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जल्द शुरू होंगे दिल के छेद के ऑपरेशन, बैलून वॉल्वोप्लास्टी
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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जल्द ही दिल के छेद के ऑपरेशन और बैलून वॉल्वोप्लास्टी की सुविधा शुरू हो जाएगी। इसके बाद मरीजों को इलाज कराने के लिए दूसरे शहरों की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में कार्डियोलॉजी की यूनिट है। यहां पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कैथ लैब बनी हुई है। इस लैब के जरिए अभी एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी की जा रही है। मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक शर्मा ने बताया कि अस्पताल में जल्द ही रोगियों के दिल के छेद का बिना सर्जरी इलाज होगा। एंजियोप्लास्टी की ही तरह पैर की नस के सहारे दिल तक पहुंचकर छेद को एक डिवाइस से बंद कर दिया जाएगा। इससे मरीज जल्द ही अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाता है। साथ ही बैलून वॉल्वोप्लास्टी की भी सुविधा मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ह्रदय में चार वॉल्व होते हैं। हार्ट चैंबर में लगे वॉल्व हर एक हार्ट बीट के साथ खुलते और बंद होते हैं। हार्ट वॉल्व में सिकुड़न या अन्य कोई परेशानी होने पर रक्त पूरी तरह आगे न जाकर फेफड़े की तरफ लौटना शुरू कर देता है। तब बैलून वॉल्वोप्लास्टी करनी पड़ती है। अधिकारियों से इसे शुरू करने को लेकर बात हो गई है।
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वर्जन..
कार्डियोलॉजी यूनिट में दिल के छेद के ऑपरेशन और बैलून वॉल्वोप्लास्टी शुरू करने को लेकर डॉक्टरों से बात हुई है। डॉक्टरों को जरूरी स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा। चूंकि, कॉलेज में आधुनिक सुविधाओं से लैस कैथ लैब है। ऐसे में ये दोनों ही सर्जरी कैथ लैब से हो जाएंगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में कार्डियोलॉजी की यूनिट है। यहां पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कैथ लैब बनी हुई है। इस लैब के जरिए अभी एंजियोप्लास्टी और एंजियोग्राफी की जा रही है। मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आलोक शर्मा ने बताया कि अस्पताल में जल्द ही रोगियों के दिल के छेद का बिना सर्जरी इलाज होगा। एंजियोप्लास्टी की ही तरह पैर की नस के सहारे दिल तक पहुंचकर छेद को एक डिवाइस से बंद कर दिया जाएगा। इससे मरीज जल्द ही अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाता है। साथ ही बैलून वॉल्वोप्लास्टी की भी सुविधा मिलेगी।
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उन्होंने बताया कि ह्रदय में चार वॉल्व होते हैं। हार्ट चैंबर में लगे वॉल्व हर एक हार्ट बीट के साथ खुलते और बंद होते हैं। हार्ट वॉल्व में सिकुड़न या अन्य कोई परेशानी होने पर रक्त पूरी तरह आगे न जाकर फेफड़े की तरफ लौटना शुरू कर देता है। तब बैलून वॉल्वोप्लास्टी करनी पड़ती है। अधिकारियों से इसे शुरू करने को लेकर बात हो गई है।
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कार्डियोलॉजी यूनिट में दिल के छेद के ऑपरेशन और बैलून वॉल्वोप्लास्टी शुरू करने को लेकर डॉक्टरों से बात हुई है। डॉक्टरों को जरूरी स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा। चूंकि, कॉलेज में आधुनिक सुविधाओं से लैस कैथ लैब है। ऐसे में ये दोनों ही सर्जरी कैथ लैब से हो जाएंगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।