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नासूर बना कच्ची शराब का धंधा
ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2015 01:19 AM IST
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झांसी। जिले में कच्ची शराब का धंधा नासूर बन गया है। धड़ल्ले से इसको बनाया जा रहा है और खुलेआम यह बेची जा रही है। यह शराब हजारों लोगों की जिंदगी में जहर घोल रही है। साथ ही सरकार को भी राजस्व की भारी क्षति पहुंचा रही है। बावजूद, इस पर प्रभावी अंकुश को कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
कबूतरा व लहंगा ब्रांड के नाम से जानी जाने वाली कच्ची शराब की बिक्री के आबकारी विभाग द्वारा जिले में दो दर्जन से अधिक अड्डे चिह्नित किए गए हैं, जहां यह बनाई जाती है। यहां दिन रात भट्ठियां धधकती रहती हैं। इसी प्रकार एक सैकड़ा से अधिक बिक्री के अड्डे भी चिह्नित हैं, जिन पर सुबह से ही शराबियों का जमघट लग जाता है। बिक्री के यह अड्डे आबादी के बीच ही विभिन्न स्थानों पर आबाद हैं।
हालांकि, समय-समय पर विभाग द्वारा अभियान चलाकर कार्रवाई भी की जाती है। लेकिन, कुछ समय बाद धंधा फिर से शुरू हो जाता है। यह क्रम पिछले कई दशकों से बदस्तूर चला आ रहा है। बावजूद, इस पर अंकुश को स्थायी उपाय नहीं खोजे जा रहे हैं।
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कच्ची शराब की बिक्री पर अंकुश को जल्द ही प्रभावी उपाय किए जाएंगे। इसके लिए अलग-अलग टीम बनाकर कार्रवाई होगी। पुलिस व प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा।
- प्रेमनारायण, जिला आबकारी अधिकारी
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कबूतरा व लहंगा ब्रांड के नाम से जानी जाने वाली कच्ची शराब की बिक्री के आबकारी विभाग द्वारा जिले में दो दर्जन से अधिक अड्डे चिह्नित किए गए हैं, जहां यह बनाई जाती है। यहां दिन रात भट्ठियां धधकती रहती हैं। इसी प्रकार एक सैकड़ा से अधिक बिक्री के अड्डे भी चिह्नित हैं, जिन पर सुबह से ही शराबियों का जमघट लग जाता है। बिक्री के यह अड्डे आबादी के बीच ही विभिन्न स्थानों पर आबाद हैं।
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हालांकि, समय-समय पर विभाग द्वारा अभियान चलाकर कार्रवाई भी की जाती है। लेकिन, कुछ समय बाद धंधा फिर से शुरू हो जाता है। यह क्रम पिछले कई दशकों से बदस्तूर चला आ रहा है। बावजूद, इस पर अंकुश को स्थायी उपाय नहीं खोजे जा रहे हैं।
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कच्ची शराब की बिक्री पर अंकुश को जल्द ही प्रभावी उपाय किए जाएंगे। इसके लिए अलग-अलग टीम बनाकर कार्रवाई होगी। पुलिस व प्रशासन का भी सहयोग लिया जाएगा।
- प्रेमनारायण, जिला आबकारी अधिकारी