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नागपुर में जंतर मंतर और जेन-जी का जिक्र: JNU की छात्रा बोलीं- सत्ता से सवाल का खौफ खत्म, PM-भागवत पर क्या कहा?
Fri, 28 Aug 2026 02:28 AM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नागपुर।
पीटीआई, नागपुर।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 28 Aug 2026 02:28 AM IST
सार
आइसा अध्यक्ष ने जंतर-मंतर पर युवाओं के आंदोलन के बाद सत्ता से सवाल करने का डर खत्म होने का दावा किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस अब युवाओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। नेहा बोरा ने क्या कुछ कहा, पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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नेहा बोरा, आइसा अध्यक्ष
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने गुरुवार को कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जेन-जी आंदोलन ने लोगों के अंदर बोलने का डर खत्म कर दिया है। अब लोग सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ बोलने से नहीं डर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को छात्रों और युवाओं से संपर्क करने के लिए मजबूर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ बोलने और सरकार से सवाल करने को लेकर लोगों में डर रहा है। वामपंथी छात्र संगठन आइसा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से जुड़ा है। इसकी अध्यक्ष नेहा बोरा नागपुर के वसंतराव देशपांडे हॉल में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम युवाओं और नागरिकों के लिए आयोजित किया गया था। इसका विषय था- 'प्रतिरोध - सब याद रखा जाएगा'।
'जनता की आवाज दबाने की कोशिश की'
बोरा ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस ने सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ बोलने वाले लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की। इसके लिए उन्हें 'राष्ट्र विरोधी' और 'देशद्रोही' बताया गया।
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दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी कर रहीं बोरा ने कहा कि 17 साल के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर सीबीएसई की बदइंतजामी का मुद्दा उठाया था। इसके बाद भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों ने उसे 'पाकिस्तानी' तक कह दिया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए लड़ने वाले आदिवासी छात्रों को अक्सर 'अर्बन नक्सल' बताया जाता है।
जंतर-मंतर आंदोलन से क्या बदला?
बोरा ने कहा कि नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लोगों के अंदर बोलने का डर खत्म कर चुका है। यह प्रदर्शन जुलाई में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ था। उन्होंने कहा कि अब लोग सवाल पूछने से नहीं डरते और इसी वजह से सत्तारूढ़ भाजपा डरी हुई है।
आइसा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा ने कभी नहीं सोचा था कि पिछले कुछ महीनों में युवाओं के बीच उसकी लोकप्रियता इतनी कम हो जाएगी। बोरा ने बताया कि उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ जंतर-मंतर पर 23 दिन तक भूख हड़ताल की थी।
ये भी पढ़ें: 'फार्मा सेक्टर भारत की रणनीतिक ताकत': शाह ने शोध और नवाचार पर दिया जोर; चीन से मुकाबले की क्या है तैयारी?
नेहा बोरा ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को सरकार से डरना नहीं चाहिए। इसके बजाय सरकार को जनता के आक्रोश से डरना चाहिए। सरकार को अपने कामों के लिए जवाबदेह भी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, आज वह डर भाजपा और आरएसएस के दिल में बैठ गया है। जेन-जी आंदोलन के लिए इससे ज्यादा गौरव की बात और कुछ नहीं हो सकती।
'पीएम मोदी और आरएसएस प्रमुख को बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा'
बोरा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद से दूरी बनाई। उनके मुताबिक, यही इस जेन-जी आंदोलन की उपलब्धि है। छात्र नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जेन-जी की भाषा में बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 30 सेकंड की इंस्टाग्राम रील भी बनाईं। उन्होंने कहा, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भी 'जेन-जी के साथ संवाद' नाम से कार्यक्रम करने पड़े। इसका मकसद युवाओं के बीच स्वीकार्यता हासिल करना था। यही इस आंदोलन की उपलब्धि है।
बोरा ने दावा किया कि देश के छात्र और युवा अब भाजपा को सत्ता में नहीं देखना चाहते। उन्होंने कहा कि भाजपा एक दशक से ज्यादा समय से देश में सत्ता में है। लेकिन बेरोजगारी बढ़ रही है। अमीर और गरीब के बीच का अंतर भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को सिर्फ संसद से ही नहीं हटाया जाएगा। उन्हें आम लोगों के दिल और घरों से भी हटाया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ बोलने और सरकार से सवाल करने को लेकर लोगों में डर रहा है। वामपंथी छात्र संगठन आइसा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन से जुड़ा है। इसकी अध्यक्ष नेहा बोरा नागपुर के वसंतराव देशपांडे हॉल में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। यह कार्यक्रम युवाओं और नागरिकों के लिए आयोजित किया गया था। इसका विषय था- 'प्रतिरोध - सब याद रखा जाएगा'।
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'जनता की आवाज दबाने की कोशिश की'
बोरा ने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस ने सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ बोलने वाले लोगों की आवाज दबाने की कोशिश की। इसके लिए उन्हें 'राष्ट्र विरोधी' और 'देशद्रोही' बताया गया।
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दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी कर रहीं बोरा ने कहा कि 17 साल के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर सीबीएसई की बदइंतजामी का मुद्दा उठाया था। इसके बाद भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों ने उसे 'पाकिस्तानी' तक कह दिया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए लड़ने वाले आदिवासी छात्रों को अक्सर 'अर्बन नक्सल' बताया जाता है।
जंतर-मंतर आंदोलन से क्या बदला?
बोरा ने कहा कि नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन लोगों के अंदर बोलने का डर खत्म कर चुका है। यह प्रदर्शन जुलाई में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुआ था। उन्होंने कहा कि अब लोग सवाल पूछने से नहीं डरते और इसी वजह से सत्तारूढ़ भाजपा डरी हुई है।
आइसा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा ने कभी नहीं सोचा था कि पिछले कुछ महीनों में युवाओं के बीच उसकी लोकप्रियता इतनी कम हो जाएगी। बोरा ने बताया कि उन्होंने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ जंतर-मंतर पर 23 दिन तक भूख हड़ताल की थी।
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नेहा बोरा ने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को सरकार से डरना नहीं चाहिए। इसके बजाय सरकार को जनता के आक्रोश से डरना चाहिए। सरकार को अपने कामों के लिए जवाबदेह भी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, आज वह डर भाजपा और आरएसएस के दिल में बैठ गया है। जेन-जी आंदोलन के लिए इससे ज्यादा गौरव की बात और कुछ नहीं हो सकती।
'पीएम मोदी और आरएसएस प्रमुख को बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा'
बोरा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संसद से दूरी बनाई। उनके मुताबिक, यही इस जेन-जी आंदोलन की उपलब्धि है। छात्र नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जेन-जी की भाषा में बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 30 सेकंड की इंस्टाग्राम रील भी बनाईं। उन्होंने कहा, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भी 'जेन-जी के साथ संवाद' नाम से कार्यक्रम करने पड़े। इसका मकसद युवाओं के बीच स्वीकार्यता हासिल करना था। यही इस आंदोलन की उपलब्धि है।
बोरा ने दावा किया कि देश के छात्र और युवा अब भाजपा को सत्ता में नहीं देखना चाहते। उन्होंने कहा कि भाजपा एक दशक से ज्यादा समय से देश में सत्ता में है। लेकिन बेरोजगारी बढ़ रही है। अमीर और गरीब के बीच का अंतर भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को सिर्फ संसद से ही नहीं हटाया जाएगा। उन्हें आम लोगों के दिल और घरों से भी हटाया जाएगा।