक्षपात की शिकायतें सामने आती थी लेकिन, अब यह खत्म करके इसे इलेक्ट्रानिक कर दिया गया है। इससे बने ई-वन फार्म को ही ई-टेँडर के साथ अपलोड करना होगा। खास बात यह कि सभी प्रतिस्पर्धी ठेकेदारों को तीन दिन की मोहलत दी जाएगी। गड़बड़ी की आशंका पर वह इस समयसीमा के भीतर शिकायत दर्ज करा सकेंगे। उनकी शिकायत मुख्यालय स्तर पर गठित मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता की जांच टीम करेगी। शिकायत झूठी मिलने पर शिकायकर्ता ठेकेदार को आपात्र ठहरा दिया जाएगा। ठेकेदार के डेटा बैंक में भी गड़बड़ी मिलने पर उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। 16 सिंतबर से पूरे प्रदेश में इसे एक साथ लागू किया जा रहा है। यहां भी इसी के जरिए निविदाएं निपटाई जाएंगी।
अवधेश कुमार
अधीक्षण अभियंता, झांसी वृत्त
पीडब्ल्यूडी
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पीडब्ल्यूडी में करोड़ों रुपये की निविदाओं को पारदर्शी बनाने के लिए कुछ समय पहले ई-टेंडरिंग आरंभ की गई लेकिन, चाभी अभियंताओं के हाथ में होने की वजह से अक्सर इस प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए जाते हैं। अब इसके अगले कदम के तौर पर ई-प्रहरी व्यवस्था को लांच किया जा रहा है। इसके जरिए ठेकेदारों का डेटा बैंक तैयार होगा। इसमें ठेकेदार अपनी हैसियत प्रमाण पत्र, टर्न ओवर समेत अन्य ब्यौरे अपलोड करेंगे। निविदाएं एनआईसी पर ई-टेंडरिंग के साथ ही ई-प्रहरी पर अपलोड होंगी। इसी प्रहरी से अब ई-वन फार्म जनरेट होगा। अभी तक यह व्यवस्था मैनुअल थी। इसकी वजह से कई बार पक्षपात की शिकायतें सामने आती थी लेकिन, अब यह खत्म करके इसे इलेक्ट्रानिक कर दिया गया है। इससे बने ई-वन फार्म को ही ई-टेँडर के साथ अपलोड करना होगा। खास बात यह कि सभी प्रतिस्पर्धी ठेकेदारों को तीन दिन की मोहलत दी जाएगी। गड़बड़ी की आशंका पर वह इस समयसीमा के भीतर शिकायत दर्ज करा सकेंगे। उनकी शिकायत मुख्यालय स्तर पर गठित मुख्य अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता की जांच टीम करेगी। शिकायत झूठी मिलने पर शिकायकर्ता ठेकेदार को आपात्र ठहरा दिया जाएगा। ठेकेदार के डेटा बैंक में भी गड़बड़ी मिलने पर उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
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इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। 16 सिंतबर से पूरे प्रदेश में इसे एक साथ लागू किया जा रहा है। यहां भी इसी के जरिए निविदाएं निपटाई जाएंगी।
अवधेश कुमार
अधीक्षण अभियंता, झांसी वृत्त
पीडब्ल्यूडी