फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   oxysen supply

अब अस्पतालों में पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई

Sun, 15 Oct 2017 12:45 AM IST
jhansi
jhansi Updated Sun, 15 Oct 2017 12:45 AM IST
विज्ञापन
oxysen supply
प्रशासन - फोटो : demo pic
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन खत्म होने से हुई मौतों के बाद प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला लिया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन को टेंडर निकालने के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अगस्त में 50 बच्चों समेत 60 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसकी वजह ऑक्सीजन खत्म हो जाना बताया गया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने पहली बार ऑक्सीजन गैस के लिए अलग से मेडिकल कॉलेजों को बजट जारी किया। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को 30 लाख रुपये ऑक्सीजन के लिए दिए गए। अब सरकार ने प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फैसला लिया है। मेडिकल कालेजों से जुड़े अस्पतालों में पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई की जाएगी। हाल ही में लखनऊ में बैठक के दौरान चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों ने मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को अपने-अपने परिसर लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगवाने के निर्देश दिए। देश में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने वाली तीन ही कंपनियां हैं। प्लांटों से ऑक्सीजन पाइप लाइनों से जोड़ा जाएगा। इसके बाद सीधे वार्ड, इमरजेंसी, आईसीयू में ऑक्सीजन की सप्लाई होगी।
विज्ञापन


कम लागत  
जानकारों ने बताया कि लिक्विड ऑक्सीजन से ही गैस ऑक्सीजन तैयार की जाती है। फिर प्लांट से सिलेंडर भरकर अस्पतालों में सप्लाई होते हैं। इसलिए सिलेंडर गैस वाले ऑक्सीजन की तुलना में लिक्विड ऑक्सीजन की लागत कम होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बॉक्स..
ये होगा फायदा
गैस के ऑक्सीजन सिलेंडर छोटे होते हैं, जो कि दो दिन में खत्म हो जाते हैं। लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट लगने से 15 से 20 दिन तक ऑक्सीजन की कमी का झंझट नहीं रहेगा। आईसीयू, इमरजेंसी में ऑक्सीजन की खपत ज्यादा होती है।


सरकार से लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट लगाने की अनुमति मिल गई है। इसका प्लांट काफी बड़ा होगा, इसलिए एक बार में ऑक्सीजन भर जाने से 15-20 दिनों तक सप्लाई होती रहेगी। प्लांट में मीटर भी लगेगा, जिससे ऑक्सीजन की उपलब्धता का पता चलता रहेगा। मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति गैस पाइप लाइन द्वारा ही की जाएगी। एक-दो दिन में टेंडर निकाले जाएंगे।
- डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed