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अब टीबी नहीं बन पाएगी जानलेवा

Tue, 14 May 2019 12:37 AM IST
jhansi Published by: देवेंद्र कुमार Updated Tue, 14 May 2019 12:37 AM IST
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now  tb will not make not dedly
medical college - फोटो : demo
झांसी। ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के मरीजों को अब झांसी में ही बेहतर इलाज मिल सकेगा, क्योंकि महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में सीडीएसटी लैब खुलने जा रही है। शासन ने इसकी मंजूरी दे दी है। माइक्रोबायोलॉजी लैब में जल्द ही इस लैब का निर्माण शुरू हो जाएगा। लैब शुरू होने के बाद टीबी के मरीजों की स्टेज जानकर उसी आधार पर इलाज किया जाएगा। यदि दवा बदलने की जरूरत पड़ेगी तो जांच में पता चल जाएगा। इस वजह से समय रहते टीबी की बीमारी ठीक हो सकेगी।
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जिला क्षय रोग केंद्र में अभी जीन एक्सपर्ट जांच की सुविधा उपलब्ध है। जीन एक्सपर्ट मशीन से सिर्फ  कुछ ही घंटे में पता चल जाता है कि मरीज को टीबी है अथवा नहीं। यदि टीबी निकल आती है तो तुरंत मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है। मगर, कई बार इलाज के दौरान मरीज को जो दवा चल रही होती है, उसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। ऐसे में दवा का असर खत्म हो जाता है। इसका पता लगाने के लिए सीडीएसटी लैब की जरूरत होती है, जो अब महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में खुलने जा रही है। यह लैब खुलने के बाद मरीज के बलगम की जांच (कल्चर) कर पता लगाया जा सकेगा कि कहीं टीबी रोगी में दवा के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता तो विकसित नहीं हो गई। यदि ऐसा मिल जाता है तो मरीज की दवा बदल दी जाएगी। लैब खुलने के बाद एक-डेढ़ महीने में टीबी रोगियों का नियमित फॉलोअप के तौर पर जांच (कल्चर) की जाएगी। लैब खुलने से मरीजों को इलाज में काफी मदद मिलेगी। समय रहते टीबी ठीक हो सकेगी।
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अभी ये है व्यवस्था
अभी टीबी रोगियों का माहवार कल्चर (जांच) के लिए बलगम का सैंपल लेकर आगरा अथवा लखनऊ स्थित सीडीएसटी लैब में भेजा जाता है। यहां से जांच रिपोर्ट आने के बाद जरूरत पर मरीज की दवा बदली जाती है।
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ये हैं टीबी के लक्षण
- दो हफ्ते से ज्यादा खांसी आ रही हो
- खांसी के साथ बलगम आ रहा हो
- कभी कभार खून आना शुरू हो जाए
- भूख कम लगना
- वजन घटना
- शाम को बुखार आना
- सीने में दर्द

जानलेवा बीमारी है
ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2007 के मुताबिक, देश में 28 लाख टीबी के मरीजों की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि इसमें लगभग 1100 मरीजों की मौत टीबी के कारण हुई है। भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक टीबी की बीमारी को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा है। भारत सरकार द्वारा साल 2018 में जारी नोटिफिकेशन के तहत लगभग 1.11 लाख मरीजों में टीबी होने की जानकारी मिली थी। वहीं, साल 2017 में लगभग 68,000 मरीजों की जानकारी दी गई थी।
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