{"_id":"59dd1f944f1c1bc1678b510e","slug":"natya-karyashala-innaugurated","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवोदित कलाकारों में झिझक खत्म की, बढ़ाया हौसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवोदित कलाकारों में झिझक खत्म की, बढ़ाया हौसला
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:59 AM IST
विज्ञापन
culture
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
झांसी। राजकीय संग्रहालय के सभागार में नाट्य कार्यशाला के पहले दिन नवोदित कलाकारों की झिझक को दूर कर मंच पर खड़ा होने का तरीका और लंबे संवाद बोलना सिखाया गया। राजकीय संग्रहालय और बुंदेली सिनेमा के संयुक्त तत्वावधान में 15 दिवसीय कार्यशाला में रंगमंच एवं सिनेमा की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।
बुंदेली फिल्मों के वरिष्ठ कलाकार देवदत्त बुधौलिया और आरिफ शहडोली ने बताया कि नवोदित कलाकारों को अभिनय से गुर सिखाने के दौरान बताया कि मंच पर मूवमेंट के दौरान हाथ से चेहरे को न छिपाएं। अमूमन नए कलाकार डायलॉग बोलते समय घबराहट में दर्शकों के सामने चेहरे पर हाथ रख लेते हैं। लंबे संवाद को ग्रुप में याद करने को कहा गया। इसे गैवलिग कहते हैं। इस तरह से संवाद जल्द याद हो जाते हैं। कार्यशाला में 20 नवोदित कलाकारों ने शिरकत की।
प्रशिक्षक देवदत्त बुधौलिया ने बताया कि सभी प्रतिभागी 24 अक्तूबर को नाटक का मंचन कर अपनी प्रतिभा साबित करेंगे। इसके अलावा भविष्य में नाट्य विद्यालय बनाने की भी योजना है। इससे पहले कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। 15 दिन तक चलने वाली इस कार्यशाला में अभिनय के कई आयामों पर चर्चा की जाएगी।
विज्ञापन
विशेषज्ञ बताएंगे कि किस तरह अभियान के क्षेत्र में झंडे गाड़े जा सकते हैं। इसके लिए मेहनत और लगन की जरूरत है। संघर्ष के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि कोशिश में जुटे रहें। कई ऐसे कलाकार हैं, जो संघर्ष के दौरान तपे और फिर पूरी दुनिया में छा गए। कार्यशाला में देवराज चतुर्वेदी, सुंदर लिखार, मनमोहन गेड़ा, पीयूष रावत, भूपेश यादव, उमा पाराशर, शिवम यादव, दिनेश जैन, आरके गौरव, अर्जुन सिंह, नवीन विश्वकर्मा मौजूद रहे।
विज्ञापन
बुंदेली फिल्मों के वरिष्ठ कलाकार देवदत्त बुधौलिया और आरिफ शहडोली ने बताया कि नवोदित कलाकारों को अभिनय से गुर सिखाने के दौरान बताया कि मंच पर मूवमेंट के दौरान हाथ से चेहरे को न छिपाएं। अमूमन नए कलाकार डायलॉग बोलते समय घबराहट में दर्शकों के सामने चेहरे पर हाथ रख लेते हैं। लंबे संवाद को ग्रुप में याद करने को कहा गया। इसे गैवलिग कहते हैं। इस तरह से संवाद जल्द याद हो जाते हैं। कार्यशाला में 20 नवोदित कलाकारों ने शिरकत की।
विज्ञापन
प्रशिक्षक देवदत्त बुधौलिया ने बताया कि सभी प्रतिभागी 24 अक्तूबर को नाटक का मंचन कर अपनी प्रतिभा साबित करेंगे। इसके अलावा भविष्य में नाट्य विद्यालय बनाने की भी योजना है। इससे पहले कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। 15 दिन तक चलने वाली इस कार्यशाला में अभिनय के कई आयामों पर चर्चा की जाएगी।
विज्ञापन
विशेषज्ञ बताएंगे कि किस तरह अभियान के क्षेत्र में झंडे गाड़े जा सकते हैं। इसके लिए मेहनत और लगन की जरूरत है। संघर्ष के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि कोशिश में जुटे रहें। कई ऐसे कलाकार हैं, जो संघर्ष के दौरान तपे और फिर पूरी दुनिया में छा गए। कार्यशाला में देवराज चतुर्वेदी, सुंदर लिखार, मनमोहन गेड़ा, पीयूष रावत, भूपेश यादव, उमा पाराशर, शिवम यादव, दिनेश जैन, आरके गौरव, अर्जुन सिंह, नवीन विश्वकर्मा मौजूद रहे।