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सही समय पर उपचार से बचाया जा सकता है गुर्दा
झांसी(ब्यूरो)
Updated Wed, 02 Sep 2015 12:46 AM IST
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के झांसी एकेडमी आफ पीडियाट्रिक्स एवं गुर्दा रोग विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बच्चों में गुर्दे से संबंधित रोगों पर कार्यशाला आयोजित हुई।
कार्यशाला में प्रधानाचार्य प्रो. एनएस सेंगर ने कहा कि बच्चों में गुर्दे से संबंधित रोगों पर यदि प्रारंभ अवस्था में उपचार शुरू किया जाए तो गुर्दों को बचाने के साथ साथ बच्चों के शारीरिक विकास में भी सहायता मिलती है। विभागाध्यक्ष डा. ओम शंकर चौरसिया ने कहा कि बच्चों में भी गुर्दे से संबंधित रोगों में पेरीटोनियल डायलिसिस, हीमोडायलिसिस, प्लाज्मा फैरेसिस का उपयोग बढ़ता जा रहा है। सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली के डा. कनव आनंद ने बच्चों में होने वाले नेफ्रोटिक सिंड्रोम तथा प्लाज्मा में विषाक्त रसायनों क ो साफ करने वाली तकनीकी प्लाज्मा फेरेसिस पर विस्तार से जानकारियां दीं। डा. अमित अग्रवाल ने बच्चों में होने वाले पेशाब के संक्रमण, बार बार पेशाब करना, बिस्तर में पेशाब करना आदि रोगों के आधुनिक इलाज से अवगत कराया। कार्यशाला में पेरीटोनियल डायलिसिस, हीमो डायलिसिस, प्लाज्मा फेरेसिस के बारे में बताया।
इस अवसर पर कार्यशाला के अध्यक्ष डा. आरएस सेठी, डा. अनिल कौशिक, डा. अशोक सक्सेना, डा. प्रमोद गुलाटी, डा. प्रमोद गुप्ता, डा. आरएस भुसारी, डा. सुरेंद्र नाथ, डा. दिनेश यादव, डा. आराधना कनकने, डा. सपना गुप्ता आदि मौजूद रहीं।
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कार्यशाला में प्रधानाचार्य प्रो. एनएस सेंगर ने कहा कि बच्चों में गुर्दे से संबंधित रोगों पर यदि प्रारंभ अवस्था में उपचार शुरू किया जाए तो गुर्दों को बचाने के साथ साथ बच्चों के शारीरिक विकास में भी सहायता मिलती है। विभागाध्यक्ष डा. ओम शंकर चौरसिया ने कहा कि बच्चों में भी गुर्दे से संबंधित रोगों में पेरीटोनियल डायलिसिस, हीमोडायलिसिस, प्लाज्मा फैरेसिस का उपयोग बढ़ता जा रहा है। सर गंगाराम अस्पताल दिल्ली के डा. कनव आनंद ने बच्चों में होने वाले नेफ्रोटिक सिंड्रोम तथा प्लाज्मा में विषाक्त रसायनों क ो साफ करने वाली तकनीकी प्लाज्मा फेरेसिस पर विस्तार से जानकारियां दीं। डा. अमित अग्रवाल ने बच्चों में होने वाले पेशाब के संक्रमण, बार बार पेशाब करना, बिस्तर में पेशाब करना आदि रोगों के आधुनिक इलाज से अवगत कराया। कार्यशाला में पेरीटोनियल डायलिसिस, हीमो डायलिसिस, प्लाज्मा फेरेसिस के बारे में बताया।
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इस अवसर पर कार्यशाला के अध्यक्ष डा. आरएस सेठी, डा. अनिल कौशिक, डा. अशोक सक्सेना, डा. प्रमोद गुलाटी, डा. प्रमोद गुप्ता, डा. आरएस भुसारी, डा. सुरेंद्र नाथ, डा. दिनेश यादव, डा. आराधना कनकने, डा. सपना गुप्ता आदि मौजूद रहीं।
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