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गहोई महासभा में शामिल होंगे देश भर के प्रतिनिधि
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झांसी। अखिल भारतीय गहोई वैश्य महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 28 फरवरी को होगी। इसमें देश के गहोई महासभा के 250 प्रतिनिधि शामिल होंगे। 27 फरवरी को महासभा के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण होगा। यह जानकारी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृष्णकिशोर कठिल ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सामाजिक विषयों पर चर्चा होगी, इसमें संगठन विस्तार, समाज को शासन की योजनाओं का लाभ मिले, इस पर चर्चा होगी। समाज के गरीब, कमजोर बंधुओं के स्वास्थ्य एवं प्रतिभावान छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। इस पर भी प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके लिए अक्षय निधि की व्यवस्था समाज द्वारा की जाएगी। व्यापारिक शोषण के शिकार होने वाले समाज के व्यापारियों के उत्पीड़न की रोकथाम के लिए कार्य योजना बनाई जाएगी। राजनीतिक रूप से समाज की भागीदारी के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क कर संसद, विधान मंडल, स्थानीय निकाय और जिला पंचायत में सक्रिय कार्यकर्ताओं को निश्चित रूप से भेजने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि महासभा की स्थापना सात अप्रैल 1914 को हुई थी। उस समय भारत स्वाधीन नहीं था। गहोई समाज कई समस्याओं से ग्रस्त था। समाज को एकजुट करने के लिए स्थापना की। स्थापना से लेकर अब तक संस्था को 107 साल हो गए हैं। महासभा में कभी विघटन नहीं हुआ है। निरंतर समाज सेवा व राष्ट्रभक्ति के साथ राष्ट्र सेवा में लगे हुए हैं। हम भगवान सूर्य के उपासक हैं। हमारा ध्वज केसरिया है। इस दौरान राजेंद्र गुप्ता, रामप्रकाश हथनौरिया, भरत सेठ, मनमोहन गेड़ा, विजय गुप्ता गब्बर, सतीश गुप्ता, विकास नगरिया, शैलेंद्र डेंगरे, घनश्याम कनकने, हेमंत खंताल मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में सामाजिक विषयों पर चर्चा होगी, इसमें संगठन विस्तार, समाज को शासन की योजनाओं का लाभ मिले, इस पर चर्चा होगी। समाज के गरीब, कमजोर बंधुओं के स्वास्थ्य एवं प्रतिभावान छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। इस पर भी प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके लिए अक्षय निधि की व्यवस्था समाज द्वारा की जाएगी। व्यापारिक शोषण के शिकार होने वाले समाज के व्यापारियों के उत्पीड़न की रोकथाम के लिए कार्य योजना बनाई जाएगी। राजनीतिक रूप से समाज की भागीदारी के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क कर संसद, विधान मंडल, स्थानीय निकाय और जिला पंचायत में सक्रिय कार्यकर्ताओं को निश्चित रूप से भेजने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि महासभा की स्थापना सात अप्रैल 1914 को हुई थी। उस समय भारत स्वाधीन नहीं था। गहोई समाज कई समस्याओं से ग्रस्त था। समाज को एकजुट करने के लिए स्थापना की। स्थापना से लेकर अब तक संस्था को 107 साल हो गए हैं। महासभा में कभी विघटन नहीं हुआ है। निरंतर समाज सेवा व राष्ट्रभक्ति के साथ राष्ट्र सेवा में लगे हुए हैं। हम भगवान सूर्य के उपासक हैं। हमारा ध्वज केसरिया है। इस दौरान राजेंद्र गुप्ता, रामप्रकाश हथनौरिया, भरत सेठ, मनमोहन गेड़ा, विजय गुप्ता गब्बर, सतीश गुप्ता, विकास नगरिया, शैलेंद्र डेंगरे, घनश्याम कनकने, हेमंत खंताल मौजूद रहे।
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