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गजक, लड्डू और रिफाइंड तेल बनेंगे भोजला की पहचान
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 May 2017 12:42 AM IST
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मंडी
- फोटो : demo
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भोजला की पहचान आने वाले दिनों में गजक, लड्डू और रिफाइंड तेल बनाने वाले क्षेत्र के रूप में होगी। यहां स्थित कृषि मंडी में तिल की फैक्ट्री लगाई जाएगी, इस पर 9.08 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें से 4.07 करोड़ रुपये मंडी समिति लगाएगी।
प्रदेश में झांसी जिले में सर्वाधिक तिल का उत्पादन होता है। यहां की एक लाख 25 हजार हेक्टेयर जमीन पर तिल उत्पादन होता है। सालाना तिल उत्पादन का औसत तीन लाख क्विंटल है। यदि फसल अच्छी हो गई तो तिल का उत्पादन डेढ़ गुना तक बढ़ जाता है। मार्केट में तिल के दाम न्यूनतम पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल तक रहते हैं। इसलिए प्रदेश शासन ने झांसी को तिलहन हब के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में झांसी में तिल की फैक्ट्री (तिल प्रोसेसिंग प्लांट) लगाई जाएगी।
मंडी समिति के सहयोग से लग रही इस फैक्ट्री के लिए भोजला मंडी की डेढ़ एकड़ जमीन सुरक्षित की गई है। 9.08 करोड़ रुपये की लागत से लगने वाली इस फैक्ट्री को मंडी समिति 4.07 करोड़ रुपये का ऋण देगी। 10 प्रतिशत पैसा कंपनी लगाएगी और 20 प्रतिशत राशि कंपनी को बैंक से ऋण के रूप में दी जाएगी। इसकी क्षमता 70 मीट्रिक टन प्रति सीजन होगी। फैक्ट्री में तिल की कमी न रहे, इसके लिए किसानों के समूह बनाए जाएंगे और यह समूह घर-घर जाकर किसानों से तिल खरीदेंगे। किसानों को तिल बेचने में मुनाफा हो, इसलिए तय किया गया है कि जिस रेट पर मंडी में तिल बिक रहा होगा, उसी रेट पर किसान के घर से तिल खरीदा जाएगा। इससे न केवल किसान को तिल बेचने के लिए मंडी तक नहीं आना पड़ेगा, बल्कि किसान को तिल के दाम भी बेहतर मिलेंगे।
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सितंबर में शुरू होने की उम्मीद
तिल प्रोसेसिंग प्लांट (तिल की फैक्ट्री) लगाने से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। इससे किसानों को तिल उत्पादन का पूरा फायदा मिलेगा। सितंबर तक फैक्ट्री शुरू होने की उम्मीद है।
- डा. यूपी सिंह
उप कृषि निदेशक
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प्रदेश में झांसी जिले में सर्वाधिक तिल का उत्पादन होता है। यहां की एक लाख 25 हजार हेक्टेयर जमीन पर तिल उत्पादन होता है। सालाना तिल उत्पादन का औसत तीन लाख क्विंटल है। यदि फसल अच्छी हो गई तो तिल का उत्पादन डेढ़ गुना तक बढ़ जाता है। मार्केट में तिल के दाम न्यूनतम पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल तक रहते हैं। इसलिए प्रदेश शासन ने झांसी को तिलहन हब के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में झांसी में तिल की फैक्ट्री (तिल प्रोसेसिंग प्लांट) लगाई जाएगी।
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मंडी समिति के सहयोग से लग रही इस फैक्ट्री के लिए भोजला मंडी की डेढ़ एकड़ जमीन सुरक्षित की गई है। 9.08 करोड़ रुपये की लागत से लगने वाली इस फैक्ट्री को मंडी समिति 4.07 करोड़ रुपये का ऋण देगी। 10 प्रतिशत पैसा कंपनी लगाएगी और 20 प्रतिशत राशि कंपनी को बैंक से ऋण के रूप में दी जाएगी। इसकी क्षमता 70 मीट्रिक टन प्रति सीजन होगी। फैक्ट्री में तिल की कमी न रहे, इसके लिए किसानों के समूह बनाए जाएंगे और यह समूह घर-घर जाकर किसानों से तिल खरीदेंगे। किसानों को तिल बेचने में मुनाफा हो, इसलिए तय किया गया है कि जिस रेट पर मंडी में तिल बिक रहा होगा, उसी रेट पर किसान के घर से तिल खरीदा जाएगा। इससे न केवल किसान को तिल बेचने के लिए मंडी तक नहीं आना पड़ेगा, बल्कि किसान को तिल के दाम भी बेहतर मिलेंगे।
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सितंबर में शुरू होने की उम्मीद
तिल प्रोसेसिंग प्लांट (तिल की फैक्ट्री) लगाने से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। इससे किसानों को तिल उत्पादन का पूरा फायदा मिलेगा। सितंबर तक फैक्ट्री शुरू होने की उम्मीद है।
- डा. यूपी सिंह
उप कृषि निदेशक