झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से हुई अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त ने खड़ी बोली में काव्य लेखन में आकर छायावाद के आगमन का पथ प्रशस्त किया। उन्होंने अपनी रचनाओं से स्त्री की गरिमा, किसानों की व्यथा और राष्ट्रीय जागरण को सामने लेकर आने का काम किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चेतना की जिस मशाल को राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने भारत भारती, जयद्रथ वध आदि रचनाओं से उद्घाटित किया, वह आज के समय में सीमाओं पर जारी तनाव को देखते हुए इतनी आसानी प्रासंगिक है। बीयू कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन ने गुप्त जी के काव्य को मानवता के लिए पथ प्रदर्शक की संज्ञा दी। सारस्वत अतिथि पोलैंड यूनिवर्सिटी वारसॉ के हिंदी प्रोफ़ेसर सुधांशु कुमार शुक्ल ने मैथिलीशरण गुप्त को जनमानस में व्याप्त कवि बताया। विशिष्ट अतिथि प्रो. करुणाशंकर उपाध्याय ने चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भारत के तनाव तथा महामारी के समय में उनको पढ़ने की जरूरत पर बल दिया। राष्ट्रकवि के पौत्र डॉ.वैभव गुप्त ने कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे को 12 दिसंबर को चिरगांव में वर्ष 2020 के राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त सम्मान से अलंकृत करने की घोषणा की। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के प्रो. नरेंद्र मिश्र ने कविताओं के माध्यम से आज के दौर में राष्ट्रकवि की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के योगेंद्र प्रताप सिंह ने गुप्त जी द्वारा राज्यसभा में बहस के दौरान पढ़ी गई रचनाओं की चर्चा की। कार्यक्रम संयोजक डॉ. पुनीत बिसारिया ने राष्ट्रकवि को महत्वपूर्ण कवि की संज्ञा दी। इस दौरान डॉ. अचला पांडेय, डॉ. मुन्ना तिवारी, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. नवीन चंद्र पटेल, डॉ. डीके भट्ट, डॉ. अमरेश सिंह, डॉ. शीबा शरत, डॉ. दमयंती तिवारी, डॉ. अश्विनी शुक्ला मौजूद रहे।