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प्रधानों के अधिकारों पर चलाई केंची

Sun, 13 Dec 2015 01:32 AM IST
ब्यूरो
ब्यूरो Updated Sun, 13 Dec 2015 01:32 AM IST
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On the rights of princes drove scissors
झांसी। ग्राम प्रधान चुनाव के लिए रविवार को होने वाली मतगणना के बाद चुने जाने वाले 492 प्रधानों के घर खुशियां मनाई जाएंगी, लेकिन इस खुशी के बीच उनके लिए एक बुरी खबर भी है। केंद्र सरकार ने उनके अधिकारों पर कैंची चला दी है। मनरेगा के नियमों में बदलाव करते केंद्र ने उनसे कार्य योजना बनाने का अधिकार छीन लिया है। नये सत्र से ब्लाक स्तरीय कमेटी ही कार्य योजना बनाएगी।
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मनरेगा के तहत होने वाले विकास कार्यों का जिम्मा अभी तक पूरी तरह ग्राम प्रधान के हाथ में होता था। खुली बैठकों में मनरेगा की कार्य योजना बनाकर प्रधान और सचिव ही क्रियान्वयन कराते थे। अधिकांश गांवों में तो खुली बैठकें नाम के लिए होती थीं। प्रधान के घर बैठक कर ही सचिव व प्रधान के खास ग्राम पंचायत सदस्य योजना को ओके कर देते थे। लेकिन, अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
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केंद्र सरकार ने मनरेगा के नियमों में बदलाव कर दिया है। नये नियमों के अनुसार अब ब्लाक स्तरीय कमेटी गांवों में होने वाले मनरेगा कार्यों की योजना बनाएगी। कमेटी में ब्लाक सोशल ऑडिट टीम के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता, जॉब कार्ड धारक व तकनीकी सहायक शामिल होंगे।
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यह समिति गांवों के लिए कार्य योजना बनाकर खुली बैठक में कार्यों का प्रस्ताव रखेगी, जहां सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास कर गांवों में कार्य कराए जाएंगे। प्रधानों के पास अब मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों के मॉनीटरिंग पावर ही होंगे।

भारत सरकार के निर्देश पर आगामी वित्तीय वर्ष से नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। एक अप्रैल 2016 से पहले सभी ब्लाकों में कमेटियों का गठन कर दिया जाएगा।
विकास मिश्रा, उपायुक्त मनरेगा
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