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‘जियो ग्रिड’ से लैस होगा रेल ट्रैक
Wed, 13 Feb 2019 01:02 AM IST
देवेंद्र कुमार
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Wed, 13 Feb 2019 01:02 AM IST
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- फोटो : demo
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पटरियों को मजबूती देने के लिए उन्हें अब जियो ग्रिड से लैस करने की तैयारी है। जियो मतलब ‘भू’, जियो ग्रिड यानी जमीन के संपर्क में आने वाली एक खास जालीनुमा आकृति जिस पर मिट्टी, पानी, जंग का दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। उत्तर मध्य रेलवे में झांसी मंडल के ललितपुर सेक्शन में पहली बार इसका उपयोग किया गया है। ललितपुर सेक्शन में जीरोन स्टेशन के पास सफल परीक्षण के बाद जल्द ही आगासौद स्टेशन के पास जियो ग्रिड सिस्टम लगाने की तैयारी है। इससे पटरियों पर भरने वाले पानी से भी रेलवे को राहत मिलेगी।
पटरियों को मजबूती देने और ट्रेनों को तेज गति से दौड़ाने के लिए रेलवे ने जियो ग्रिड की मदद लेने की तैयारी शुरू कर दी है। बरसात के समय पटरियों के मध्य पानी न भरे, इसके लिए जियो ग्रिड कारगर साबित हो रही है। झांसी मंडल के ललितपुर से बीना रेलखंड के मध्य पटरियों पर जियो ग्रिड डाली गई है। जीरोन स्टेशन के पास नौ किलोमीटर रेलवे ट्रैक को कवर्ड किया है। इससे ट्रैक को मजबूती मिलने के साथ ही पटरियों पर न तो बरसात का पानी यहां बैठ सकेगा और न ही पटरी धसकने का खतरा पैदा होगा। इस काम में 43 लाख 57 हजार रुपये का खर्चा आया था। यहां के सफल परीक्षण होने के बाद रेलवे ने अब आगासौद स्टेशन के पास जियो ग्रिड बिछाने की भी तैयारी शुरू कर दी है।
ललितपुर से बीना सेक्शन में पानी व काली मिट्टी की समस्या बरसात के समय रहती है, जिससे ट्रैक में परेशानी भी बनी रहती है। ऐसे में जियो ग्र्रिड से यह समस्या भी दूर होगी। गिट्टी और स्लीपर के बीच टेक्सटाइल की जॉग्रिड बिछाई जा रही है, जो जियो ग्रिड कहलाती है। इससे ट्रैक के रखरखाव में मदद मिलेगी और सेक्शन में ट्रेनों की गति बढ़ाने में भी मदद होगी। इस जियो ग्रिड का प्रयोग उत्तर मध्य रेलवे में सबसे पहले झांसी मंडल के इस खंड में किया जा रहा है। आरडीएसओ लखनऊ के अध्ययन के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद ही यह कार्य कराया जा रहा है। सफलता के बाद इसे उत्तर मध्य रेलवे के अन्य मंडलों में भी लागू किया जाएगा।
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यह होता है जियो ग्रिड
जियो ग्रिड एक फाइबर नुमा जाली होती है, जो पॉलिमर फाइबर की बनी होती है जिसमें जंग भी नहीं लगती है। जो पटरी पर गिट्टी के नीचे बिछा दी जाती है। जिससे ग्रिड मिट्टी को पकड़कर रखती है। उक्त जाली पानी व मिट्टी को पटरी पर ठहरने भी नहीं देगा और पटरी व गिट्टी की पकड़ मजबूत होने के कारण ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी।
उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में जियो ग्रिड का पहली बार प्रयोग किया जा चुका है। इससे रेलवे ट्रैक को मजबूती मिलेगी। ग्रिड बरसात का पानी व काली मिट्टी का भराव भी नहीं होेने देगी। - मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
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पटरियों को मजबूती देने और ट्रेनों को तेज गति से दौड़ाने के लिए रेलवे ने जियो ग्रिड की मदद लेने की तैयारी शुरू कर दी है। बरसात के समय पटरियों के मध्य पानी न भरे, इसके लिए जियो ग्रिड कारगर साबित हो रही है। झांसी मंडल के ललितपुर से बीना रेलखंड के मध्य पटरियों पर जियो ग्रिड डाली गई है। जीरोन स्टेशन के पास नौ किलोमीटर रेलवे ट्रैक को कवर्ड किया है। इससे ट्रैक को मजबूती मिलने के साथ ही पटरियों पर न तो बरसात का पानी यहां बैठ सकेगा और न ही पटरी धसकने का खतरा पैदा होगा। इस काम में 43 लाख 57 हजार रुपये का खर्चा आया था। यहां के सफल परीक्षण होने के बाद रेलवे ने अब आगासौद स्टेशन के पास जियो ग्रिड बिछाने की भी तैयारी शुरू कर दी है।
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ललितपुर से बीना सेक्शन में पानी व काली मिट्टी की समस्या बरसात के समय रहती है, जिससे ट्रैक में परेशानी भी बनी रहती है। ऐसे में जियो ग्र्रिड से यह समस्या भी दूर होगी। गिट्टी और स्लीपर के बीच टेक्सटाइल की जॉग्रिड बिछाई जा रही है, जो जियो ग्रिड कहलाती है। इससे ट्रैक के रखरखाव में मदद मिलेगी और सेक्शन में ट्रेनों की गति बढ़ाने में भी मदद होगी। इस जियो ग्रिड का प्रयोग उत्तर मध्य रेलवे में सबसे पहले झांसी मंडल के इस खंड में किया जा रहा है। आरडीएसओ लखनऊ के अध्ययन के बाद प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद ही यह कार्य कराया जा रहा है। सफलता के बाद इसे उत्तर मध्य रेलवे के अन्य मंडलों में भी लागू किया जाएगा।
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यह होता है जियो ग्रिड
जियो ग्रिड एक फाइबर नुमा जाली होती है, जो पॉलिमर फाइबर की बनी होती है जिसमें जंग भी नहीं लगती है। जो पटरी पर गिट्टी के नीचे बिछा दी जाती है। जिससे ग्रिड मिट्टी को पकड़कर रखती है। उक्त जाली पानी व मिट्टी को पटरी पर ठहरने भी नहीं देगा और पटरी व गिट्टी की पकड़ मजबूत होने के कारण ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी।
उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में जियो ग्रिड का पहली बार प्रयोग किया जा चुका है। इससे रेलवे ट्रैक को मजबूती मिलेगी। ग्रिड बरसात का पानी व काली मिट्टी का भराव भी नहीं होेने देगी। - मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।